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    हिमाचल की नालागढ़ ट्रक यूनियन ने बढ़ाया मालभाड़ा, पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ने के बाद फैसला; पड़ेगी महंगाई की मार

    By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Sat, 16 May 2026 12:20 PM (IST)

    नालागढ़ ट्रक यूनियन ने पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण मालभाड़े में वृद्धि की है। इससे बीबीएन क्षेत्र के उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और उपभोक ...और पढ़ें

    नालागढ़ ट्रक यूनियन ने मालभाड़ा बढ़ा दिया है। जागरण आर्काइव

    नालागढ़ ट्रक यूनियन ने मालभाड़ा बढ़ा दिया है। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. नालागढ़ ट्रक यूनियन ने मालभाड़े में एक रुपये प्रति किलोमीटर की वृद्धि की।

    2. पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण यह फैसला लिया गया।

    3. इससे उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और उपभोक्ताओं पर बोझ पड़ेगा।

    जागरण संवाददाता, सोलन। हिमाचल प्रदेश के औद्योगिक क्षेत्र बीबीएन (बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़) में पेट्रोल व डीजल के दाम बढ़ने के बाद इसका असर भी साफ दिखाई देने लगा है। एशिया की सबसे बड़ी ट्रक यूनियनों में शामिल नालागढ़ ट्रक यूनियन ने मालभाड़े में बढ़ोतरी कर दी है। यूनियन द्वारा बढ़ाया गया नया मालभाड़ा तत्काल प्रभाव से लागू कर दिया गया है, जिससे उद्योगों की उत्पादन लागत बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

    जानकारी के अनुसार डीजल की कीमतों में हाल ही में हुई वृद्धि के बाद ट्रक यूनियन ने एक रुपये प्रति किलोमीटर मालभाड़े में बढ़ोतरी का फैसला लिया है।

    यूनियन और उद्योग संघ के बीच पहले से समझौता

    मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यूनियन और उद्योग संघ के बीच पहले से एक समझौता है, जिसके तहत डीजल की कीमत बढ़ने पर मालभाड़ा भी उसी अनुपात में संशोधित किया जाता है। पहले भी वर्ष 2016, 2018 और 2022 में डीजल महंगा होने पर यूनियन ने भाड़े में बढ़ोतरी की थी।

    देश का प्रमुख औद्योगिक हब है बीबीएन, बढ़ेंगे उत्पाद के दाम

    बीबीएन क्षेत्र देश का प्रमुख औद्योगिक हब माना जाता है, जहां से फार्मा, एफएमसीजी, प्लास्टिक, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य उत्पाद पूरे देश में भेजे जाते हैं। ऐसे में ट्रांसपोर्ट लागत बढ़ने का सीधा असर तैयार उत्पादों की कीमतों पर पड़ना तय माना जा रहा है। उद्योगों का कहना है कि बाहर से आने वाला कच्चा माल अब महंगा पड़ेगा, वहीं तैयार माल की सप्लाई लागत भी बढ़ जाएगी। इसका बोझ अंततः आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा। 

    ट्रकों के जरिए ही देशभर में सप्लाई

    आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि डीजल की कीमत बढ़ने से सबसे अधिक असर परिवहन क्षेत्र पर पड़ता है। ट्रकों के जरिए ही देशभर में खाद्य सामग्री, दवाइयां, निर्माण सामग्री और रोजमर्रा का सामान पहुंचता है। ऐसे में मालभाड़ा बढ़ने से महंगाई का दायरा और व्यापक हो सकता है। हालिया मीडिया रिपोर्टों में भी बताया गया है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से दूध, सब्जियां, किराना और परिवहन सेवाएं महंगी हो सकती हैं। 

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    क्या कहते हैं यूनियन अध्यक्ष

    ट्रक यूनियन के अध्यक्ष विद्या रतन ने कहा कि लगातार बढ़ती डीजल कीमतों के कारण ट्रक ऑपरेटरों पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। कई बार ट्रक एक तरफ माल लेकर जाते हैं, लेकिन वापसी में खाली आते हैं, जिससे डीजल खर्च और बढ़ जाता है। ऐसे में भाड़ा बढ़ाना मजबूरी बन गया है।

    वहीं उद्योग जगत ने आशंका जताई है कि यदि पेट्रोल-डीजल के दाम इसी तरह बढ़ते रहे तो आने वाले दिनों में बाजार में महंगाई और तेज हो सकती है।

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