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    'आप मुझे चेहरा दिखाओ, मैं नियम दिखाऊंगा' पूर्व CPS को विशेष सेवाएं देने पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त, सरकार से मांगा जवाब

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 12:07 PM (GMT+05:30)

    हिमाचल हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों के सरकारी आवासों को नियमित करने के सरकार के फैसले पर सख्त रुख अपनाया है। ...और पढ़ें

    पूर्व CPS को विशेष सेवाएं देने पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त (फाइल फोटो)

    पूर्व CPS को विशेष सेवाएं देने पर हिमाचल हाईकोर्ट सख्त (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. हाई कोर्ट ने पूर्व सीपीएस आवास नियमितीकरण पर सरकार को घेरा।

    2. सरकार के 'चेहरा दिखाओ, नियम दिखाओ' सिद्धांत पर सवाल।

    3. मुख्य सचिव को शपथपत्र दायर करने के निर्देश दिए।

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने पूर्व मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) के सरकारी आवासों में रहने को वैध (नियमित) करने के प्रदेश सरकार के फैसले पर सख्त रुख अपनाया है।

    कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार इस सिद्धांत पर काम नहीं कर सकती कि आप मुझे चेहरा दिखाओ, मैं आपको नियम दिखाऊंगा। अदालत ने सवाल उठाया कि पद से हटाए जाने के बावजूद इन छह पूर्व पदाधिकारियों को बिना आवेदन किए विशेष लाभ कैसे दे दिए गए।

    मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायमूर्ति बिपिन सी नेगी की खंडपीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। हाई कोर्ट द्वारा पूर्व में मुख्य संसदीय सचिवों की नियुक्तियों को रद किए जाने के बाद वे कानूनी रूप से इन सरकारी आवासों के हकदार नहीं रह गए थे।

    इसके बावजूद सरकार ने उन्हें बेदखल करने के बजाय गुपचुप तरीके से नियमों को शिथिल कर दिया। सरकार द्वारा कोर्ट में पेश की मूल फाइल से पता चला कि चार मई 2026 को मुख्यमंत्री की मंजूरी के बाद कैबिनेट के माध्यम से इन पूर्व सीपीएस के रहने को 14 नवंबर 2024 से नियमित कर दिया था।

    सरकार मामले को कालीन में दबाकर रख देती: अदालत

    इसके तहत उन्हें केवल सामान्य लाइसेंस शुल्क देकर रहने की अनुमति दी गई। पीठ ने कहा कि यदि अदालत इस मामले पर संज्ञान लेकर नोटिस जारी नहीं करती तो सरकार इस पूरे मामले को कालीन के नीचे (दबाकर) रख देती।

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    सरकार ने अलाटमेंट रूल्स 1994 के नियम 24 का इस्तेमाल कर बिना किसी आवेदन के ही नियमों में ढील दे दी। हाई कोर्ट ने इस फैसले को समानता के अधिकार और शक्तियों का मनमाना इस्तेमाल मानते हुए मुख्य सचिव को शपथपत्र दायर करने के निर्देश दिए हैं, जिसमें कुछ अहम जानकारियां मांगी हैं।

    औपचारिक आवेदन पर कैसे दी रियायत: अदालत

    कोर्ट ने पूछा है कि अन्य सामान्य सरकारी कर्मचारियों के मामलों में अब तक कितनी बार ऐसी विशेष अनुमति या छूट दी गई है। इन छह पूर्व सीपीएस को बिना किसी औपचारिक आवेदन के किस आधार पर यह विशेष रियायत दी जा रही है।

    पद से हटने के बाद अवैध रूप से रहने की अवधि के लिए इन पर कितना दंडात्मक किराया बनता है, उसका पूरा विवरण दिया जाए। कोर्ट ने प्रदेश सरकार को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि पूर्व सीपीएस के आवास नियमित करने के इस मनमाने फैसले पर तुरंत रोक क्यों न लगा दी जाए। मामले की सुनवाई 19 अगस्त को होगी।