केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्डा ने CRI कसौली में स्वदेशी टीडी वैक्सीन की लांच, क्यों खास है इसकी खुराक?
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने कसौली के सीआरआई में स्वदेशी टीडी वैक्सीन लॉन्च की। उन्होंने इसे सार्वजनिक स्वास्थ्य के लिए मील का पत्थर बताया, ...और पढ़ें

सीआरआई कसौली में वैक्सीन लांच करते केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा। जागरण
HighLights
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने स्वदेशी टीडी वैक्सीन लॉन्च की।
कसौली के सीआरआई में निर्मित, स्वास्थ्य आत्मनिर्भरता का प्रतीक।
टेटनस, डिप्थीरिया से सुरक्षा बढ़ाएगी, मृत्यु दर घटाएगी।
संवाद सहयोगी, सोलन। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शनिवार को जिला सोलन के कसौली स्थित केंद्रीय अनुसंधान संस्थान (सीआरआई) में स्वदेशी रूप से निर्मित टेटनस एवं वयस्क डिप्थीरिया (टीडी) वैक्सीन का औपचारिक शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने सीआरआई की वैज्ञानिक टीम के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे देश की सार्वजनिक स्वास्थ्य अवसंरचना के लिए मील का पत्थर बताया।
उन्होंने कहा कि स्वदेशी टीडी वैक्सीन का निर्माण स्वास्थ्य क्षेत्र में आत्मनिर्भरता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि भारत ने 99 प्रतिशत टीकाकरण कवरेज हासिल कर सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में ऐतिहासिक उपलब्धि दर्ज की है।
55 लाख खुराक की सप्लाई होगी
इसके साथ ही सीआरआई इस अप्रैल तक सार्वभौमिक टीकाकरण कार्यक्रम (यूआईपी) के तहत इस वैक्सीन की 55 लाख खुराक की आपूर्ति करेगा।
क्यों खास है यह वैक्सीन
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे टेटनस और डिप्थीरिया जैसी गंभीर बीमारियों के खिलाफ सुरक्षा और मजबूत होगी। यह पहल किशोरों और वयस्कों में प्रतिरक्षा सुदृढ़ करने व टीका रोकथाम योग्य बीमारियों से होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
क्या है टीडी वैक्सीन
टीडी वैक्सीन वैक्सीन अब व्यस्कों व गर्भवती महिलाओं को लगेगी। यह वैक्सीन पहले बच्चों को ही लगती थी, लेकिन अब इस वैक्सीन में डोज की मात्रा ज्यादा की गई है, जो व्यस्कों को लगाई जा सकेगी। सीआरआई कसौली में डीपीटी वैक्सीन दशकों से बनाई जा रही है। लेकिन वह केवल बच्चों को टीकाकरण अभियान में ही दी जा रही थी।
अब व्यस्कों के लिए इस वैक्सीन की मांग को देखते हुए संस्थान ने वर्ष 2017 से इस पर शोध कार्य शुरू किया था। परीक्षणों व शोध के विभिन्न चरणों के बाद अब जाकर यह वैक्सीन तैयार हुई है।
किसी औजार से कटने व गर्भवती महिलाओं को टेटनस का टीका लगाना जरूरी होता है। डिप्थीरिया रोग के लिए डिप्थीरिया वैक्सीन का टीका लगता है। यह संक्रामक रोग है जो दो से 10 वर्ष तक के बच्चों को अधिक होता है। यह रोग प्राय: गले में होता है। इसके बैक्टीरिया टांसिल व श्वास नली को संक्रमित करते हैं। सांस लेने में दिक्कत, गर्दन में सूजन, बुखार, खांसी आदि डिप्थीरिया बीमारी के लक्षण हैं।
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48 देशों को मुफ्त में दे रहे वैक्सीन
उन्होंने कहा कि भारत आज सौ देशों को वैक्सीन मैत्री के तहत विभिन्न जीवनरक्षक वैक्सीन मुहैया करवा रहा है, जिसमें 48 देशों को मुफ्त में वैक्सीन दी जा रही है। यूआईपी के तहत अभी 12 वैक्सीन से रोकी जा सकने वाली बीमारियों से बचाने वाली 11 वैक्सीन देता है, जिसमें सीआरआई का काफ़ी बडा योगदान है। भारत की ग्लोबल पहचान पर ज़ोर देते हुए कहा कि भारत को बड़े पैमाने पर दुनिया की फार्मेसी के तौर पर जाना जाता है और यह दुनिया भर में वैक्सीन बनाने वाले बड़े देशों में से एक है, जिसमें सीआरआई की भी बडी भूमिका है।
निदेशक ने बताई संस्थान की रिपोर्ट
इससे पहले सीआरआई की निदेशक डॉ. डिंपल कसाना ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा व अन्य अतिथियों का स्वागत किया। उन्होंने संस्थान की रिपोर्ट भी सबके समक्ष रखी। साथ ही संस्थान के अब तक किए गए शोध कार्यों का भी विस्तृत उल्लेख किया।