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    हिमाचल में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी, लापरवाही पर होगी कड़ी कार्रवाई

    Updated: Thu, 16 Jul 2026 08:17 AM (GMT+05:30)

    हिमाचल के सरकारी स्कूलों में छात्रों को दिए जाने वाले दोपहर के भोजन की गुणवत्ता पर अब विभाग की कड़ी नजर रहेगी। ...और पढ़ें

    हिमाचल में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी (फाइल फोटो)

    हिमाचल में मिड-डे मील की गुणवत्ता पर सख्त निगरानी (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील की गुणवत्ता की होगी जांच

    2. खराब भोजन, स्वच्छता में कमी पर होगी सख्त कार्रवाई

    3. निरीक्षण दल मेन्यू, रिकॉर्ड और स्वच्छता की करेगा जांच

    नेहा शर्मा, सोलन। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में छात्रों को दिए जाने वाले दोपहर के भोजन की गुणवत्ता से खिलवाड़ अब महंगा पड़ सकता है। भोजन पर अब विभाग की नजर रहेगी।

    इसके लिए स्कूलों का टीम निरीक्षण करेगी। इसके लिए प्रदेशभर में औचक निरीक्षण के लिए टीम का भी गठन किया है। यह टीम अगर कहीं गुणवत्ता में कमी पाई जाती है तो उन स्कूलों के खिलाफ कड़ा रुख अपना सकती है। निरीक्षण के दौरान भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता, निर्धारित मेन्यू, रिकॉर्ड और योजना से जुड़े अन्य मानकों की जांच की जाएगी।

    प्रत्येक निरीक्षण के सात दिन के भीतर विद्यालयवार विस्तृत रिपोर्ट, फोटो, प्रमुख अवलोकन और सुधारात्मक सुझाव कार्यालय में जमा करवाना अनिवार्य होगा। यदि निरीक्षण के दौरान भोजन खराब मिलने, अस्वच्छ व्यवस्था, वित्तीय अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो इसकी सूचना उच्च अधिकारियों को देकर प्रशासनिक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

    मेन्यू के अनुसार ही तैयार किया जाएगा भोजन

    इसे लेकर शिक्षा विभाग ने उप गुणवत्ता निदेशक को निर्देश दिए हैं। निरीक्षण के दौरान अधिकारियों को स्कूल की रसोई और भंडार कक्ष की साफ-सफाई, बर्तनों की स्वच्छता तथा भोजन बनाने वाले कुक-कम-हेल्पर (सीसीएच) की व्यक्तिगत स्वच्छता की जांच करनी होगी। यह भी देखा जाएगा कि स्कूलों में दीवार पर प्रदर्शित निर्धारित मेन्यू के अनुसार ही भोजन तैयार और परोसा जा रहा है या नहीं।

    निरीक्षण दल स्वयं भोजन का स्वाद चखकर उसकी गुणवत्ता भी परखेगा। इसके अलावा मातृ भोजन परख (मदर्स टेस्टिंग) रजिस्टर, एमडीएम स्टाक रजिस्टर, छात्रों की उपस्थिति के अनुसार परोसे भोजन का रिकॉर्ड और आधार नामांकन से संबंधित दस्तावेजों का भी सत्यापन किया जाएगा। जिन विद्यार्थियों का आधार पंजीकरण नहीं हुआ है उनके लिए विद्यालय स्तर पर विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं।

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    मुख्यमंत्री बाल पौष्टिक आहार योजना के तहत सप्ताह के निर्धारित दिन उबले अंडे या ताजे फल वितरित किए जा रहे हैं या नहीं, इसकी भी जांच होगी। कुक-कम-हेल्पर को मानदेय का समय पर भुगतान और योजना की राशि
के सही उपयोग की भी समीक्षा
की जाएगी।

    भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और निर्धारित मेन्यू का किया जाएगा सख्त मूल्यांकन

    सरकारी स्कूलों में पीएम पोषण योजना की नियमित निगरानी की जा रही है। समय-समय पर स्कूलों का निरीक्षण किया जाता है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि विद्यार्थियों को साफ, सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल रहा है। कहीं कमी या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित स्कूल को तुरंत सुधार के निर्देश दिए जाते हैं। - डा राजेंद्र वर्मा, उपनिदेशक स्कूल शिक्षा (गुणवत्ता) जिला सोलन।