जम्मू-कश्मीर की यूनिवर्सिटी में पीजी सीटों पर दाखिला चुनौती, CUET-PG के बाद हो रहे अपने एंट्रेंस टेस्ट; पढ़िए डिटेल
जम्मू-कश्मीर के विश्वविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट सीटों को भरना एक चुनौती बन गया है। CUET-PG के बावजूद, जम्मू, कश्मीर और क्लस्टर विश्वविद्यालय अपने स ...और पढ़ें

जम्मू यूनिवर्सिटी सहित कश्मीर विवि व क्लस्टर विवि ने जारी की अधिसूचना।
HighLights
विश्वविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट सीटें भरना बड़ी चुनौती।
CUET-PG के अलावा अपने एंट्रेंस टेस्ट आयोजित कर रहे।
छात्र बेहतर सुविधाओं के लिए अन्य राज्यों का रुख कर रहे।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। केंद्र शासित प्रदेश जम्मू कश्मीर के विश्वविद्यालयों में पोस्ट ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए सीयूईटी-पीजी के आधार पर सीटें भरना चुनौती बना गया है। विश्वविद्यालयों को अब अपने एंट्रेंस टेस्ट भी लेने पड़ रहे है ताकि सीटों को भरा जा सकें।
इस बार भी जम्मू विश्वविद्यालय, कश्मीर और क्लस्टर विश्वविद्यालय सीयूईटी-पीजी के आधार पर प्रवेश देने के अलावा अपने-अपने टेस्ट भी आयोजित करेंगे। पिछले पांच-छह वर्ष से बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के अन्य राज्यों की तरफ रुख करने के कारण सीटें खाली रह रही है।
प्रदेश में दो केंद्रीय विवि ही सीयूईटी-पीजी के आधार पर सीटें भरते हैं। अन्य चार विश्वविद्यालयों के पास अपना टेस्ट लेने के सिवाए कोई चारा नहीं बचा है। चूंकि सीयूईटी-पीजी हो चुके हैं तो अब जम्मू विवि, कश्मीर विवि, क्लस्टर विवि जम्मू व क्लस्टर विवि श्रीनगर ने अपने अपने टेस्ट के लिए अधिसूचना जारी कर दी हैं। अब ये चारों विश्वविद्यालय अपने अपने एंट्रेंस टेस्ट लेंगे।
समय पर खोले जा रहे नए कोर्स
पिछले साल तो हालत यह हो गई थी कि अपने टेस्ट लेने के बावजूद सीटें भरी नहीं गई थी तो बाद में ग्रेजुएशन के मेरिट को मापदंड बनाकर दाखिले किए गए थे। इनके बावजूद भी दाखिले के लिए अंत तक काउंसलिंग की गई ताकि सीटों को भरा जाए। हालांकि इस कारण अब विद्यार्थियों को सीयूईटी-पीजी के अलावा विश्वविद्यालय के टेस्ट भी देने पड़ रहे हैं लेकिन विद्यार्थियों को एक विकल्प मिल रहा है जिससे उनका जोखिम कम हो रहा है।
खबरें और भी
समय-समय पर विश्वविद्यालय नए कोर्स खोल रही है। ढांचागत सुविधाओं में बढ़ोतरी की जा रही है। इसका मकसद यह है कि पढ़ाई के लिए बेहतर ढांचा विकसित करके विद्यार्थियों को जम्मू कश्मीर में ही रोका जाए। इसके लिए समय समय पर अब जागरूकता अभियान भी शुरु किए जा रहे हैं।
सरकार की तरफ से समय समय पर बैठकें कर सीटों के खाली रहने की समीक्षा भी की जा रही है। जम्मू कश्मीर के डिग्री कालेजों में अंडर ग्रेजुएट कोर्स में दाखिले के लिए भी स्थिति कुछ अलग नहीं है। कालेजों में पिछले साल तीस प्रतिशत से अधिक सीटें खाली रह गई थी।
एंट्रेस टेस्ट की अधिसूचना जारी
जम्मू विश्वविद्यालय ने चालीस से अधिक पीजी कोर्स में दाखिले के लिए एंट्रेस टेस्ट की अधिसूचना जारी कर दी है। हालांकि विश्वविद्यालय ने यह स्पष्ट किया है कि पहली प्राथमिकता सीयूईटी-पीजी ही होगा लेकिन विश्वविद्यालय अपना एंट्रेस टेस्ट भी आयोजित करेगा।
दाखिले का पैमाना यह होगा कि दो साल के पीजी कोर्स में दाखिले के लिए सत्तर प्रतिशत अकादमिक मेरिट व तीस प्रतिशत जम्मू विवि एंट्रेंस टेस्ट के अंक होगा दोनों का मूल्यांकन करके मेरिट तैयार होगा। जम्मू विवि के एंट्रेंस टेस्ट के कुल आठ केंद्र बनाए जाएंगे जिसमें जम्मू, कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़, भद्रवाह, राजौरी, पुंछ और श्रीनगर शामिल हैं। आन लाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरु हो गई है। उम्मीदवार दो अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं।
19 अप्रैल को टेस्ट की तिथि प्रस्तावित
विवि ने 19 अप्रैल रविवार को टेस्ट की तिथि प्रस्तावित की है। उत्तर कुंजी बीस अप्रैल को जारी होगी। टेस्ट के कुछ दिनों के बाद परिणाम घोषित किया जाएगा। जम्मू विश्वविद्यालय के मुख्य कैंपस के अलावा सात कैंपस भी हैं जिनमें भद्रवाह, किश्तवाड़, पुंछ, रामनगर, रियासी, कठुआ, उधमपुर शामिल हैं।
क्लस्टर विश्वविद्यालय जम्मू भी अपने पीजी व पांच साल के एकीकृत कोर्स में दाखिले के लिए अपना एंट्रेस टेस्ट आयोजित करेगा। इसके लिए भी आनलाइन आवेदन की प्रक्रिया शुरु कर दी गई है। उम्मीदवार दो अप्रैल तक आवेदन कर सकते हैं। टेस्ट मई में होगा। विश्वविद्यालय के पीजी कोर्स में एमकाम, एमए एजुकेशन, एमएड, एमए इंग्लिश, एमए हिस्ट्री सहित 17 पीजी कोर्स है। इसके अलावा आठ एकीकृत कोर्स शामिल हैं।
बाहरी राज्यों की तरफ रुख करने के कारण
- पंजाब, दिल्ली, दक्षिण भारत के कुछ राज्यों में विद्यार्थियों का रुख अधिक हो रहा है। ढांचागत सुविधाओं के कारण वे जा रहे हैं।
- बाहरी राज्यों में विश्वविद्यालयों में प्लेसमेंट के सैल काफी मजबूत है यहां पर रोजगार के अवसर मिलने की संभावनाएं अधिक हैं।
- बाहरी राज्यों में विश्वविद्यालयों की रैंकिंग के बेहतर होने के कारण भी विद्यार्थी जा रहे हैं।
- प्राइवेट क्षेत्र में रोजगार के अवसर अधिक होने के कारण कई बाहर ही पढ़ने को तरजीह दे रहे हैं।
- जम्मू कश्मीर में ऐसे विद्यार्थियों की संख्या भी बढ़ रही है जो बाहर पढ़कर वहां पर ही एडजस्ट होना चाहते हैं।
- जम्मू कश्मीर में प्राइवेट क्षेत्र में विश्वविद्यालयों के न होने के कारण भी बाहर जा रहे है विद्यार्थी।