जीएमसी जम्मू के डॉक्टरों की बड़ी जीत! प्रिंसिपल गर्मी-सर्दी की छुट्टी में नहीं रोक सकते प्रोफेसरों का वेतन
कैट जम्मू बेंच ने जीएमसी जम्मू के फैकल्टी सदस्यों के हक में फैसला सुनाया है कि गर्मी और सर्दी की संस्थागत छुट्टियों के दौरान उनका वेतन नहीं रोका जा सक ...और पढ़ें

जीएमसी जम्मू फैकल्टी को बड़ी राहत संस्थागत छुट्टियों में नहीं रुकेगा वेतन कैट का ऐतिहासिक फैसला।
HighLights
कैट ने जीएमसी फैकल्टी के वेतन रोकने का आदेश रद्द किया।
संस्थागत छुट्टियां अकादमिक कैलेंडर का हिस्सा, व्यक्तिगत छुट्टी नहीं।
2012 का सरकारी आदेश सवेतन अवकाश के लिए आज भी प्रभावी।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू के मेडिकल शिक्षा जगत से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) की जम्मू बेंच ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज (GMC) जम्मू में एकेडमिक अरेंजमेंट पर काम कर रहे फैकल्टी सदस्यों के हक में ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने साफ कर दिया है कि गर्मी और सर्दी की संस्थागत छुट्टियों के दौरान इन डॉक्टरों का वेतन नहीं रोका जा सकता।
कैट के प्रशासनिक सदस्य राम मोहन जोहरी की बेंच ने यह फैसला 22 फैकल्टी सदस्यों की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने न सिर्फ वेतन रोकने के आदेश को रद्द किया, बल्कि सरकार को 12 हफ्ते के अंदर रुका हुआ वेतन जारी करने का सख्त निर्देश भी दिया है।
दरअसल, GMC जम्मू प्रशासन ने 18 जून 2025 को एक आदेश जारी किया था। इस आदेश में कहा गया था कि जम्मू-कश्मीर मेडिकल एवं डेंटल एजुकेशन नियम 2020 के तहत एकेडमिक अरेंजमेंट पर नियुक्त फैकल्टी को ग्रीष्मकालीन अवकाश (Summer Vacation) लेने की अनुमति तो होगी, लेकिन इस अवधि का उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाएगा।
इसी आदेश को 22 फैकल्टी सदस्यों ने कैट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि वे साल भर कॉलेज की सेवा में रहते हैं और गर्मी-सर्दी की छुट्टियां कॉलेज के एकेडमिक कैलेंडर का हिस्सा हैं, कोई व्यक्तिगत छुट्टी नहीं। ऐसे में वेतन रोकना पूरी तरह से अन्यायपूर्ण है।
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ट्रिब्यूनल ने कहा- आदेश मनमाना है
याचिका पर सुनवाई के बाद ट्रिब्यूनल ने अपने फैसले में GMC प्रशासन के आदेश को 'मनमाना और कानूनी अधिकार से परे' करार दिया।
कैट ने अपने फैसले में तीन बेहद महत्वपूर्ण बातें कही:
- संस्थागत छुट्टी, व्यक्तिगत छुट्टी नहीं: ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट किया कि ग्रीष्म एवं शीतकालीन अवकाश शैक्षणिक कैलेंडर का हिस्सा होते हैं। ये छुट्टियां संस्थान द्वारा घोषित की जाती हैं, इसलिए इन्हें सामान्य अवकाश या बिना काम की छुट्टी नहीं माना जा सकता।
- नियुक्ति बरकरार तो वेतन भी बरकरार: फैसले में कहा गया कि छुट्टी की अवधि के दौरान भी फैकल्टी सदस्य पद पर बने रहते हैं, उनकी नियुक्ति समाप्त नहीं होती। ऐसे में उन्हें वेतन से वंचित करना कानूनन गलत है।
- प्रिंसिपल को नीति बदलने का हक नहीं: कैट ने सबसे कड़ी टिप्पणी GMC जम्मू के प्रिंसिपल एवं डीन पर की। ट्रिब्यूनल ने कहा कि किसी प्रशासनिक आदेश के जरिए सरकार की नीति को बदलने का अधिकार प्रिंसिपल के पास नहीं है।
2012 का सरकारी आदेश आज भी है प्रभावी
इस पूरे मामले में 2012 का एक सरकारी आदेश गेम-चेंजर साबित हुआ। कैट ने अपने फैसले में सरकारी आदेश संख्या 423-HME of 2012 का हवाला दिया।
इस आदेश के तहत एकेडमिक अरेंजमेंट पर काम करने वाले फैकल्टी सदस्यों को ग्रीष्म एवं शीतकालीन अवकाश के दौरान सवेतन अवकाश (Paid Leave) का लाभ मिलता है। ट्रिब्यूनल ने कहा कि इस आदेश को आज तक न तो वापस लिया गया है और न ही इसे वर्ष 2020 के नए मेडिकल एजुकेशन नियमों ने निरस्त (Repeal) किया है। इसलिए 2012 का आदेश आज भी पूरी तरह से प्रभावी है और लागू रहेगा।
कैट के इस फैसले का असर सिर्फ इन 22 याचिकाकर्ताओं तक सीमित नहीं रहेगा। यह फैसला GMC जम्मू ही नहीं, बल्कि जम्मू-कश्मीर के अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी एकेडमिक अरेंजमेंट पर काम कर रहे सैकड़ों डॉक्टरों के लिए एक नजीर बनेगा।
अब कॉलेज प्रशासन गर्मी और सर्दी की छुट्टियों के नाम पर फैकल्टी का वेतन नहीं काट सकेगा। इससे मेडिकल शिक्षा में अस्थायी तौर पर सेवाएं दे रहे योग्य डॉक्टरों को बड़ी राहत और आर्थिक सुरक्षा मिलेगी।