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हिमाचल में बरसात के बाद 800 KM सड़कों की टारिंग होगी, PWD मंत्री विक्रमादित्य ने विधानसभा में दिया बयान

By Anil Thakur Edited By: Rajesh Sharma
Published: Mon, 24 Aug 2026 04:33 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश में बरसात के बाद 800 किलोमीटर सड़कों की टारिंग फिर से शुरू होगी, जिस पर 120 करोड़ रुपये ...और पढ़ें

हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. बरसात के बाद हिमाचल में 800 किलोमीटर सड़कों की टारिंग होगी।

  2. इस कार्य पर 120 करोड़ रुपये का खर्च आएगा।

  3. प्रदेश में 1500 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण भी जारी है।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल प्रदेश के लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि बरसात खत्म होने के बाद प्रदेशभर में 800 किलोमीटर सड़कों की टारिंग दोबारा शुरू की जाएगी। इस पर 120 करोड़ रुपये खर्च होंगे। सोमवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक डा. हंसराज के प्रश्न के उत्तर में मंत्री ने बताया कि मार्च से मई के बीच टारिंग का निर्धारित लक्ष्य पूरा नहीं हो सका। कोलतार के दाम बढ़ने से काम प्रभावित हुआ। बढ़ी लागत का पूरा खर्च राज्य सरकार वहन करेगी।

विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि विभाग प्रदेश में 1500 किलोमीटर नई सड़कों का निर्माण भी करवा रहा है और बजट की कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के लिए जमीन विभाग के नाम गिफ्ट डीड करने पर सड़क बनाई जाएगी।

चुराह की सड़कों का किया जिक्र

चुराह क्षेत्र की कल्हेल-भल्लीघराट-नैला सड़क को जुंगराहर, हुदूंड़ और रैला आदि गांवों से जोड़ने के लिए फिलहाल किसी मद में प्रविधान नहीं है। कल्हेल-शिंड़ मुख्य सड़क की लंबाई 6.5 किलोमीटर है। पर्याप्त बजट न होने से इसका निर्माण शुरू नहीं हो सका। अब इसे प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-4 (बैच-2) में प्रस्तावित किया गया है। इसकी डीपीआर तैयार की जा रही है, जिसे जल्द राज्य तकनीकी अभिकरण को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

निजी भूमि बनी जसौरगढ़-लघा सड़क की राह में बाधा

सुलोई, ढांड और खंडयारू गांवों को जोड़ने वाली मोटर योग्य जसौरगढ़-लघा सड़क लघा गांव तक बन चुकी है। आगे सर्वेक्षण में 45 प्रतिशत निजी और 55 प्रतिशत वन भूमि पाई गई है। निजी भूमि की गिफ्ट डीड अभी विभाग को नहीं मिली है। विभाग ग्रामीणों से भूमि विभाग के नाम करने का आग्रह कर रहा है। भूमि मिलते ही फारेस्ट केस तैयार कर वन विभाग को मंजूरी के लिए भेजा जाएगा।

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