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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Nov 12, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    अब आतंकवादी गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर सियासत, महबूबा मुफ्ती ने उठाए सवाल

    Updated: Tue, 12 Nov 2024 09:50 AM (IST)

    जम्मू-कश्मीर में सरकारी कर्मचारियों को आतंकी गतिविधियों में शामिल होने पर बर्खास्त करने के फैसले के खिलाफ आवाज उठने लगी है। पीडीपी प्रमुख महबूबा मुफ्त ...और पढ़ें

    आतंकवादी गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर महबूबा ने उठाए सवाल (फाइल फोटो)
    आतंकवादी गतिविधियों में शामिल कर्मचारियों की बर्खास्तगी पर महबूबा ने उठाए सवाल (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. महबूबा मुफ्ती ने सीएम उमर अब्दुल्ला को लिखा पत्र
    2. 'प्रभावित परिवारों को अपना पक्ष रखने का मौका दें'

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। विधानसभा में जम्मू-कश्मीर को राज्य दर्जे के प्रस्ताव पर सियासी दंगल के बाद अब राष्ट्रविरोधी और आतंकी गतिविधियों में संलिप्त सरकारी अधिकारियों व कर्मियों को सेवामुक्त किए जाने के खिलाफ आवाज मुखर होने लगी है।

    पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने सोमवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को इस विषय में पत्र लिखा है। उन्होंने कहा कि वह आतंकियों और अलगाववादी गतिविधियों में संलिप्त सरकारी अधिकारियों को सेवामुक्त किए जाने की नीति की समीक्षा करें और इसके लिए समिति बनाएं।

    महबूबा मुफ्ती ने की ये मांग

    पीडीपी प्रमुख ने कहा कि समीक्षा समिति उन सभी लोगों के मामलों की पुनर्मूल्यांकन करे जिन्हें बीते चार वर्ष में आतंकियों और अलगाववादियों के साथ तथाकथित संबंधों के आरोप में बर्खास्त किया गया है। समिति प्रभावित व्यक्तियों या उनके परिवारों को अपना पक्ष रखने का मौका दे।

    इसके अलावा वह ऐसे मामलों में पीड़ित परिवारों को तत्काल वित्तीय सहायता प्रदान और उनके अधिकारों की बहाली प्रक्रिया सुनिश्चित करे। समिति भविष्य में इसी तरह की कार्रवाई रोकने के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश विकसित करें।

    LG ने इतने अधिकारियों का सेवा किया है समाप्त

    बता दें कि पांच अगस्त 2019 के बाद प्रदेश प्रशासन ने सरकारी तंत्र में छिपे बैठे आतंकियों और अलगाववादियों के मददगारों के खिलाफ एक अभियान चलाया। इस अभियान के तहत संविधान की धारा 311 (2) (सी) के तहत उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अब तक 74 सरकारी अधिकारियों व कर्मियों को सेवाएं समाप्त कर उन्हें घर भेजा है। इनमें प्रोफेसर, डॉक्टर, पुलिस अधिकारी, पुलिस कर्मी और एसडीएम रैंक तक के अधिकारी शामिल हैं।

    महबूबा मुफ्ती ने जो पत्र लिखा है, उस पर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला अपनी मर्जी से अंतिम निर्णय नहीं ले सकते। यह सुरक्षा से जुड़ा मामला है। वह संबंधित नीति में संशोधन का प्रस्ताव तैयार कर सकते हैं और सिर्फ उसकी सिफारिश कर सकते हैं। उसमें बदलाव करने या न करने का अंतिम निर्णय उपराज्यपाल को ही होगा।

    -एडवोकेट अंकुर शर्मा, विधि मामलों के विशेषज्ञ

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    सरकारी सेवा में शामिल हो गए थे पूर्व आतंकी

    इनमें कई पूर्व आतंकी भी हैं जो अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर सरकारी सेवा में शामिल हो गए थे। कई ऐसे अधिकारी थे जो अपने पद का दुरुपयोग कर आतंकियों और अलगाववादियों की मदद कर रहे थे। इन सभी को जम्मू-कश्मीर पुलिस के खुफिया विंग और केंद्रीय खुफिया एजेंसियों की सुबूतों के आधार पर तैयार रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए बर्खास्त किया गया है।

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