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    Harishayani Ekadashi  2026: जम्मू में कब रखा जाएगा हरिशयनी एकादशी का व्रत? जानें सही मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

    By Ashok Sharma Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Thu, 23 Jul 2026 07:00 AM (GMT+05:30)

    हरिशयनी एकादशी का व्रत 25 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा, जब भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन करेंगे और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करेंगे। ...और पढ़ें

    25 जुलाई को रखा जाएगा हरिशयनी एकादशी का व्रत।

    25 जुलाई को रखा जाएगा हरिशयनी एकादशी का व्रत

    HighLights

    1. हरिशयनी एकादशी व्रत 25 जुलाई 2026 को मनाया जाएगा।

    2. भगवान विष्णु चार माह के लिए शयन करेंगे, शिव करेंगे सृष्टि संचालन।

    3. व्रत से पाप नष्ट होते हैं, मिलती है दीर्घायु और मोक्ष।

    जागरण संवाददाता, जम्मू : अगर आप भी कन्फ्यूजन में हैं कि हरिशयनी एकादशी का व्रत कब रखा जाएगा तो यह खबर आपके लिए हैमहंत रोहित शास्त्री ज्योतिषाचार्य के अनुसार, हरिशयनी एकादशी का व्रत इस साल 2026 में 25 जुलाई को मनाया जाएगा। हरिशयनी एकादशी, जो आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी है, भगवान विष्णु के चार माह के विश्राम का प्रतीक है। इस दिन भगवान विष्णु शयन करते हैं, और सृष्टि का संचालन भगवान शिव करते हैं।

     इस व्रत को हरिशयनी, देवशयनी और शयनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। हरिशयनी एकादशी का व्रत सभी व्रतों में सर्वोत्तम माना जाता है। इस व्रत से सभी पाप नष्ट होते हैं और इसे करने वाले को दीर्घायु और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह व्रत पुरुष और महिलाओं दोनों द्वारा किया जा सकता है। एकादशी तिथि 24 जुलाई को सुबह 09:12 बजे से शुरू होगी और 25 जुलाई को सुबह 11:35 बजे समाप्त होगी। इस दिन दान करने से सभी पापों का नाश होता है। ब्राह्मणों और जरूरतमंदों को यथाशक्ति दान देना चाहिए।

    इस मंत्र का करें जाप

    एकादशी के दिन ऊं नमो वासुदेवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। यह व्रत मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। व्रत की विधि में शारीरिक और मानसिक शुद्धता का ध्यान रखना आवश्यक है। दशमी तिथि से व्रत के नियमों का पालन शुरू होता है। व्रत के दिन भगवान लक्ष्मीनारायण की पूजा करनी चाहिए। एकादशी के दिन तामसिक वस्तुओं का सेवन नहीं करना चाहिए और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। व्रत के दौरान दाढ़ी-मूंछ और बाल नहीं काटने चाहिए। इस प्रकार, हरिशयनी एकादशी का व्रत धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व रखता है।