HRTC कंडक्टर पर वायरल वीडियो के बाद एक्शन, यूनियन नेता बोले- यह न्यायसंगत नहीं; बिना टिकट यात्री पर हुआ था विवाद
इंटरनेट मीडिया पर वायरल वीडियो के बाद एचआरटीसी परिचालक गीता नंद का तारादेवी से नेरवा यूनिट में तबादला कर दिया गया है। यूनियन ने इस कार्रवाई पर सवाल उठ ...और पढ़ें

एचआरटीसी कंडक्टर का वीडियो वायरल होने के बाद निगम ने कार्रवाई की है।
HighLights
वायरल वीडियो के बाद एचआरटीसी परिचालक का तबादला।
परिचालक ने टिकट जांच पर एचआरटीसी कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए थे।
यूनियन ने परिचालक के खिलाफ कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताया।
राज्य ब्यूरो, शिमला। बीते दिनों इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुए वीडियो के बाद हिमाचल पथ परिवहन निगम के परिचालक को तारादेवी यूनिट से फिर नेरवा यूनिट में तैनात कर दिया है। एचआरटीसी के उपमंडल प्रबंधक तारादेवी यूनिट-एक ने इस संबंध में कार्यालय आदेश जारी किया है। परिचालक को तुरंत नेरवा अड्डा प्रभारी के पास रिपोर्ट करने के निर्देश दिए हैं।
यह आदेश उस समय आया है जब कुछ दिन पहले परिचालक का एक वीडियो इंटरनेट मीडिया पर प्रसारित हुआ था। वीडियो में परिचालक ने एचआरटीसी की कार्यप्रणाली और विभागीय प्रबंधन पर सवाल उठाए थे।
टिकट जांच से जुड़ा है मामला
यह मामला शिमला से रिकांगपिओ जा रही एचआरटीसी की बस में हुई टिकट जांच से जुड़ा है। निगम के फ्लाइंग स्क्वाड ने बस की जांच के दौरान एक यात्री को बिना टिकट पाया था। इसके बाद परिचालक गीतानंद के खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू हुई। इसी घटना के बाद परिचालक ने वीडियो जारी कर अपनी बात रखी।
यूनियन ने उठाए सवाल
इस मामले को लेकर हिमाचल प्रदेश स्टेट एचआरटीसी कंडक्टर यूनियन ने बसों में टिकट जांच के दौरान परिचालकों के खिलाफ की जाने वाली कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। यूनियन के महासचिव दीपेंद्र कंवर ने कहा कि यदि यह स्पष्ट हो जाए कि परिचालक ने किसी यात्री से किराया नहीं लिया है तो उसके खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के बजाय बिना टिकट यात्रा करने वाले यात्री पर कार्रवाई की जाए।
ऐसे मामलों में विभागीय चालान बुक के माध्यम से संबंधित यात्री से जुर्माना वसूला जाए और यह राशि विभाग के खाते में जमा करवाई जाए।
यूनियन का तर्क है कि जब परिचालक की कोई गलती नहीं है और उसने किराया प्राप्त ही नहीं किया तो उसे दोषी मानकर दंडित करना न्यायसंगत नहीं है। यदि कोई परिचालक वास्तव में दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बेगुनाह कर्मचारी को सजा देना उचित नहीं है।