अमरनाथ यात्रा बनी जम्मू के लिए संजीवनी, ज्यूल से भगवती नगर तक रौनक ही रौनक, अर्थव्यवस्था में आई जान
वार्षिक अमरनाथ यात्रा ने जम्मू की अर्थव्यवस्था को संजीवनी दी है, जिससे पर्यटन और स्थानीय कारोबार में रौनक लौटी है। ...और पढ़ें

अमरनाथ यात्रा से जम्मू में लौटी रौनक, कारोबार को मिली नई जान।
जागरण संवाददाता, जम्मू। वार्षिक अमरनाथ यात्रा के आरंभ होने के साथ ही मंदी की मार झेल रहे जम्मू में रौनक आई और गर्मियों के महीनों में मंदी की मार झेलने वाले कारोबार के लिए यात्रा आर्थिक बूस्टर साबित हुई। अभी तक जिस तरह से श्रद्धालुओं की भारी भीड़ रही, उससे धीरे-धीरे जम्मू का पर्यटन उद्योग भी पटरी पर आने लगा है और इससे अन्य कारोबार को भी गति मिल रही है।
जम्मू रेलवे स्टेशन, बस स्टैंड, रघुनाथ बाजार, ज्यूल, भगवती नगर व साथ लगते पुराने शहर के बाजारों में श्रद्धालुओं की गहमागहमी है जिससे स्थानीय स्तर पर खरीदारी को बल मिला है। वार्षिक अमरनाथ जी यात्रा आरंभ होने से शहर के होटलों व लाज में भी बुकिंग ने जोर पकड़ा। इन होटलों व लाज में सभी कमरें एक पखवाड़ा पहले खाली पड़े थे लेकिन अब इनमें 50 प्रतिशत कमरों की बुकिंग चल रही है।
यात्रा के पहले ही पखवाड़े में श्रद्धालुओं का ऐसा उत्साह देखकर शहर के कारोबारी भी उत्साहित है और उनका मानना है कि अगर यात्रा इसी तरह सफलतापूवर्क आगे बढ़ती रही तो कम से कम जुलाई अंत तक स्थानीय कारेाबार को बल मिलेगा। व्यापारियों व होटल व्यवसायियों का मानना है कि यात्रा का सफल आयोजन जम्मू के पर्यटन उद्योग की खोई हुई रौनक लौटाने का काम कर रहा है। ये श्रद्धालु अच्छा संदेश लेकर जाएंगे और फिर यात्रा सम्पन्न होने के बाद भी देश के विभिन्न हिस्सों से पर्यटक व श्रद्धालु बेखौफ होकर जम्मू की ओर रूख करेंगे।
जम्मू से घटती संख्या और हिमलिंग के जल्द पिघलने की सता रही चिंता
तीन जुलाई से आरंभ हुई वार्षिक अमरनाथ यात्रा के पहले 12 दिनों में जिस तरह से रिकार्ड संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शनों को पहुंचे हैं, उससे जम्मू के कारोबारी उत्साहित तो है लेकिन साथ ही उन्हें यह चिंता भी लगातार सता रही है कि जिस तरह से इस बार बाबा बर्फानी पांच दिनों ही अंर्तध्यान हो गए, उससे 28 अगस्त तक यात्रा चला पाना संभव नहीं हो पाएगा।
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इसके साथ ही जम्मू आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार कमी भी चिंता का कारण बनी हुई है। इस बार पहले 12 दिनों में तीन लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने पवित्र गुफा के दर्शन किए लेकिन इनमें से केवल 93,036 श्रद्धालु ही जम्मू से जत्थे के साथ रवाना हुए। जानकाराें का मानना है कि करीब 50 हजार श्रद्धालु ऐसे भी होंगे जो जम्मू पहुंचे होंगे और यहां तत्काल पंजीकरण करवाकर आगे बढ़े होंगे। ऐसे में जम्मू से जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या 50 प्रतिशत से भी कम है जो चिंता का विषय है।
अमरनाथ जी की यात्रा से कारोबार को बूस्टर डोल अवश्य मिली है लेकिन जितनी मिल सकती थी या मिल सकती है, उतनी नहीं मिल पा रही क्योंकि प्रशासन की ओर से इस तरफ उचित ध्यान नहीं दिया जा रहा। हम देख रहे हैं कि हर साल जम्मू से जाने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में कमी हो रही है। श्रद्धालु सीधे कश्मीर पहुंचते हैं और वहीं ठहरते हैं। कश्मीर भी हमारा हिस्सा है लेकिन जम्मू के कारोबार व अर्थव्यवस्था के बारे में भी सोचना होगा। प्रशासन को यात्रा को जम्मू शहर के साथ कनेक्ट करना चाहिए ताकि श्रद्धालु पुराने शहर की तरफ आए। इससे स्थानीय खरीदारी को प्रोत्साहन मिलेगा। -अमित गोयल, महासचिव रघुनाथ बाजार बिजनेसमैन एसोसिएशन
अमरनाथ जी की यात्रा से होटल व्यवसाय को अब तक काफी लाभ पहुंचा है। हमारे यहां तो होटल खाली पड़े थे लेकिन यात्रा शुरू होने के साथ ही बुकिंग हुई जो अभी तक अच्छी चल रही है लेकिन जिस तरह से हिमलिंग इतना जल्द पिघल गए और इसका असर धीरे-धीरे अब श्रद्धालुओं की संख्या पर भी पड़ रहा है, उससे यात्रा कितने और दिन चलेगी, कुछ कहा नहीं जा सकता। प्रशासन यात्रा का हर प्रबंध अच्छा करता है लेकिन हिमलिंग को सुरक्षित रखने की दिशा में उचित कदम नहीं उठाता जो चिंता का विषय है। इस ओर ध्यान दिया जाना चाहिए। -पवन गुप्ता, प्रधान आल जम्मू होटल एंड लाज एसोसिएशन
हर साल हम बेसब्री से वार्षिक अमरनाथ यात्रा शुरू होने का इंतजार करते हैं क्योंकि इससे हमारा कारोबार बढ़ जाता है। अभी तक की यात्रा में इस बार भी अच्छा कारोबार चल रहा है। श्रद्धालुओं की भारी भीड़ से हर किसी को रोजगार मिला है। टैक्सी चालक से लेकर आटो चालक तक, सब यात्रा शुरू होने व अब तक उमड़ी भीड़ से उत्साहित है और यहीं प्रार्थना कर रहे हैं कि बाबा बर्फानी के भक्त इसी उत्साह के साथ आने वाले दिनों में भी जम्मू पहुंचते रहे। -अमित बाम्बा, टैक्सी आपरेटर यूनियन रेलवे स्टेशन जम्मू