अनुच्छेद 370 हटने के बाद कितना बदला जम्मू-कश्मीर? LG मनोज सिन्हा ने सभी सवालों के दिए जवाब
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की आकांक्षाएं देश की मुख्यधारा से जुड़ गई हैं, और पहाड़ी समुदाय का सशक्तिकरण एक ...और पढ़ें
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अनुच्छेद 370 हटने के बाद कितना बदला जम्मू-कश्मीर?
HighLights
अनुच्छेद 370 हटने से जम्मू-कश्मीर की आकांक्षाएं मुख्यधारा से जुड़ीं।
पहाड़ी समुदाय का सशक्तिकरण भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में मील का पत्थर।
डॉ. ए.एच. शाह की पुस्तक 'शारदा टू संसद' का विमोचन किया।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में अनुच्छेद 370 हटने के बाद जम्मू-कश्मीर की आकांक्षाएं देश की मुख्यधारा से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि पहाड़ी समुदाय और अन्य वंचित वर्गों का सशक्तिकरण भारत के लोकतांत्रिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ है और आने वाली पीढ़ियां इस परिवर्तन को याद रखेंगी।
उन्होंने भारत की ज्ञान परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि नालंदा, तक्षशिला और विक्रमशिला जैसे शिक्षा केंद्रों ने विश्व को दिशा दी। भवन नष्ट हो सकते हैं, लेकिन भारतीय सभ्यता में ज्ञान की परंपरा अमर रहती है। उपराज्यपाल ने रविवार को डा. एएच शाह की पुस्तक शारदा टू संसद का विमोचन किया।
इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह पुस्तक केवल इतिहास का विवरण नहीं, बल्कि विरासत, ज्ञान और आधुनिक लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के बीच एक सार्थक संवाद है। उपराज्यपाल ने कहा कि इतिहास, सभ्यता और संस्कृति से संबंधित पुस्तकें पीढ़ियों के बीच सेतु का कार्य करती हैं।
साहित्य और शोध मानव चेतना को प्रकाशित करते हैं
उन्होंने कहा कि डा. शाह ने इस पुस्तक के माध्यम से यह संदेश दिया है कि इतिहास और संस्कृति कभी समाप्त नहीं होते, बल्कि वे समाज की चेतना में सदैव जीवित रहते हैं। उन्होंने कहा कि साहित्य और शोध मानव चेतना को प्रकाशित करते हैं तथा विभिन्न युगों को जोड़ने का कार्य करते हैं।
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शारदा पीठ और भारतीय संसद का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि शारदा ने समाज के ज्ञान का पोषण किया, तो संसद ने राष्ट्र की आकांक्षाओं को पूरा करने का कार्य किया। उपराज्यपाल ने पहाड़ी समुदाय द्वारा अपनी भाषा, लोक साहित्य, लोक संगीत और सांस्कृतिक परंपराओं के संरक्षण की सराहना करते हुए कहा कि उनकी मौखिक परंपराएं साहस, सामाजिक सद्भाव और मानवीय मूल्यों की सशक्त अभिव्यक्ति हैं।
देश की सांस्कृतिक धरोहर और समृद्ध होगी
उन्होंने कहा कि शारदा से संसद की यात्रा केवल एक समुदाय की नहीं, बल्कि भारत की उस सभ्यता की यात्रा है जिसने अपनी प्राचीन ज्ञान परंपरा को लोकतांत्रिक संस्थाओं तक पहुंचाया।
उन्होंने विद्वानों, शिक्षकों, कलाकारों और नागरिकों से भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान देने का आह्वान करते हुए कहा कि आज भी अनेक गांवों की कहानियां, बोलियों का व्याकरण और लोकगीत दस्तावेजीकरण की प्रतीक्षा कर रहे हैं। इन प्रयासों से देश की सांस्कृतिक धरोहर और समृद्ध होगी।
राहत दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था
कार्यक्रम के दौरान जम्मू-कश्मीर पहाड़ी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष द्वारा उठाए गए मुद्दों पर उपराज्यपाल ने कहा कि कानून लागू होने के बावजूद कुछ तत्व जानबूझकर लोगों को परेशान कर रहे हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि लोगों को राहत दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था बनाई जाएगी।
इस अवसर पर जम्मू-कश्मीर पहाड़ी वेलफेयर सोसायटी के अध्यक्ष जफर इकबाल मनहास, पुस्तक के लेखक डा. एएच शाह, खुश देव मैनी, डॉ. जहांगीर दानिश, उड़ी के विधायक डा. सज्जाद शफी, पूर्व डीडीसी अध्यक्ष सफीना बेग सहित कई साहित्यकार, पहाड़ी संगठनों के प्रतिनिधि और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे।