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    लोकगाथाओं से सजा पुराना शहर, सिर्फ आर्ट नहीं लद्दाख की आत्मा से मिलना है Biennale Exhibition, आप कब जा रहे हैं लेह?

    By Vivek Singh Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Mon, 03 Aug 2026 02:34 PM (IST)

    लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी ने पुराने लेह शहर को एक जीवंत ओपन-एयर आर्ट गैलरी में बदल दिया है, जहां कलाकार लद्दाख की लोककथाओं, संस्कृति और पर्यावरण सं ...और पढ़ें

    लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी: पुराने लेह में कला, संस्कृति और पहाड़ों का अद्भुत संगम।

    लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी: पुराने लेह में कला, संस्कृति और पहाड़ों का अद्भुत संगम

    HighLights

    1. पुराना लेह शहर जीवंत ओपन-एयर आर्ट गैलरी में बदला।

    2. कलाकार लद्दाख की लोककथाओं, संस्कृति, पर्यावरण को दर्शाते हैं।

    3. यह प्रदर्शनी सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैश्विक पहचान बढ़ाती है।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख में हिमालय की अद्भुत प्राकृतिक सुंदरता के बीच शुरू हो लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी (Ladakh Biennale Exhibition) में कला, संस्कृति व पहाड़ों का संगम हाे रहा है। युवा कलाकारों की रचनात्मकता से पुराना लेह शहर एक जीवंत ओपन-एयर आर्ट गैलरी में तब्दील हो चुका है।

    लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे कलाकारों ने आकर्षक कलात्मक इंस्टालेशन के माध्यम से लद्दाख की लोककथाओं, सांस्कृतिक परंपराओं, बौद्ध विरासत व हिमालयी जीवनशैली को आधुनिक कला के रूप में प्रस्तुत किया है। पुराने लेह शहर के मकानों पर कलाकारों द्वारा बनाए गए रंग बिरंगे ड्रेगन इन दिनों स्थानीय निवासियों के साथ पर्यटकों को भी आकर्षित कर रहे हैं।

    अगले आठ दिन 12 प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे अंतरराष्ट्रीय व लद्दाखी कलाकार स्थानीय समुदाय, जलवायु परिवर्तन, पर्यावरण संरक्षण व सांस्कृतिक पहचान जैसे महत्वपूर्ण विषयों को भी प्रभावशाली ढंग से उकेरेंगे।

    इस बार हो रही लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी की थीम अन्य सितारों से संकेत है। एक अगस्त से शुरू हुई इस प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे 12 अंतरराष्ट्रीय व लद्दाखी कलाकार प्रदेश में 3,000 मीटर से अधिक ऊंचाई वाले मनोरम परिदृश्यों में भूमि पारिस्थितिकी, वर्तमान समय की महत्वपूर्ण चुनौतियों को कलाकृतियों के माध्यम से पेश करेंगे। दस अगस्त तक लद्दाख द्विवार्षिक प्रदर्शनी 230 किलोमीटर लंबे मार्ग पर आठ जगहों पर आयोजित की जा रही। यह प्रदर्शनी लेह, बासगो, लिकिर, नुरला, लामायुरू, हेनास्कु, मुलबेख व कारगिल में आयोजित होगी।

    कचरे से नहीं, पहाड़ की मिट्टी से बनी कला

    लद्दाख के मुख्यसचिव आशीष कुंद्रा ने इस प्रदर्शनी में हिस्सा ले रहे युवाओं की सराहना की है। उनका कहना है कि इस समय पुराना लेह शहर एक ओपन-एयर आर्ट गैलरी बन गया है। उनका कहना है कि विश्व की सबसे उंची इस द्विवार्षिक प्रदर्शनी के दौरान पुराना लेह शहर इस समय लद्दाखी लोकगाथाओं व सांस्कृतिक परंपराओं से प्रेरित चित्रों व कलाकृतियों से सजा हुआ है।

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    इसी बीच प्रदर्शनी के दौरान लद्दाखी व विभिन्न देशों के कलाकार विशिष्ट जगहों पर कला कार्यों के माध्यम से जलवायु, संस्कृति व समुदाय के बीच गहरे संबंधों को दर्शा रहे हैं। यह आयोजन केवल कला प्रदर्शनी नहीं, अपितु स्थानीय लोगों, कलाकारों व पर्यटकों के बीच संवाद और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का भी एक महत्वपूर्ण मंच भी बन रहा है।

    आयोजकों का उद्देश्य लद्दाख की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत व प्राकृतिक धरोहर को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दिलाना है। पूरे आयोजन में पर्यावरण के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाते हुए स्थानीय व टिकाऊ सामग्रियों का उपयोग किया जा रहा है। कला के साथ-साथ प्रकृति संरक्षण का भी संदेश दिया जा सके।