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    हिमाचल: नाहन में मोबाइल कंपनी का पोल लगाने को खोदे गए गड्ढे में गिरा तेंदुए का बच्चा, वन विभाग ने किया रेस्क्यू

    Updated: Fri, 24 Jul 2026 04:28 PM (IST)

    नाहन में मोबाइल पोल के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में फंसे एक माह के तेंदुए के शावक को स्थानीय युवाओं और वन विभाग ने बचाया। ...और पढ़ें

    गड्ढे में गिरे तेंदुए के शावक की जान बची, युवाओं और वन विभाग ने किया रेस्क्यू।

    गड्ढे में गिरे तेंदुए के शावक की जान बची, युवाओं और वन विभाग ने किया रेस्क्यू।

    HighLights

    1. नाहन में गहरे गड्ढे में फंसा तेंदुए का बच्चा

    2. स्थानीय युवाओं की सतर्कता से वन विभाग ने बचाया

    3. शावक को प्राथमिक उपचार के बाद विशेष देखभाल मिलेगी

    जागरण संवाददाता, नाहन। जिला सिरमौर के नाहन सराहां कुमारहट्टी नेशनल हाईवे 907ए पर जांगीरुग के समीप मोबाइल कंपनी का पोल लगाने के लिए खोदे गए गहरे गड्ढे में गिरने से करीब एक माह का तेंदुए का शावक (बच्चा) देर रात से फंसा रहा।

    गड्ढे में पोल लगाने के लिए सीमेंट की पुलिया खड़ी की गई थी, जिसमें शावक फंसा हुआ था। भूख-प्यास से बेहाल शावक की जान दो स्थानीय युवाओं की सतर्कता और वन विभाग के समय पर किए गए रेस्क्यू अभियान से बच सकी।

    प्राप्त जानकारी के अनुसार कच्चा टैंक निवासी फहीम और जीशान शुक्रवार को जमटा की ओर जा रहे थे। रास्ते में पैराफिट के पास बैठने के दौरान उन्हें किसी छोटे जीव के रोने की आवाज सुनाई दी।

    मोबाइल की रोशनी से देखने पर सीमेंट की पुलिया के गहरे गड्ढे में तेंदुए का दूधमुंहा शावक फंसा हुआ दिखा। दोनों युवाओं ने तुरंत वन विभाग को सूचना दी। वही डीएफओ नाहन अवनी भूषण राय के निर्देश पर जमटा वन परिक्षेत्र के रेंज अधिकारी प्रेम कंवर, बीट अधिकारी और वन रक्षक मौके पर पहुंचे।

    करीब दो घंटे तक चले रेस्क्यू अभियान में सड़क निर्माण कार्य में लगी जेसीबी मशीन की मदद से शावक के समानांतर दूसरा गड्ढा खोदा गया और सावधानीपूर्वक उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। वन विभाग जमटा के रेंज अधिकारी प्रेम कंवर ने बताया कि शावक की आयु लगभग एक माह है।

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    वह काफी कमजोर और भूखा था। प्राथमिक उपचार और देखभाल के लिए उसे पशु चिकित्सालय ले जाया गया है। इसके बाद उसे वन्यजीव विभाग श्रीरेणुकाजी के सुपुर्द किया जाएगा, जहां उसकी विशेष निगरानी और देखभाल होगी।

    उधर, स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गहरे गड्ढों की समय रहते बैरिकेडिंग या सुरक्षित ढंग से ढकने की व्यवस्था की जाती, तो यह हादसा टाला जा सकता था। ऐसे खुले गड्ढे न केवल वन्यजीवों बल्कि राहगीरों के लिए भी जानलेवा साबित हो सकते हैं।