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    जम्मू में बारिश से बासमती को मिली संजीवनी, किसानों के चेहरे खिले; 95 फीसदी फसल की रोपाई हुई पूरी

    Updated: Wed, 22 Jul 2026 01:47 PM (IST)

    जम्मू के आरएसपुरा बेल्ट में मध्यम दर्जे की बारिश ने सूखे से प्रभावित बासमती फसल को नया जीवन दिया है, जिससे किसानों को बड़ी राहत मिली है। ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, जम्मू: मध्यम दर्जे की बारिश ने आरएसपुरा बेल्ट में सूखे से प्रभावित बासमती फसल को नया जीवन दिया है। दो दिनों में हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है, जो किसानों के लिए राहत भरा है। किसान बासमती धान की रोपाई का काम पूरा कर चुके हैं, लेकिन रोपाई के बाद खेतों से पानी सूख गया था।

    नहरों में पानी की कमी और बिजली कटौती के कारण पंपसेट भी ठीक से काम नहीं कर पा रहे थे। ऐसे में किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार था, जो अब पूरी हो गई है। किसान अब इस बारिश को संजीवनी मान रहे हैं।

    अरनिया के पिंडी चाड़का के किसान अजय सिंह ने बताया कि बारिश के बाद उन्होंने अपने खेतों का निरीक्षण किया और पाया कि खेतों में पानी जमा हो रहा है, जो बासमती धान के लिए आवश्यक है। पिछले सप्ताह उन्होंने बासमती धान की रोपाई का काम पूरा किया था, लेकिन बाद में पानी सूखने लगा था। अब उन्हें उम्मीद है कि बारिश के चलते फसल अच्छी होगी।

    96 फीसदी हो चुकी रोपाई

    नंदपुर के किसान विजय चौधरी ने कहा कि उनके गांव में 95 प्रतिशत किसान धान की रोपाई कर चुके हैं। पहले फसलों पर संकट था, लेकिन अब बारिश ने उनकी चिंताओं को दूर कर दिया है।

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    कंडी क्षेत्र के किसानों के लिए भी यह बारिश राहत लेकर आई है। पाटी, बरोडी, सुचेती, राया, बगूना, मंडल, पुरमंल, खड़ा, मड़ाना और बीरपुर जैसे क्षेत्रों में खेतों में नमी आ गई है।

    बीरपुर के किसान गौतम सिंह ने बताया कि बारिश सही समय पर आई है। कुछ किसानों ने मक्की की खेती में पहली गोडाई दे दी थी और सभी बारिश का इंतजार कर रहे थे। अब कंडी क्षेत्र में अच्छी मक्की की फसल होने की उम्मीद है।

    किसानों के लिए एडवाइजरी जारी

    कृषि विशेषज्ञ अरुण खजुरिया ने किसानों को सलाह दी है कि कंडी क्षेत्रों में खेत ढलान वाले होते हैं, इसलिए वहां पानी खड़ा नहीं रहता। बासमती धान की फसल के लिए पानी की आवश्यकता होती है, लेकिन साग-सब्जियों और बाग-बगीचों में अधिक पानी जमा न होने दें।

    पानी की निकासी की जानी चाहिए ताकि फसल पर नकारात्मक प्रभाव न पड़े। इस प्रकार, बारिश ने किसानों के चेहरों पर खुशी लौटाई है और उन्हें उम्मीद है कि इस बार बासमती की फसल अच्छी होगी।