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हिमाचल में 27 वर्ष बाद शुरू हो रही लॉटरी पर घमासान, CM सुक्खू बोले- भाग्य का खेल; किसी पर खरीदने की बाध्यता नहीं

By Parkash Bhardwaj Edited By: Rajesh Sharma
Published: Thu, 27 Aug 2026 03:29 PM (IST)Updated: Thu, 27 Aug 2026 04:36 PM (IST)

मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने हिमाचल प्रदेश में 27 साल बाद शुरू हो रही लॉटरी को भाग्य का खेल बताया ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बात रखते सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

हिमाचल प्रदेश विधानसभा में बात रखते सीएम सुखविन्द्र सिंह सुक्खू।

HighLights

  1. सीएम सुक्खू: लॉटरी भाग्य का खेल, स्वैच्छिक भागीदारी।

  2. खरीदने की कोई बाध्यता नहीं, पूरी पारदर्शिता रहेगी।

  3. राज्य को सालाना 50-100 करोड़ राजस्व का अनुमान।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश में लॉटरी को लेकर विपक्ष और विभिन्न हलकों से उठ रहे सवालों के बीच मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने बयान दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉटरी पूरी तरह भाग्य पर आधारित खेल है और किसी भी नागरिक पर इसे खरीदने का कोई दबाव या बाध्यता नहीं है। लॉटरी से जुड़ी पूरी प्रक्रिया को निर्धारित नियमों और पारदर्शिता के दायरे में ही रखा जाएगा, ताकि किसी प्रकार की अनियमिता की गुंजाइश न रहे।

सरकार जनहित और कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए ही आगे के कदम तय करेगी। जिसकी स्वेच्छा होगी, केवल वही व्यक्ति इसे खरीदेगा। 

विधानसभा में मीडिया से बातचीत करते हुए मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि लॉटरी व्यवस्था को लेकर अनावश्यक भ्रम फैलाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लॉटरी में भाग लेना पूरी तरह से स्वैच्छिक है। शासन या प्रशासन की ओर से किसी भी वर्ग पर इसे खरीदने का कोई प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष दबाव नहीं बनाया जा रहा है। नागरिक अपनी समझ और इच्छा के अनुसार ही इसमें शामिल होने का निर्णय ले सकते हैं। 

विपक्ष के सवालों पर विचार करेगी सरकार

लॉटरी के संचालन को लेकर विपक्षी भाजपा द्वारा उठाए गए सवालों और सौंपे गए पत्रों पर प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में विपक्ष की बातों का भी महत्व है। विपक्ष की ओर से इस संदर्भ में जो भी पत्र मिले हैं और जो बिंदु उठाए गए हैं, सरकार उन पर गंभीरता से विचार और समीक्षा करेगी।

लॉटरी कब बंद हुई थी?

प्रदेश में सरकारी लाटरी व्यवस्था को वर्ष 1999 (तत्कालीन प्रेम कुमार धूमल सरकार के कार्यकाल) में बंद किया गया था। सामाजिक दुष्प्रभावों, परिवारों पर पड़ते आर्थिक असर और अदालती हस्तक्षेप के बाद राज्य में लॉटरी पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया था, जिससे यह व्यवस्था करीब 25-27 वर्षों से बंद थी।

शुरू करने से सरकार को कितने करोड़ की आमदनी होगी

कर्ज के दबाव से जूझ रही राज्य सरकार को लॉटरी पुनः शुरू करने से सालाना 50 करोड़ से 100 करोड़ (विस्तार के बाद अधिकतम 120 करोड़ तक) का गैर-कर राजस्व मिलने का अनुमान है। लॉटरी संचालन के लिए नियुक्त होने वाले सोल सेलिंग एजेंट से सरकार को प्रतिवर्ष कम से कम 10 करोड़ की लाइसेंस फीस मिलेगी (जिसमें हर साल 5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी)। एजेंट को न्यूनतम 6 करोड़ वार्षिक गारंटी राशि देनी होगी।

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