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    हिमाचल में पुलिस चौकी के लिए मंजूर बजट खर्च दिया SP शिमला की कोठी पर, 14.07 लाख व्यय की विजिलेंस जांच होगी

    By Chaitanaya ThakurEdited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 01 Aug 2026 12:33 PM (GMT+05:30)

    पुलिस मुख्यालय ने शिमला के एसपी आवास की मरम्मत पर हुए 14.07 लाख रुपये के खर्च में अनियमितताओं की आशंका पर विजिलेंस जांच की सिफारिश की है। ...और पढ़ें

    शिमला के पूर्व एसपी संजीव गांधी। जागरण आर्काइव

    शिमला के पूर्व एसपी संजीव गांधी। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. एसपी आवास मरम्मत पर 14.07 लाख रुपये का खर्च।

    2. पुलिस चौकी शोघी के लिए स्वीकृत धन का उपयोग।

    3. विजिलेंस जांच और विशेष ऑडिट समिति गठित।

    चैतन्य ठाकुर, शिमला। पुलिस अधीक्षक (एसपी) शिमला के सरकारी आवास साउथवुड की मरम्मत एवं रखरखाव पर हुए 14.07 लाख रुपये के खर्च को लेकर पुलिस मुख्यालय ने बड़ा कदम उठाया है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) शिमला की रिपोर्ट में सरकारी धन के कथित अनियमित उपयोग की आशंका जताते हुए तत्कालीन एसपी संजीव कुमार गांधी समेत इस प्रकरण से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (विजिलेंस) से जांच करवाने की सिफारिश की गई है।

    पुलिस चौकी के लिए स्वीकृत रकम भी खर्च कर दी

    रिपोर्ट के अनुसार एसपी आवास की मरम्मत पर 14,07,392 रुपये खर्च किए गए। इसमें 11,57,392 रुपये जिला पुलिस के आवासीय मद से खर्च किए, जबकि 2.50 लाख रुपये ऐसी राशि थी, जिसे मूल रूप से एसडीएम (नागरिक) ठियोग ने पुलिस चौकी शोघी की मरम्मत एवं रखरखाव के लिए स्वीकृत किया था। इसी राशि के उपयोग सहित पूरे खर्च की वैधता अब जांच के दायरे में रहेगी।

    ऑडिट कमेटी गठित

    इसी रिपोर्ट के आधार पर पुलिस मुख्यालय ने मामले की तथ्यात्मक पड़ताल के लिए तीन सदस्यीय विशेष आडिट समिति गठित कर दी है। समिति को एक सप्ताह में जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं।

    एसएसपी की रिपोर्ट के बाद खुलासा

    मामला 30 जुलाई को एसएसपी शिमला द्वारा पुलिस महानिदेशक को भेजी गई रिपोर्ट के बाद सामने आया। रिपोर्ट में वर्ष 2022-23 से 2024-25 के दौरान एसपी आवास में करवाए गए मरम्मत एवं रखरखाव कार्यों पर हुए खर्च की प्रक्रिया और सरकारी धन के उपयोग पर सवाल उठाए गए हैं।

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    समिति करेगी जांच

    पुलिस मुख्यालय के आदेश के अनुसार विशेष आडिट समिति प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों, टेंडर प्रक्रिया, खरीद रिकार्ड, बिल, वाउचर, कैश बुक, माप पुस्तिका (एमबी), कार्यपूर्णता प्रमाणपत्र और भुगतान से जुड़े सभी दस्तावेजों की जांच करेगी।

    समिति यह भी सत्यापित करेगी कि जिन कार्यों का भुगतान किया वे वास्तव में मौके पर किए गए थे या नहीं। इसके लिए एसपी शिमला सहित सभी संबंधित अधिकारियों और शाखाओं को मूल रिकार्ड उपलब्ध करवाने तथा जांच में सहयोग देने के निर्देश दिए हैं।

    ...तो हो सकती है कार्रवाई

    आडिट आदेश में कहा है कि यदि जांच के दौरान सरकारी धन का अनधिकृत उपयोग, धन का डायवर्जन, वित्तीय नियमों का उल्लंघन, गलत लेखांकन, फर्जी या भ्रामक रिकार्ड अथवा अन्य वित्तीय अनियमितताएं सामने आती हैं तो संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करते हुए आगे की विभागीय और कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की जाएगी।

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