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    आखिर कब लौटेंगे कश्मीरी हिंदू? 36 साल से कर रहे इंतजार, अब होमलैंड की मांग को लेकर तेज होगा आंदोलन

    Updated: Sat, 08 Aug 2026 01:10 PM (IST)

    कश्मीरी हिंदू सितंबर से होमलैंड और विस्थापितों की समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन तेज करेंगे। वे 5 सितंबर को भूख हड़ताल और 14 सितंबर को होमलैंड के लि ...और पढ़ें

    कश्मीर हिंदू होमलैंड की मांग को लेकर तेज करेंगे आंदोलन। (फाइल फोटो)

    कश्मीर हिंदू होमलैंड की मांग को लेकर तेज करेंगे आंदोलन। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. सितंबर से कश्मीरी हिंदू आंदोलन को देंगे गति।

    2. 5 सितंबर को विस्थापितों की समस्याओं पर भूख हड़ताल।

    3. 14 सितंबर को होमलैंड के लिए कार्यक्रम और धरने।

    जागरण संवाददाता, जम्मू : कश्मीरी हिंदुओं की दिक्कतों हल निकलवाने और होमलैंड की मांग को बुलंद करने के लिए पनुन कश्मीर सितंबर माह से अपने आंदोलन को और गति देगा। इसके लिए समय समय पर बैठकें चल रही हैं। कश्मीरी हिंदुओं का कहना है कि 36 वर्ष बीतने के बाद भी विस्थापितों की वापसी नहीं हो पाई है। इसलिए, सितंबर माह से कश्मीर हिंदू फिर से अपने आंदोलन को तेज करेंगे।

    इसकी शुरुआत 5 सितंबर को होगी, जब कश्मीरी हिंदू विस्थापित लोगों की दिक्कतों को लेकर एक दिन की भूख हड़ताल रखेंगे। इस समय विस्थापित लोग दयनीय स्थिति में हैं। सरकार न ही उनकी मासिक नकद राहत बढ़ा रही है और न ही उनकी बस्तियों की हालत बेहतर कर रही है।

    दूसरी ओर 14 सितंबर का दिन होमलैंड के नाम पर होगा। इस दिन कश्मीरी हिंदू जगह-जगह कार्यक्रम कर होमलैंड के सपने को साकार करने की शपथ लेंगे। तो वहीं दूसरी ओर अपनी मांगों को लेकर धरने प्रदर्शन भी करेंगे।

    15 हजार नौकरियों का पैकेज कब मिलेगा?

    कश्मीरी हिंदुओं का कहना है कि नदी के उत्तर-पूर्व क्षेत्र को कश्मीरी हिंदुओं के होमलैंड के लिए सुरक्षित किया जाए। कश्मीर के वरिष्ठ सदस्यों का कहना है कि पिछले साढ़े तीन दशक से कश्मीरी हिंदू विस्थापित कालोनियों में दर बदर हो रहे हैं। उनके बच्चे कठिन हालात से गुजर कर पढ़ लिख गए हैं मगर कोई पैकेज नहीं।

    2010 में केंद्र सरकार ने छह हजार नौकरियों का पैकेज दिया था, मगर उसके बाद सुध ही नहीं ली। 15000 नौकरियों का एक और पैकेज दिए जाने की जरूरत है। 1990 में कश्मीर में आतंकवाद के कारण हालात खराब होने से कश्मीरी हिंदुओं का घाटी से विस्थापित होना था। मगर लंबा समय गुजरने के बाद भी इनका पुनर्वास नहीं हो पाया है।

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    घाटी में वापसी का कोई रोडमैप सरकार के पास नहीं

    टीटू गंजू का कहना है कि अभी भी घाटी वापसी का कोई रोडमैप सरकार के पास नहीं है। घाटी वापसी का सीधा सा रास्ता है कि कश्मीरी हिंदुओं को उनका होमलैंड दिया जाए जहां ये कश्मीरी हिंदू एक साथ बस सकें। यहीं एक रास्ता है कश्मीरी हिंदुओं की घाटी वापसी का। सरकार को इस पर काम करना चाहिए।

    होमलैंड क्षेत्र पूरी तरह से केंद्र सरकार के अधीन रहे, चाहे कल जम्मू-कश्मीर फिर से राज्य बन जाए, मगर होमलैंड केंद्र शासित प्रदेश ही रहे।

    बेकार जा रहे कश्मीरी हिंदुओं के वोट

     

    एमके धर का कहना है कि जब कश्मीरी हिंदुओं का होमलैंड होगा तो वे अपने हिसाब से अपना प्रतिनिधि भी विधानसभा, लोकसभा के लिए चुन सकेंगे जोकि कश्मीरी हिंदुओं की आवाज को विधानसभा व लोकसभा में बुलंद करें। आज कश्मीर हिंदू अपने घरों से दूर जम्मू में हैं मगर वे जम्मू से ही वोट कश्मीर के लिए करते हैं। मगर उनके वोट बेकार चले जाते हैं।

    कश्मीरी आधारित जीतने वाले नेता कभी भी कश्मीरी हिंदुओं की आवाज को बुलंद नहीं करते। इसलिए कश्मीरी हिंदुओं को राजनीतिक में प्रतिनिधित्व होमलैंड से ही मिलेगा।