जम्मू में सरकारी गेहूं मंडियां असफल, नहीं खुल पाईं 11 में से 9, कारोबारी बोले- 'मंडी का काम अब घाटे का सौदा'
जम्मू जिले में इस साल 11 में से 9 सरकारी गेहूं मंडियां नहीं खुल पाईं क्योंकि कारोबारियों ने टेंडर नहीं भरे, जिससे किसानों को निजी व्यापारियों को कम दा ...और पढ़ें

जम्मू-सांबा-कठुआ में किसानों की MSP वाली उम्मीदें टेंडर में उलझीं।
HighLights
जम्मू में 11 में से 9 गेहूं मंडियां नहीं खुलीं।
कारोबारियों ने टेंडर नहीं भरे, बताया घाटे का सौदा।
किसानों को निजी व्यापारियों को कम दाम पर गेहूं बेचना पड़ा।
जागरण संवाददाता, जम्मू। इस वर्ष जिले में सरकारी मंडियों का खेल ही फेल हो गया है। टेंडर भरने के लिए कारोबारियों के आगे नहीं आने के कारण 11 में से नौ मंडियां खुल ही नहीं पाई। महज अखनूर सेक्टर के परगवाल और गुड़ा मन्हासा में दो मंडियां खोलने में सफलता मिली है।
यहां पर कारोबारियों ने टेंडर भर दिए और उनको मंडियां खोलने के लिए अनुमति मिल गई, मगर यहां कारोबार ढीला ही है। बाकी स्थलों पर मंडियां खुल ही नहीं पाई। मजबूरी में किसानों को व्यापारियों के समक्ष अपनी गेहूं प्रति क्विंटल 2400 से 2500 रुपये में बेचना पड़ रहा है। हर वर्ष किसानों की सहायता के लिए सरकार समर्थन मूल्य पर गेहूं खरीदने के लिए अस्थायी मंडियों की व्यवस्था कराती है। इन मंडियों पर इस बार प्रति क्विंटल गेहूं के लिए 2585 रुपये का समर्थन मूल्य देना है। लेकिन लाभ तभी हो पाता, अगर मंडियां खुलतीं।
मंडी का काम घाटे का सौदा
कारोबारियों का कहना है कि गेहूं की मंडियां चलने का कारोबार अब रास नहीं आ रहा। पिछले वर्षों में सौहांजना मंडी का संचालन करने वाले प्रदीप कुमार ने बताया कि उन्होंने इस बार मंडी नहीं ली। इस कारोबार में लाभ नहीं पा रहा। मंडी में कारोबारियों को प्रति बैग आठ रुपये का कमीशन मिलता है। जबकि दूसरे खर्च इस कदर बढ़ जाते हैं कि मंडी का काम ही घाटे का सौदा लगने लगा है।
वहीं, कई तरह की अड़चने अलग से हैं। ऐसा ही हाल बाकी स्थलों पर होगा। इसलिए वे अबकी इस कारोबार से पीछे हट गए। जम्मू जिले में सरकार ने अप्रैल में 11 मंडियां खोलने की घोषणा की थी जहां 4500 मीट्रिक टन गेहूं किसानों से खरीदी जानी थी। उच्च अधिकारियों की बैठक में यह भी तय हुआ था कि अप्रैल के आखिर में सरकारी मंडियां किसानों के लिए खोल दी जाएंगी। जम्मू, सांबा व कठुआ जिलों में कुछ 21 मंडियां खोलना तय हुआ था।
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मंडियां खोलने का मकसद यही रहता है कि किसान सुरक्षित हों और व्यापारी उसे कम दाम पर माल न बेचे। व्यापारी लोग भी सरकारी मूल्य के आसपास के दाम किसानों को देने लगा है। फिर भी हम काम पर लगे हुए हैं। दो मंडियां तो हमने खोल दी गई हैं और बाकी की प्रक्रिया जारी है। - मनोहर लाल शर्मा, मुख्य कृषि अधिकारी, जम्मू
मंडियां नहीं खोलने पर उठाए सवाल
अरनिया के किसान महेश सिंह का कहना है कि जब अप्रैल के तीसरे सप्ताह में गेहूं निकलना शुरू हो गया था तो उस समय मंडियां क्यों तैयार नहीं थी। अगर होती तो किसान वहीं जाता। यह बात अलग है कि निजी व्यापारी के दाम भी अच्छे ही हैं जिससे किसानों को मंडियां नहीं होने की ज्यादा चुभन नहीं हुई। लेकिन मंडियां खुल गई होती तो शायद व्यापारी मंडियों के अधिक दाम देने के लिए तैयार होता। सौहांजना के किसान कुलभूषण खजूरिया ने बताया कि समय पर मंडियां खुलवाने के लिए हर बार सरकार बार बार बैठकें करती हैं लेकिन उसका परिणाम कुछ नहीं निकलता। इस बार तो सरकारी बुरी तरह से असफल साबित हुई है। इससे किसानों को नुकसान होता है।
यहां नहीं खुल पाई सरकारी मंडियां
- सौहांजना
- गजनसू
- चन्नू चक
- बिश्नाह/आरएसपुरा
- ज्यौड़ियां
- मढ़
- भदरोड़
- अरनिया
- मटटू (खौड़)