अब जम्मू में भी बनेंगे चैंपियन, 7 साल इंतजार के बाद MA स्टेडियम में तैराकों को मिला ओलंपियन साइज ऑल वेदर पूल
सात साल के लंबे इंतजार के बाद जम्मू के मौलाना आजाद स्टेडियम में 50 मीटर का ओलंपियन साइज ऑल-वेदर इंडोर स्वीमिंग पूल तैराकों के लिए खोल दिया गया है। ...और पढ़ें

जम्मू के एमए स्टेडियम में 7 साल बाद खुला ओलंपियन साइज ऑल-वेदर स्वीमिंग पूल।
HighLights
सात साल बाद एमए स्टेडियम में ऑल-वेदर पूल खुला।
50 मीटर ओलंपियन साइज पूल, जूनियर तैराकों को प्रशिक्षण।
राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं की मेजबानी, खेल परिषद का राजस्व बढ़ेगा।
जागरण संवाददाता, जम्मू। सात वर्षों के लंबे इंतजार के बाद तैराकों को मौलाना आजाद स्टेडियम का 50 मीटर लंबा ओलिंपियन साइज आल वेदर इंडोर स्वीमिंग पूल समर्पित कर दिया गया है। पहले चरण में फिलहाल जूनियर वर्ग के तैराकों को प्रशिक्षण का मौका मिलेगा।
कुछ दिन बाद सभी आयुवर्गों के लिए पूल खोल दिया जाएगा। इससे पहले 18 और 19 जुलाई को जम्मू-कश्मीर की 42वीं सब जूनियर नेशनल और 52वीं जूनियर नेशनल स्वीमिंग प्रतियोगिता में भाग लेने वाली टीम के चयन के लिए ट्रायल हुए। जम्मू-कश्मीर स्वीमिंग एसोसिएशन की ओर से आयोजित ट्रायल में काफी संख्या में खिलाड़ियों ने भाग लेकर खुशी जताई। वहीं, अभिभावकों का कहना था कि अब प्रदेश के खिलाड़ियों को आगे बढ़ने कोई नहीं रोक सकता है।
सोमवार को स्वीमिंग पूल के खुलते ही तैराकी के शौकीन अपने अभिभावकों के साथ एमए स्टेडियम पहुंचे। जम्मू-कश्मीर खेल परिषद की ओर से जूनियर वर्ग के लिए तैराकी में प्रशिक्षण हासिल करने के लिए टेक्निकल स्वीमिंग प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है। इसमें जूनियर वर्ग के तैराकों को पेशेवर तैराकी कोच की देखरेख में प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस दौरान तैराकों को तैराकी के दौरान स्वीमिंग पूल में सुरक्षा, तैराकी की तकनीक, फिटनेस पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
जम्मू-कश्मीर खेल परिषद की ओर से अभी फिलहाल विभिन्न आयुवर्गों के लिए फीस निर्धारित की गई है। इसमें कुछ समय के उपरांत संशोधन भी किया जाएगा। मौलाना आजाद स्टेडियम के सीजनल स्वीमिंग पूल को आल वेदर स्वीमिंग पूल में परिवर्तित करने का काम 3.50 करोड़ रुपये की लागत से वर्ष 2019 में शुरू हुआ था, लेकिन फंडिंग की कमी और प्रशासनिक बाधाओं के कारण इसमें काफी देरी हुई।
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वर्ष 2020 में कोरोना महामारी के कारण स्वीमिंग पूल का काम आठ महीने के लिए प्रभावित भी रहा। अब सात वर्षों के उपरांत पांच बार परियोजना की समय सीमा पूरी होने के उपरांत अब कहीं जाकर इसका काम पूरा हुआ है।
बहुतप्रतिक्षित आल वेदर स्वीमिंग पूल के खुलने से प्रसन्न हूं। हम अब भविष्य में जिला और प्रदेश स्तरीय स्वीमिंग प्रतियोगिता के अलावा राष्ट्रीय स्तरीय स्वीमिंग प्रतियोगिता की मेजबानी भी कर सकेंगे। एमए स्टेडियम के स्वीमिंग पूल को राष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है। इस स्वीमिंग कांप्लेक्स में प्रतिदिन लगभग 300 तैराकों के लिए अभ्यास की सुविधा है। इसमें एक मुख्य मानक पूल, एक अलग लर्नर पूल, दर्शकों के बैठने की व्यवस्था और आधुनिक चेंजिंग रूम भी बनाए गए हैं। -नुजहत गुल, सचिव, जम्मू-कश्मीर खेल परिषद
खेल परिषद के राजस्व में होगी बढ़ोतरी
एमए स्टेडियम का पुराना स्वीमिंग पूल वर्ष 1993 में बनाया गया था। उस समय नन्हें तैराकों के अभ्यास के लिए कोई भी लर्नर पूल नहीं था। अब लर्नर पूल में नन्हें तैराक भी तैराकी सीख सकेंगे और भविष्य के लिए प्रदेश और देश के लिए पदक जीतने का सपना संजो सकेंगे। सीजनल स्वीमिंग पूल से जम्मू-कश्मीर खेल परिषद को वर्ष 2019 से पूर्व कुल छह महीने में 20 लाख रुपये का राजस्व फीस के रूप में प्राप्त होता था। अब आल वेदर स्वीमिंग पूल बन जाने से खेल परिषद के राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
कब-कब, क्या-क्या हुआ
- वर्ष 1993 : मौलाना आजाद स्टेडियम परिस के भीतर पहली बार सीजनल स्वीमिंग पूल की स्थापना की गई। इसका उद्घाटन तत्कालीन राज्यपाल केवी कृष्ण राव ने किया।
- वर्ष 2014 : आल वेदर पूल का प्रस्ताव रखा गया। चूंकि सर्दियों में पूल बंद हो जाता था तो तैराकों ने इसे वर्ष भर चालू रखने की मांग की। इसके उपरांत जम्मू-कश्मीर खेल परिषद ने हीटिंग सिस्टम वाले आल वेदर पूल में बदलने का प्रस्ताव रखा।
- फरवरी 2019 : अपग्रेडेशन कार्य की शुरूआत हुई। तत्कालीन राज्यपाल सत्यपाल मलिक की पहल पर इस प्रोजेक्ट के लिए बजट को मंजूरी मिली और 3.50 करोड़ रुपये की इसकी शुरूआती अनुमानिक लागत तय की गई थी।
- वर्ष 2020-2023 : इस प्रतिष्ठित परियोजना को दिसंबर 2020 को पूरा किया जाना था लेकिन कोरोना महामारी के कारण इसकी समय सीमा कईं बार आगे बढ़ाई गई। मार्च 2021 फिर अक्टूबर 2022 और फिर 2023।
- 20 जुलाई 2025 : लंबे इंतजार के उपरांत जम्मू-कश्मीर खेल परिषद द्वारा आल वेदर स्वीमिंग पूल के शेष निर्माण कार्यों में तेजी लाई गई। जनवरी 2026 तक काम समाप्त करने की समय सीमा निर्धारित की गई लेकिन किन्हीं कारणों से अब यह प्रतिष्ठित परियोजना पूरी हो गई है और आज पूल तैराकों को समर्पित कर दिया गया।