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    स्कूल तो पहुंच गए, पर कॉलेज तक नहीं जा रहे स्टूडेंट्स! J&K में उच्च शिक्षा का बुरा हाल, हिमाचल-दिल्ली से बेहद पीछे

    Updated: Thu, 06 Aug 2026 01:55 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में उच्च शिक्षा का सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत 30% से काफी पीछे, केवल 21.5% है। वहीं दिल्ली- हरियाणा आगे हैं। ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में 100 में से सिर्फ 21 बच्चे ही पहुंच रहे कॉलेज!

    जम्मू-कश्मीर में 100 में से सिर्फ 21 बच्चे ही पहुंच रहे कॉलेज!

    HighLights

    1. जम्मू-कश्मीर का GER राष्ट्रीय औसत से 8.5% कम।

    2. उच्च शिक्षा में केवल 21.5% छात्र ही नामांकित हैं।

    3. आर्थिक, संस्थागत बाधाएं छात्रों को कॉलेजों से दूर रख रहीं।

    सुरेंद्र सिंह, जम्मू. जम्मू-कश्मीर में स्कूलों में शत-प्रतिशत नामांकन सुनिश्चित करने के लिए सरकार भले ही घर-घर अभियान चला रही हो, लेकिन बड़ी चुनौती अब विद्यार्थियों को कालेजों और विश्वविद्यालयों तक पहुंचाने की है। इसका संकेत केंद्र सरकार द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से मिला है, जिनके अनुसार प्रदेश का उच्च शिक्षा में ग्रास एनरोलमेंट रेशियो (GER) केवल 21.5 प्रतिशत है। यह राष्ट्रीय औसत 30 प्रतिशत से 8.5 प्रतिशत अंक कम है।

    राज्यसभा में केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री सुकांत मजूमदार ने अखिल भारतीय उच्च शिक्षा सर्वेक्षण (AISHE) 2023-24 के आंकड़े पेश किए उन्होंने बताया कि उच्च शिक्षा में जम्मू-कश्मीर का प्रदर्शन कई राज्यों से पीछे है। पड़ोसी लद्दाख का जीईआर 11.9 प्रतिशत है, जबकि हिमाचल प्रदेश 46.4 प्रतिशत, हरियाणा 35.1 प्रतिशत, पंजाब 30.8 प्रतिशत और दिल्ली 53 प्रतिशत के साथ प्रदेश से काफी आगे हैं।

    पुडुचेरी सबसे आगे

    देश में सबसे अधिक जीईआर 72.3 प्रतिशत के साथ पुडुचेरी का है। ये आंकड़े ऐसे समय सामने आए हैं, जब जम्मू-कश्मीर में शिक्षा विभाग छह से 18 वर्ष आयु वर्ग के प्रत्येक बच्चे को स्कूल से जोड़ने के लिए 100 प्रतिशत नामांकन अभियान चला रहा है। स्कूलों को घर-घर सर्वे कर स्कूल से बाहर बच्चों की पहचान करने और उनका दोबारा दाखिला सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

    12वीं के बाद क्यों नहीं पहुंच पाते छात्र कॉलेज? 

     विशेषज्ञों का मानना है कि केवल स्कूलों में नामांकन बढ़ाने से लक्ष्य पूरा नहीं होगा। बड़ी संख्या में विद्यार्थी 12वीं के बाद आर्थिक कारणों, दूरदराज क्षेत्रों में उच्च शिक्षा संस्थानों की कमी, रोजगार के अनुसार पाठ्यक्रमों के सीमित विकल्प और अन्य सामाजिक परिस्थितियों के चलते कालेजों तक नहीं पहुंच पाते।

    शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, यदि प्रदेश को राष्ट्रीय औसत तक पहुंचना है तो कालेजों की पहुंच बढ़ाने, छात्रवृत्तियों का दायरा विस्तृत करने, व्यावसायिक एवं कौशल आधारित पाठ्यक्रमों को मजबूत करने और ग्रामीण क्षेत्रों में उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने होंगे।

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    2035 तक 50% का लक्ष्य, जम्मू-कश्मीर के लिए बड़ी चुनौती

    राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के तहत वर्ष 2035 तक देश का उच्च शिक्षा सकल नामांकन अनुपात 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा गया है। ऐसे में जम्मू-कश्मीर के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती विद्यार्थियों को स्कूल से आगे कालेजों तक बनाए रखना है।