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    शिमला शहर में भूस्खलन से दहशत में लोग, बोले- तिरपाल बिछाने से नहीं चलेगा काम, पानी का बहाव बड़ी परेशानी

    By Rohit Sharma Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sun, 26 Jul 2026 05:28 PM (GMT+05:30)

    शिमला के लोअर पंथाघाटी में बरसात के कारण भवनों पर भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। स्थानीय लोग प्रशासन से तिरपाल की बजाय स्थायी जल निकासी व्यवस्था और सुरक् ...और पढ़ें

    शिमला में भूस्खलन के कारण भवन खतरे में हैं। जागरण

    शिमला में भूस्खलन के कारण भवन खतरे में हैं। जागरण

    HighLights

    1. लोअर पंथाघाटी में बरसात से भवनों पर भूस्खलन का खतरा।

    2. स्थानीय लोग स्थायी जल निकासी व्यवस्था की तत्काल मांग कर रहे।

    3. प्रशासन से तकनीकी सर्वेक्षण और सुरक्षा उपाय करने की अपील।

    जागरण संवाददाता, शिमला। शिमला के लोअर पंथाघाटी क्षेत्र में बरसात के बीच खतरे की जद में आए भवनों को लेकर स्थानीय लोगों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। प्रभावित क्षेत्र के निवासियों का कहना है कि प्रशासन द्वारा फिलहाल तिरपाल बिछाकर अस्थायी राहत देने का प्रयास किया गया है, लेकिन यह समस्या का स्थायी समाधान नहीं है। 

    लोगों का मानना है कि यदि समय रहते जल निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं की गई तो लगातार हो रही बारिश के दौरान भवनों को और अधिक खतरा पैदा हो सकता है। 

    पानी का बहाव खतरा

    स्थानीय लोगों के अनुसार जिन भवनों पर खतरा मंडरा रहा है, उनके नीचे मेहली-जुंगा सड़क और ऊपर शोघी-मेहली बाईपास स्थित है। बारिश के दौरान पहाड़ी से बहने वाला पानी आसपास एकत्रित हो जाता है, जिससे भूमि की स्थिरता प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। 

    ऐसे में केवल तिरपाल बिछाने की बजाय वैज्ञानिक तरीके से जल निकासी और ड्रेनेज व्यवस्था विकसित करना आवश्यक है। 

    स्थायी ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए

    पूर्व डिप्टी मेयर नगर निगम शिमला राकेश शर्मा, स्थानीय निवासी नंदलाल, रमन कांत और चेतन मेहता ने प्रशासन से मांग की है कि प्रभावित भवनों के आसपास पानी जमा होने से रोकने के लिए तत्काल प्रभाव से स्थायी ड्रेनेज सिस्टम बनाया जाए। उनका कहना है कि बरसात के मौसम में पानी की निकासी का उचित प्रबंध नहीं होने से खतरा लगातार बढ़ रहा है और भविष्य में स्थिति गंभीर हो सकती है।

    मेहली-जुन्गा सड़क पर हो प्रभावी जल निकासी

    उन्होंने यह भी मांग उठाई कि मेहली-जुन्गा सड़क पर भी प्रभावी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए ताकि वर्षा का पानी सीधे बह सके और प्रभावित क्षेत्र में एकत्रित न हो। उनका कहना है कि यदि पानी की निकासी सही ढंग से होगी तो भू-स्खलन और भूमि धंसने जैसी आशंकाओं को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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    स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी

    स्थानीय लोगों ने प्रशासन से आग्रह किया है कि प्रभावित क्षेत्र का तकनीकी सर्वेक्षण करवाकर विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएं। उनका कहना है कि बरसात अभी जारी है और आने वाले दिनों में भारी वर्षा होने की संभावना से इन भवनों के निवासियों की चिंता और बढ़ गई है। लोगों ने प्रशासन से जल्द प्रभावी कदम उठाकर प्रभावित परिवारों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है।

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