कफ सिरप से लेकर बीपी-शुगर की गोलियां तक...; आपकी सेहत से खिलवाड़ कर रही हैं ये 120 दवाएं; टेस्ट में हुईं फेल
केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन के अप्रैल ड्रग अलर्ट में देशभर की 120 दवाएं गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाई गईं, जिनमें हिमाचल में बनी 31 दवाएं शामिल ह ...और पढ़ें

देशभर की 120 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं, 31 हिमाचल में बनीं।
HighLights
अप्रैल ड्रग अलर्ट में 120 दवाएं गुणवत्ता में फेल
हिमाचल में बनी 31 दवाएं मानकों पर खरी नहीं उतरीं
कफ सिरप, इंजेक्शन, गंभीर बीमारियों की दवाएं शामिल
जागरण संवाददाता, सोलन। केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) की ओर से अप्रैल के जारी ड्रग अलर्ट में देशभर में बनी 120 दवाओं के सैंपल फेल हुए हैं। एक दवा नकली पाई गई है। राहत की बात है कि इस बार हिमाचल सहित देश के अन्य राज्यों से लिए सैंपल रिपोर्ट में पिछले महीने की तुलना में इस माह सैंपल फेल होने की दर घटी है। हिमाचल में बनी 31 दवाओं के सैंपल गुणवत्ता में खरे नहीं उतरे। उत्तराखंड की 24 और गुजरात की 20 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए हैं।
मानकों पर खरी नहीं उतरीं 120 दवाओं में अधिकतर कफ सिरप, इंजेक्शन, सिरदर्द, दिल के रोग से संबंधित हैं। इनमें दिल, मिर्गी, ब्लड प्रेशर और शुगर जैसी गंभीर बीमारियों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं। कुछ पाउडर, आयरन, मेहंदी कोण व विटामिन की गोलियां भी गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाई गईं।
अप्रैल के ड्रग अलर्ट में 18 इंजेक्शन और 13 कफ सिरप के सैंपल भी फेल पाए गए हैं। हिमाचल, उत्तराखंड व गुजरात के अलावा तेलंगाना के सात, सिक्किम के पांच, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, राजस्थान और महाराष्ट्र से चार-चार, पंजाब, जम्मू कश्मीर व तमिलनाडु से तीन-तीन, पुडुचेरी से दो और बिहार व बंगाल से एक-एक दवा का सैंपल फेल हुआ है।
जनवरी से मार्च तक इतनी दवाओं के सैंपल हुए फेल

सीडीएससीओ द्वारा जारी मार्च के ड्रग अलर्ट में 141 दवाओं के सैंपल फेल पाए गए थे, जिनमें हिमाचल की 47, उत्तराखंड की 20, गुजरात की 23 दवाओं सहित अन्य राज्यों की दवाएं शामिल थीं।
फरवरी में 198 दवाएं फेल पाई थीं, जिसमें हिमाचल की 73, उत्तराखंड की 35, गुजरात की 15, मध्य प्रदेश की 13 दवाओं सहित अन्य राज्यों की भी शामिल थीं। जनवरी में 218 दवाएं फेल पाई गई थीं, जिनमें हिमाचल की 71, उत्तराखंड की 28, गुजरात की 23, मध्य प्रदेश की 15 व महाराष्ट्र की 13 दवाओं सहित अन्य राज्यों की भी थीं।
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विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा लागू किए रिवाइज्ड शेड्यूल के तहत अब दवा उत्पादन में बदलाव किए गए हैं। दवा उत्पादन के दौरान सख्ती को और अधिक बढ़ाया है। गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है। हमारा प्रयास है कि दवा सैंपल फेल के आंकड़े पूरी तरह कम हो जाएं। जो भी दवाएं फेल पाई जाती हैं, उनकी सारी जानकारी पब्लिक प्लेटफार्म पर सार्वजनिक की जाती है, ताकि लोग इनका उपयोग न करें।- डॉ. मनीष कपूर, राज्य दवा नियंत्रक।