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    'समन पर भी सुनवाई में नहीं आए तो पुलिस घर से लाएगी', हिमाचल महिला आयोग गैरहाजिर रहने वालों पर हुआ सख्त

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Wed, 24 Jun 2026 12:56 PM (GMT+05:30)

    हिमाचल राज्य महिला आयोग ने सुनवाई में लगातार गैरहाजिर रहने वाले पक्षों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दो बार नोटिस के बाद भी न ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी।

    हिमाचल प्रदेश महिला आयोग की अध्यक्ष विद्या नेगी।

    HighLights

    1. महिला आयोग ने गैरहाजिर पक्षों पर सख्त रुख अपनाया।

    2. दो नोटिस के बाद पुलिस घर से लाएगी पेशी पर।

    3. लंबित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए यह कदम।

    जागरण संवाददाता, शिमला। राज्य महिला आयोग ने सुनवाई में लगातार गैरहाजिर रहने वाले पक्षों के प्रति सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि दो बार नोटिस जारी होने के बावजूद यदि कोई पक्ष सुनवाई में उपस्थित नहीं होता है तो उसे पुलिस के माध्यम से घर से लाकर पेश किया जाएगा। मंगलवार को आयोग में विभिन्न शिकायतों से जुड़े 40 मामलों की सुनवाई निर्धारित थी। इनमें से केवल 22 मामलों पर ही सुनवाई हो सकी, जबकि अधिकांश मामलों में एक या दोनों पक्षों के उपस्थित न होने के कारण सुनवाई आगे बढ़ानी पड़ी। आयोग ने ऐसे मामलों को नई तिथि देते हुए संबंधित पक्षों को अंतिम अवसर दिया है।

    वर्षों से लंबित मामले

    आयोग के समक्ष कई मामले वर्षों से लंबित हैं। कुछ शिकायतें ऐसी हैं, जो पांच से छह वर्षों से निपटारे की प्रतीक्षा कर रही हैं। बार-बार नोटिस जारी होने के बावजूद पक्षों के उपस्थित न होने से मामलों के समाधान में देरी हो रही है। आयोग ने कहा कि पीड़ित महिलाओं को समय पर न्याय दिलाने के लिए अब सख्ती बरती जाएगी। 

    सुनवाई में नहीं पहुंच रहे

    कई शिकायतों में जवाब देने के लिए बुलाए दूसरे पक्ष के लोग सुनवाई में नहीं पहुंच रहे हैं, जिससे शिकायतों का निस्तारण प्रभावित हो रहा है। ऐसे मामलों में अब पुलिस की सहायता लेने के निर्देश दिए गए हैं।

    बिना मामला दर्ज किए भी उलझ रहे मामले

    महिला आयोग के समक्ष कुछ ऐसे मामले भी सामने आए हैं, इनमें औपचारिक शिकायत दर्ज किए बिना ही ससुराल पक्ष को सुनवाई के लिए बुलाया गया और समझौते के प्रयास किए। आयोग के अनुसार पांच मामलों में महिला का विधिवत मामला दर्ज किए बिना ही दोनों पक्षों को बुलाया गया था। इससे मामलों की प्रक्रिया और अधिक जटिल हो गई। 

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    आयोग ने भविष्य में नियमानुसार शिकायत दर्ज होने के बाद ही आगे की कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

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