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    2021 में हादसा, टांग गई पर हौसला नहीं, नेहा भट एक पैर से कर रहीं दुर्गम अमरनाथ यात्रा, देखकर दंग हुए साथी यात्री

    By Rohit Jandiyal Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 04 Jul 2026 06:12 PM (IST)

    गुजरात की नेहा भट, जिन्होंने 2021 में एक दुर्घटना में अपना पैर खो दिया था, एक पैर के सहारे दुर्गम अमरनाथ यात्रा कर रही हैं। ...और पढ़ें

    एक पैर से अमरनाथ यात्रा कर रहीं नेहा भट, साथी यात्री हुए उनके हौसले के कायल।

    एक पैर से अमरनाथ यात्रा कर रहीं नेहा भट, साथी यात्री हुए उनके हौसले के कायल

    HighLights

    1. नेहा भट एक पैर के सहारे कर रही हैं अमरनाथ यात्रा।

    2. 2021 में दुर्घटना में खोया था पैर, हौसला नहीं टूटा।

    3. उनकी यात्रा से अन्य श्रद्धालु भी हुए प्रेरित और उत्साहित।

    रोहित जंडियाल, जम्मू। कहते हैं मन में श्रद्धा और आस्था हो तो कोई भी किसी श्रद्धालु के कदमों को नहीं रोक सकता।ऐसा ही कुछ गुजरात की नेहा भट का हौंसला है।जिस दुर्गम और पहाड़ी मार्ग पर चलने के लिए युवा व स्वस्थ लोग भी कई बार सोचते हैं, उसी मार्ग पर एक पैर के सहारे वह बाबा बर्फानी के दर्शनों के लिए बालटाल से भवन के लिए जा रही हैं।यहां से वह पैदल ही पहाड़ों की खड़ी चोटियों को एक टांग के सहारे नाप कर बाबा बर्फानी की पवित्र गुफा में नतमस्तक हो आर्शीबाद लेना चाहती हैं।

    नेहा की वर्ष 2021 में एक सड़क दुर्घटना में टांग कट गई थी। लेकिन उसका हौंसला कभी नहीं टूटा।हादसे के बाद कुछ समय के लिए लगा कि शायद ही अब फिर से न चल पाउं। लेकिन धीरे-धीरे मन को मजबूत बनाया और प्राेस्थेटिक पैर के सहारे चलना शुरू कर दिया।

    नेहा ने दैनिक जागरण से बातचीत करते हुए बताया कि गत वर्ष उसने एक पैर पर चलते हुए ही केदारनाथ धाम में पैदल 22 किलोमीटर की यात्रा की थी।वह पैदल चल कर सभी को यह संदेश देना चाहती है कि एक पैर से भी दुनिया को जीता जा सकता है। सिर्फ मन में कुछ करने की तमन्ना होनी चाहिए।

    नेहा ने बताया कि उसने सुना है कि बाबा बर्फानी का रास्ता काफी दुर्गम है लेकिन बाबा केदारनाथ धाम की यात्रा करने के बाद हौंसला और बढ़ा है। नेहा अकेले ही यात्रा पर आई है लेकिन अच्छी बात यह है कि जो कोई भी उसके हौंसले और जज्बे को देखता है, वे ही उसका मुरीद बन जाता है और उसका हौंसला बढ़ाने के लिए हर-हर महादेव के नारे लगाता है।

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    पैदल चलकर ही बाबा के दरबार में जाना है

    नेहा का सामान से भरा बैग भी अन्य श्रद्धालु उठाकर ले जाते हैं।नेहा ने बताया कि जब वह गुजरात से जम्मू पहुंची तो उसे दो और साथी मिल गए। उन्होंने उसका कपड़ों से भरा बैग उठा लिया है।अब पैदल चलकर ही बाबा के दरबार में जाना है। मेरी सभी श्रद्धालुओं से भी अपील है कि वे बाबा अमरनाथ के दर्शनों के लिए बालटाल और पहलगाम में आएं। नेहा का कहना है कि वह हर जगह अकेले ही जाती है और हर जगह उसके साथ चलने वाले श्रद्धालु उसका उत्साह बढ़ाते हैं।

    लेकिन नेहा के साथ चल रहे श्रद्धालु उसका अदम्य साहस देखकर दंग है। उनका कहना है कि जब वे घर से बालटाल के लिए रवाना हुए थे तो उन्हें लग रहा था कि पैदल यात्रा करना बहुत ही मुश्किल है। लेकिन नेहा के इस जज्बे को देखकर अब उन्हें भी लग रहा है कि पैदल ही यात्रा करेंगे।उनके लिए नेहा प्रेरणास्रोत बन गई है।