'राही हॉप' से ऑक्ट्राय पोस्ट पहुंचे अमरनाथ यात्रियों ने किए भारत-पाक सीमा के दीदार, बोले- 'यहां आकर गर्व महसूस हुआ'
जम्मू जिला प्रशासन की 'राही हॉप' बस सेवा से अमरनाथ यात्रियों ने सुचेतगढ़ ऑक्ट्राय पोस्ट पर भारत-पाक सीमा का दीदार किया। ...और पढ़ें

अमरनाथ श्रद्धालुओं ने सुचेतगढ़ सीमा पर जवानों के साथ बिताए यादगार पल।
HighLights
'राही हॉप' बस सेवा से अमरनाथ यात्री सुचेतगढ़ सीमा पहुंचे।
स्थानीय प्रशासन और निवासियों ने यात्रियों का भव्य स्वागत किया।
यात्रियों ने भारत-पाक सीमा दर्शन को गर्वपूर्ण, अविस्मरणीय अनुभव बताया।
दलजीत सिंह, आरएसपुरा। पवित्र अमरनाथ यात्रा के दौरान जम्मू जिला प्रशासन की 'राही हॉप' निश्शुल्क बस सेवा श्रद्धालुओं के लिए खास अनुभव बन रही है। मंगलवार को इस सेवा के तहत अमरनाथ यात्रियों का एक दल भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा स्थित सुचेतगढ़ ऑक्ट्राय पोस्ट पहुंचा।
जिला प्रशासन की इस पहल का मुख्य उद्देश्य अमरनाथ यात्रा पर आए श्रद्धालुओं को जम्मू की डोगरा संस्कृति, ऐतिहासिक धरोहरों और प्रमुख पर्यटन स्थलों से परिचित कराना है।
सीमा पर पहुंचने पर स्थानीय प्रशासन और क्षेत्रवासियों ने ढोल-नगाड़ों के साथ यात्रियों का भव्य स्वागत किया। एसडीएम आरएसपुरा अनुराधा ठाकुर, तहसीलदार सुचेतगढ़ राहुल शर्मा, पूर्व सरपंच अर्जुन सिंह और लंबरदार सरवन चौधरी सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने फूलमालाएं पहनाकर श्रद्धालुओं का गर्मजोशी से स्वागत किया।
स्वागत से अभिभूत श्रद्धालुओं ने स्थानीय लोगों की मेहमाननवाजी की खुलकर सराहना की। पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा देखने पहुंचे अधिकांश श्रद्धालुओं ने इसे अपने जीवन का अविस्मरणीय अनुभव बताया।

जवानों ने दी सीमा सुरक्षा की जानकारी
सीमा पर तैनात सुरक्षा बल के जवानों ने यात्रियों को भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा की सुरक्षा व्यवस्था, सीमा पर अपनाई जाने वाली सतर्कता तथा ऑक्ट्राय पोस्ट के ऐतिहासिक महत्व की विस्तृत जानकारी दी।
जवानों ने बताया कि विभाजन से पहले यह स्थान व्यापारिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था और आज यह देश की सुरक्षा और गौरव का महत्वपूर्ण प्रतीक है। यात्रियों ने जवानों के साथ बातचीत की, तस्वीरें खिंचवाईं और सीमा से जुड़ी कई जानकारियां प्राप्त कीं।
बेहतर सुविधाएं सुनिश्चित कर रहे हैं: एसडीएम
एसडीएम आरएसपुरा अनुराधा ठाकुर ने बताया कि 'राही हॉप' बस सेवा के माध्यम से अमरनाथ यात्रियों को जम्मू के प्रमुख पर्यटन, धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण कराया जा रहा है।
उन्होंने कहा, 'बाबा बर्फानी के दर्शन के साथ श्रद्धालु जम्मू की समृद्ध डोगरा संस्कृति, विरासत और सीमा क्षेत्र से भी परिचित हो सकें, इसी उद्देश्य से यह पहल की गई है। प्रशासन यह सुनिश्चित कर रहा है कि यात्रियों को हर स्थान पर बेहतर सुविधाएं मिलें और उनका जम्मू प्रवास यादगार बने।'
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सीमा भ्रमण के दौरान श्रद्धालुओं ने भारत माता के जयघोष लगाए और सीमा पर तैनात जवानों का उत्साहवर्धन किया। यात्रियों ने कहा कि बाबा बर्फानी के दर्शन के साथ भारत-पाक अंतरराष्ट्रीय सीमा का भ्रमण, डोगरा संस्कृति की झलक और स्थानीय लोगों का आत्मीय स्वागत उनकी यात्रा को और भी यादगार बना देगा।
क्या बोले श्रद्धालु?
'गर्व का क्षण': सोमनाथ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालु सोमनाथ ने बताया कि वह पहली बार अमरनाथ यात्रा पर आए हैं। उन्होंने कहा, 'जम्मू जिला प्रशासन की इस पहल के कारण हमें भारत-पाक सीमा देखने का अवसर मिला। अब तक सीमा के बारे में केवल समाचारों में पढ़ा और टीवी पर देखा था। आज यहां आकर वास्तविक सीमा को देखना गर्व का क्षण है। यहां का शांत माहौल और सीमा पर तैनात जवानों का समर्पण देखकर मन में देशभक्ति की भावना और प्रबल हुई। स्थानीय लोगों ने जिस आत्मीयता से हमारा स्वागत किया, वह हमेशा याद रहेगा।'

'सौभाग्य से कम नहीं': विश्वनाथ, उत्तर प्रदेश
उत्तर प्रदेश से आए श्रद्धालु विश्वनाथ ने कहा, 'अमरनाथ यात्रा के दौरान इस तरह का अनुभव मिलना हमारे लिए किसी सौभाग्य से कम नहीं है। जम्मू प्रशासन की यह पहल बेहद सराहनीय है। सीमा पर आकर यहां के इतिहास और सुरक्षा व्यवस्था के बारे में जानने का अवसर मिला। हमने हमेशा इस सीमा के बारे में सुना था, लेकिन आज इसे अपनी आंखों से देखकर बहुत अच्छा लगा। यहां लोगों ने जिस प्रेम और सम्मान के साथ हमारा स्वागत किया, उससे हम बेहद अभिभूत हैं।'
'अपनापन महसूस हुआ': माया, गुजरात
गुजरात से आई श्रद्धालु माया ने कहा, 'हमने कभी नहीं सोचा था कि अमरनाथ यात्रा के दौरान भारत-पाक सीमा देखने का भी अवसर मिलेगा। जिला प्रशासन की यह पहल बहुत अच्छी है। ढोल-नगाड़ों के साथ हुआ स्वागत और सीमा के इतिहास की जानकारी हमारे लिए हमेशा यादगार रहेगी। यहां आकर जम्मू के लोगों का अपनापन महसूस हुआ।'
'जवानों के प्रति सम्मान बढ़ा': नीता वारा, मुंबई
मुंबई से आई श्रद्धालु नीता वारा ने कहा, 'पहली बार अंतरराष्ट्रीय सीमा देखने का अवसर मिला। यहां पहुंचकर देश के जवानों के प्रति सम्मान और बढ़ गया। सीमा पर खड़े होकर अलग ही गर्व की अनुभूति हुई। स्थानीय लोगों ने जिस स्नेह और आत्मीयता से हमारा स्वागत किया, उससे हम बहुत प्रभावित हुए। जम्मू प्रशासन की यह पहल वास्तव में प्रशंसनीय है।'