लश्कर के आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़, फर्जी पासपोर्ट से विदेश भागा आतंकी 'खरगोश'; हरियाणा-राजस्थान तक फैला नेटवर्क
लश्कर-ए-तैयबा के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर शिकंजा कसते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई गिरफ्तारियां की हैं। इनमें आतंकियों को फर्जी पहचान पत्र और पासपोर्ट द ...और पढ़ें
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लश्कर आतंकी 'खरगोश' फर्जी पासपोर्ट से भागा, खाड़ी देश में छिपा। एआई जेनरेटेड तस्वीर। (सोर्स- जेमिनी)
HighLights
लश्कर-ए-तैयबा के अंतरराज्यीय नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ
आतंकी उमर 'खरगोश' फर्जी पासपोर्ट से इंडोनेशिया भागा
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया
पीटीआई, जम्मू। हरियाणा, राजस्थान और देश के अन्य हिस्सों में लश्कर-ए-तैयबा आतंकी समूह के अंतरराज्यीय नेटवर्क पर शिकंजा कसने के बाद कई खुलासे हो रहे हैं। आतंकियों को पासपोर्ट समेत फर्जी पहचान पत्र हासिल करने में मदद करने के आरोप में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा एजेंसियों के साथ मिलकर कई लोग पकड़े हैं।
आतंकियों में से एक की पहचान उमर उर्फ ‘खरगोश’ के रूप में हुई थी, जो पासपोर्ट हासिल कर इंडोनेशिया फरार हो गया। माना जा रहा कि वहां से उसने एक और फर्जी यात्रा दस्तावेज का इस्तेमाल किया और फिलहाल वह किसी खाड़ी देश में छिपा हुआ है।
अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए व्यक्तियों ने आधार कार्ड, स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड और मतदाता कार्ड जैसे दस्तावेज बनाकर आतंकियों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान की। इस जांच का नेतृत्व श्रीनगर पुलिस ने किया, जिसने पूरी खुफिया जानकारी जुटाई।
अधिकारियों ने बताया कि पाकिस्तान के कराची निवासी उमर ने 2012 के बाद भारत में घुसपैठ की थी और राजस्थान के जयपुर से प्राप्त जाली पासपोर्ट का इस्तेमाल करके 2024 में भाग गया था। ये विवरण तब सामने आए जब श्रीनगर पुलिस ने लश्कर-ए-तैयबा के एक अंतर-राज्यीय मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया और पांच लोगों को गिरफ्तार किया था।
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इनमें एक पाकिस्तानी आतंकी अब्दुल्ला उर्फ अबू हुरैरा भी शामिल है, जो पिछले 16 वर्षों से फरार था और उसने जम्मू-कश्मीर के बाहर अपने ठिकाने स्थापित कर लिए थे। अब्दुल्ला के साथ एक अन्य पाकिस्तानी नागरिक उस्मान उर्फ खुबैब की गिरफ्तारी को श्रीनगर पुलिस की एक और बड़ी सफलता माना जा रहा है।
छह महीने पहले पुलिस ने हरियाणा के फरीदाबाद स्थित अल-फलाह विश्वविद्यालय केंद्रित एक सफेदपोश आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जिसका संबंध नवंबर 2025 के लाल किला विस्फोट मामला से बताया गया था।
पूछताछ के दौरान अब्दुल्ला ने जांचकर्ताओं को अपने और उमर के भारत भर में फैले नेटवर्क और गतिविधियों के बारे में जानकारी दी। उसने विशेष रूप से राजस्थान, हरियाणा और पंजाब में उनकी मौजूदगी के बारे में बताया। 31 मार्च को शुरू हुए इस अभियान ने लश्कर-ए-तैयबा के वित्तपोषण और वित्तीय ढांचे का खुलासा किया है।