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    अब जम्मू-कश्मीर के मेडिकल कॉलेजों में देशभर के छात्रों के साथ पढ़ाई का मौका, 500 से बढ़कर 1725 हुईं MBBS सीटें

    By Rohit Jandiyal Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Wed, 05 Aug 2026 07:10 AM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 हटने के बाद चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव आया है। एमबीबीएस सीटें 500 से बढ़कर 1725 हो गईं, जिससे देशभर के छात्रों को प् ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में चिकित्सा शिक्षा का नया दौर: बढ़ी सीटें, देशभर के छात्रों को मौका।

    जम्मू-कश्मीर में चिकित्सा शिक्षा का नया दौर: बढ़ी सीटें, देशभर के छात्रों को मौका

    HighLights

    1. जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस सीटें 500 से बढ़कर 1725 हुईं।

    2. अखिल भारतीय कोटे से देशभर के छात्रों को प्रवेश का अवसर मिला।

    3. नए मेडिकल और आयुष कॉलेज खुले, हालांकि स्टाफ की कमी चुनौती है।

    रोहित जंडियाल, जम्मू। जम्मू-कश्मीर के पुनर्गठन के बाद स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा में बड़ा बदलाव देखने को मिला है। अब जम्मू-कश्मीर के विभिन्न मेडिकल कालेजों, आयुर्वेद कालेजों में देश भर के विद्यार्थी एमबीबीएस और पीजी की पढ़ाई कर रहे हैं। यही नहीं यहां के विद्यार्थी भी देश भर के मेडिकल कालेजों में प्रवेश के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

    वर्ष 2019 से पहले अनुच्छेद 370 के कारण जम्मू-कश्मीर में एमबीबीएस की 500 सीटें थी और इन सभी पर यहीं के विद्यार्थी पढ़ाई करते थे। यहां की कोई भी सीट अखिल भारतीय कोटे के लिए आरक्षित नहीं होती थी। इसका एक नुकसान यह था कि इससे जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थियों को भी देश भर के सरकारी मेडिकल कालेजों में एडमिशन लेने के लिए प्रतिस्पर्धा करने की इजाजत नहीं थी।

    15% सीटें देश भर के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित

    अब शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए एमबीबीएस की जम्मू-कश्मीर में 1725 सीटें हैं और इनमें से 15 प्रतिशत सीटें देश भर के विद्यार्थियों के लिए आरक्षित हैं। यह सीटें अखिल भारतीय कोटे में रखी हैं। अब इन सीटों के लिए जम्मू-कश्मीर के विद्यार्थी भी देश भर में पढ़ाई करने योग्य हैं। वे भी अखिल भारतीय कोटे में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। इसी तरह पीजी की सीटों में अब पचास प्रतिशत अखिल भारतीय कोटे से आते हैं।

    विशेषज्ञों का कहना है कि नई व्यवस्था का लाभ सभी को हुआ है। एक ओर जहां देश भर के विद्यार्थी यहां पर आकर पढ़ रहे हैं। वहीं यहां के विद्यार्थियों को भी अब देश भर के सरकारी मेडिकल कालेजों में पढ़ाई का अवसर मिला है।

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    कई मेडिकल कालेज खुले

    वर्ष 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में चिकित्सा शिक्षा को सबसे अधिक बढ़ावा मिला है। हालांकि कठुआ, राजौरी, डोडा, बारामुला और अनंतनाग में मेडिकल कालेज खुलने की घोषणा पहले 2014 में हो चुकी थी लेकिन इन सभी कालेजों की स्थापना 2019 या इसके बाद हुई। उधमपुर और हंदवाड़ा के मेडिकल कालेज भी वर्ष 2023 में खुले। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान विजयपुर में खुल गया है और अवंतीपुरा में काम जोरों पर है।

    उम्मीद जाहिर की जा रही है कि यह एम्स भी इस वर्ष के अंत तक खुल जाएगा।लेकिन चुनौतियां भी बरकरार हैं।नए मेडिकल कालेजों में स्टाफ की भारी कमी बनी हुई है। एम्स जम्मू में भी अभी स्टाफ की कमी है।कई वषों तक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं देने वाले डा. रोमेश गुप्ता का कहना है कि इसमें कोई दो राय नहीं है कि चिकित्सा शिक्षा विभाग में सुधार हुआ है लेकिन स्टाफ की कमी को दूर करना प्राथमिकता पर होना चाहिए।

    आयुष को मिला बढ़ावा

    बीते सात वर्ष में जम्मू-कश्मीर में आयुष पद्वतियों को काफी बढ़ावा मिला है। पचास वर्ष बाद जम्मू-कश्मीर में एक बार फिर से आयुर्वेद और युनानी मेडिकल कालेज खुले हैं। यही नहीं पहली बार जम्मू-कश्मीर में होम्योपैथी मेडिकल कालेज भी स्थापित हुआ है। इससे जम्मू-कश्मीर उन प्रदेशों व केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल हो गया है यहां पर सभी पद्वतियों के मेडिकल कालेज हैं।

    आयुर्वेद विशेषज्ञ डॉ. अशोक शर्मा का कहना है कि जम्मू-कश्मीर में आयुष को कुछ वषों में बहुत बढ़ावा मिला है। आयुर्वेद, युनानी और होम्योपैथी कालेज खुलने से न सिर्फ इन पद्वतियों की शिक्षा बढ़ी है बल्कि यहां के विद्यार्थियों को अब पढ़ाई के लिए बाहर नहीं जाना पड़ रहा है।