Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    CM उमर की कैबिनेट में उद्योग नीति पर फैसला नहीं, सितंबर में फिर पेश होगा ड्राफ्ट, उद्योगपतियों में निराशा बढ़ी

    By Lalit Kumar Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sun, 09 Aug 2026 07:08 PM (IST)

    जम्मू-कश्मीर की उद्योग नीति 2021-30 में संशोधन का वादा सरकार ने किया था, लेकिन मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की कैबिनेट बैठक में इस पर कोई निर्णय नहीं हो ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर उद्योग नीति संशोधन पर कैबिनेट में फैसला टला, सितंबर में फिर होगी चर्चा। फाईल फोटो।

    जम्मू-कश्मीर उद्योग नीति संशोधन पर कैबिनेट में फैसला टला, सितंबर में फिर होगी चर्चाफाईल फोटो।

    HighLights

    1. उद्योग नीति 2021-30 संशोधन पर कैबिनेट में निर्णय नहीं।

    2. सितंबर में दोबारा पेश होगा प्रस्ताव, फिर LG मंजूरी।

    3. केंद्रीय पैकेज पर चुप्पी से नए निवेशक चिंतित।

    जागरण संवाददाता, जम्मू। नेशनल कांफ्रेंस सरकार ने सत्ता में आने के साथ ही जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उद्योगपतियों को सरकारी सहयोग उपलब्ध करवाने का वादा किया है और इसके लिए जम्मू-कश्मीर की उद्योग नीति 2021-30 में आवश्यक संशोधन करने का विश्वास दिलाया। अब पिछले करीब डेढ़ साल से स्थानीय उद्योगपति मौजूदा उद्योग नीति में संशोधन की उम्मीद लगाकर बैठे हैं।

    इसे लेकर जून के महीने में सरकार ने जम्मू के उद्योगपतियों से विस्तृत चर्चा कर आवश्यक संशोधन पर उनकी राय भी ली। इसी तरह की बैठक कश्मीर में भी हुई। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही थी कि संधोशन को लेकर तैयार ड्राफ्ट को जल्द झंडी मिलेगी जिससे संशोधन का रास्ता साफ होगा लेकिन गत दिनों मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस पर कोई निर्णय न होने से उद्योग जगत में निराशा है।

    अब सूत्रों का मानना है कि सितंबर माह में इस प्रस्ताव को दोबारा कैबिनेट मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा। अगर उमर कैबिनेट की मंजूरी मिलती है तो संशोधित नीति को अंतिम मंजूरी के लिए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के पास भेजा जाएगा। ऐसे में अगर आगे सब ठीक रहा, तब भी साल के अंत में ही संशोधित नीति लागू हो पाएगी। 

    मुख्य रूप से ये संशोधन चाहते हैं उद्यमी

    • जम्मू-कश्मीर के लिए एक व्यापक लाजिस्टिक्स नीति बनाई जाए।
    • एसजीएसटी, सीजीएसटी एवं आइजीएसटी की प्रतिपूर्ति की जाए।
    • विस्तार करने वाली इकाइयों को प्रोत्साहन दिया जाए।
    • टर्नओवर इंसेंटिव में वृद्धि और उसके समयबद्ध वितरण को सुनिश्चित किया जाए।
    • सरकार माल ढुलाई (फ्रेट) सब्सिडी केवल एक हजार किलोमीटर से अधिक दूरी पर होने वाली बिक्री के लिए देने पर विचार कर रही है, जिसका लाभ केवल चुनिंदा उद्योगों को मिलेगा, जबकि लगभग 98 प्रतिशत सूक्ष्म एवं लघु इकाइयां इससे वंचित रह जाएंगी। ऐसे में उद्यमियों की मांग है कि फ्रेट सब्सिडी सभी अंतरराज्यीय बिक्री पर बिना किसी शर्त के उपलब्ध कराई जाए

    केंद्रीय पैकेज पर चुप्पी नए निवेशकों की बढ़ा रही चिंता

    -एक तरफ जहां मौजूदा उद्योगपति प्रदेश सरकार से उम्मीदें लगाकर बैठे हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रदेश में निवेश करने से इच्छुक निवेशक केंद्रीय पैकेज पर मोदी सरकार की ओर से कोई घोषणा न किए जाने से चिंतित है। जम्मू-कश्मीर में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2021 में घोषित न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम का लाभ समाप्त होने के बाद से प्रदेश में थमे औद्योगिक निवेश को फिर गति मिलने की उम्मीद थी।

    खबरें और भी

    जुलाई में इसे लेकर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में एपेक्स कमेटी की बैठक भी हुई लेकिन कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया। बता दे कि न्यू सेंट्रल सेक्टर स्कीम के तहत केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में निवेश करने वालों को वित्तीय लाभ देने के लिए 28 हजार 400 करोड़ रुपये का पैकेज दिया था और इस पैकेज के तहत प्रदेश में करीब डेढ़ लाख करोड़ रुपये के निवेश के प्रस्ताव आए और चार सालों में दस हजार 500 करोड़ रुपये का निवेश हुआ।

    सितंबर 2024 में वित्तीय पैकेज का लाभ आवंटित होने के साथ ही इस स्कीम को बंद कर दिया गया जिसके बाद से नया निवेश थम गया। इस निवेश को जारी रखने के लिए पिछले साल जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने 28,400 करोड़ रुपये के पैकेज को बढ़ाकर 75 हजार करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा था लेकिन अब तक केंद्र सरकार की ओर से इस पर कोई घोषणा नहीं की गई।

    प्रदेश में निवेश के 8306 आवेदन लंबित है

    दिसंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में 9606.46 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 1984 औद्योगिक इकाईयों ने उत्पादन शुरू किया जिससे 63 हजार 710 लोगों को रोजगार मिला। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 2977 करोड़ रुपये के निवेश के साथ 334 इकाईयों ने उत्पादन शुरू किया जिससे 8443 लोगों को रोजगार मिला। उद्योग और वाणिज्य विभाग से मिली जानकारी के अनुसार अभी भी विभाग के पास 1.63 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव के साथ 8306 आवेदन लंबित पड़े हैं जो केंद्र सरकार की ओर से आर्थिक पैकेज मिलने के इंतजार में है।

    जहां तक प्रदेश सरकार की ओर से उद्योग नीति में संशोधन किए जाने का संबंध है तो उम्मीद है कि अब सितंबर 2026 तक इसे अंतिम रूप दे दिया जाएगा। हमने सरकार के साथ हुई बैठक में अपने सुझाव रख दिए थे। स्थानीय उद्योग को अगर बचाना है तो सरकार को टर्नओवर इनसेंटिव व अन्य रियायतें जारी रखनी पड़ेगी। इसके बिना यहां उद्योग नहीं चल सकता। -ललित महाजन, प्रभारी एमएसएमई काउंसिल फिक्की जेएंडके