कारगिल विजय दिवस 2026: द्रास में गूंजी वीरों की गाथाएं, शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि; हेलीकॉप्टर से कारगिल वार मेमोरियल पर पुष्प वर्षा
27वें कारगिल विजय दिवस पर द्रास के वार मेमोरियल में शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, जिसमें रक्षामंत्री राजनाथ सिंह सहित कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। ...और पढ़ें
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कारगिल विजय दिवस 2026: द्रास में गूंजी वीरों की गाथाएं।
HighLights
27वें कारगिल विजय दिवस पर द्रास में श्रद्धांजलि समारोह आयोजित हुआ।
रक्षामंत्री राजनाथ सिंह ने शहीदों को पुष्पांजलि अर्पित की।
कैप्टन विक्रम बत्रा जैसे वीरों की असाधारण वीरता याद की गई।
राज्य ब्यूरो, जम्मू। कारगिल की चोटियों पर दुश्मन से लोहा लेते हुए भारतीय सैनिकों की असाधारण वीरता के किस्से 27वें कारगिल विजय दिवस पर शान से गूंजे। द्रास के कारगिल वार मेमोरियल में पाकिस्तान को करारी मात देते हुए बलिदान देने वाले सशस्त्र सेनाओं के बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी गई।
कारगिल की चोटियों की ओट में स्थित द्रास रक्षामंत्री रातजनाथ सिंह द्वारा बुलंद किए गए देशभक्ति के नारों से गूंज उठा। देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले परमवीर चक्र विजेता कैप्टन विक्रम बत्रा, कैप्टन मनोज पांडे, अन्य बलदािनयों की असाधारण वीरता के किस्से फिर ताजा हो आए।
द्रास के कारगिल वार मेमोरियल पर कार्यक्रम रविवार सुबह सेना के हेलीकाप्टरों के पुष्प वर्षा करने के साथ शुरू हुए कार्यक्रम में रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, आर्मी चीफ जनरल धीरज सेठ, लद्दाख के उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना, उत्तरी कमान के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल प्रतीक शर्मा ने 545 बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।
लद्दाख के द्रास में कारगिल विजय दिवस के मुख्य कार्यक्रम के साथ सेना की उत्तरी कमान मुख्यालय उधमपुर, अन्य सैन्य फारमेशनों में भी हुए कार्यक्रमों के दाैरान सैनिकों ने अपने बलिदानियों को याद करते हुए देश की खातिर उनके पद् चिन्हों पर चलने की प्रेरणा ली। इसके साथ लद्दाख व जम्मू कश्मीर में कई सामाजिक संगठनों ने भी बलिदानियों को श्रद्धांजलि दी।
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द्रास में वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान सीधी चोटियों पर लड़ी गई लड़ाई में दुश्मन को खदेड़ते हुए वीरगति पाने वाले वीरों के बलिदान को याद किया गया। कारगिल के युद्ध में भारतीय सेना के 537, भारतीय वायु सेना के 5, सीमा सुरक्षा बल का एक वीर शामिल था।
उनके साथ दो नागरिकों ने भी कारगिल के युद्ध में बलिदान दिया था। द्रास में हुए कार्यक्रमों के माध्यम से वर्ष 1999 के कारगिल युद्ध की यादों को ताजा किया गया। वीरों के बलिदान को याद कर आंखे नम हो आई। हर कोई यह सोचने का मजबूर था कि भारतीय सैनिक किस तरह से विपरीत हालात में कारगिल की चोटियां चढ़कर दुश्मन से लड़े होंगे।
बलिदानियों की वीरगाथाएं सुनकर यहां लद्दाख में देश सेवा कर रहे सैनिकों की भुजाएं फड़की तो बलिदानियों के परिजनों की आंखें नम हो हो आई। कारगिल युद्ध के दौरान टाइगर हिल, तोलोलिंग, मुश्कोह वैली व लोमोचन टाप जैसी चोटियों को जीतने के लिए भारतीय सैनिक विपरीत हालात में बुलंद हौसले के साथ लड़े थे।
द्रास में भारी उत्साह के चलते रविवार सुबह छह बजे से ही कारगिल वार मेमोरियल पर बलिदानियों के परिजनों के आने का सिलसिला शुरू हो गया था। कारगिल युद्ध के बलिदानियों के परिजनों को शुक्रवार लामोचन व्यू प्वायंटी में हुए कार्यक्रम में सम्मानित किया था। बलिदानियों के परिजन और स्थानीय निवासी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित करने वालों में सबसे पहले शामिल थे।
कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेना के बैंड में देशभक्ति से ओतप्रोत धुने बजाकर समा बांंधा। इस दौरान लास्ट पोस्ट धुन बजाकर कारगिल वार मेमोरियल पर विजय दिवस के कार्यक्रम का समापन हुआ। इस मौके पर लद्दाख प्रशासन के कई अधिकारी, कारगिल स्वायत्त पर्वतीय परिषद के पदाधिकारी, एनसीसी कैडेट व क्षेत्र के कई गणमान्य लोग मौजूद थे।
कारगिल विजय दिवस पर दो दिवसीय कार्यक्रम शनिवार सुबह शुरू हुआ था। इस दौरान लमोचन व्यू प्वायंट पर युद्ध के संस्मरण कार्यक्रम में बलिदानियों के परिजनों को सम्मानित करने के साथ रविवार शाम को कारगिल वार मेमोरियल पर शौर्य संध्या के दौरान इसे दीप जलाकर रोशन किया गया था। दोपहर को द्रास के सेंडो रियर में गौरवमय संस्कृति कार्यक्रम का भी आयोजन हुआ।