जम्मू के रघुनाथ मंदिर पहुंचे तो नीलकंठ के दर्शन करना न भूलें, पूरी होती सारी मनोकामनाएं, सावन में दिखता अद्भुत नजारा
Jammu Shri Raghunath Temple: जम्मू के श्री रघुनाथ मंदिर परिसर में स्थित भगवान नीलकंठ महादेव का प्राचीन मंदिर श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। स ...और पढ़ें
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जम्मू के रघुनाथ मंदिर में नीलकंठ महादेव की महिमा सावन में विशेष।
HighLights
श्री रघुनाथ मंदिर में नीलकंठ महादेव का प्राचीन मंदिर।
सावन मास में शिव मंदिर में उमड़ती भक्तों की भीड़।
महाराजा गुलाब सिंह ने 1835 में निर्माण योजना बनाई।
जागरण संवाददाता, जम्मू। जम्मू शहर के मध्य स्थित श्री रघुनाथ मंदिर केवल अपनी भव्यता और ऐतिहासिक विरासत के लिए ही प्रसिद्ध नहीं है, बल्कि इसके परिसर में विराजमान भगवान शिव का प्राचीन मंदिर भी श्रद्धालुओं की गहरी आस्था का केंद्र है। रघुनाथ मंदिर आने वाले श्रद्धालु भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण के दर्शन के साथ यहां विराजमान भगवान नीलकंठ महादेव के दर्शन करना भी अपना सौभाग्य मानते हैं।
विशेष अवसरों और सावन मास में यहां श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। सुबह से ही मंदिर परिसर हर-हर महादेव और बम-बम भोले के जयघोष से गूंज उठता है।दूर-दूर से आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव का जलाभिषेक कर सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हैं। पहले जानिए श्री रघुनाथ मंदिर का इतिहास...
1857 में पूर्ण हुआ था मंदिर का निर्माण
श्री रघुनाथ मंदिर जम्मू की धार्मिक एवं स्थापत्य विरासत का महत्वपूर्ण अध्याय है। मंदिर के निर्माण की योजना वर्ष 1835 में तैयार की गई थी, जबकि इसका निर्माण महाराजा गुलाब सिंह के शासनकाल में 1857 में कराया गया। बाद में उनके पुत्र महाराजा रणबीर सिंह ने मंदिर के निर्माण कार्य को पूर्ण करवाया।
लगभग 25 वर्षों में आकार लेने वाला यह मंदिर आज जम्मू की धार्मिक चेतना, वास्तुकला और ऐतिहासिक गौरव का अद्भुत संगम बन चुका है। मंदिर परिसर में अनेक देवी-देवताओं के मंदिर हैं, जो इसकी आध्यात्मिक गरिमा को और बढ़ाते हैं।
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रघुनाथ मंदिर में भगवान शिव का विशेष धाम
रघुनाथ मंदिर परिसर में स्थित शिव मंदिर अपनी विशिष्ट धार्मिक पहचान रखता है। यहां भगवान नीलकंठ शिवशंकर की पूजा-अर्चना विशेष श्रद्धा के साथ की जाती है। सावन मास में शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र, पुष्प और अन्य पूजन सामग्री अर्पित करने के लिए श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं।
मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना करने से भक्तों को मानसिक शांति मिलती है और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी विश्वास के चलते सावन के प्रत्येक सोमवार को मंदिर में विशेष पूजा-अर्चना और जलाभिषेक का सिलसिला चलता है।
आस्था का केंद्र है शिवलिंग
पंडित हेम राज शर्मा बताते हैं कि मंदिर में स्थापित शिवलिंग श्रद्धालुओं के लिए केवल पूजा का प्रतीक नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और आध्यात्मिक ऊर्जा का केंद्र है। भक्त श्रद्धापूर्वक शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं और भगवान भोलेनाथ से परिवार की सुख-शांति, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की प्रार्थना करते हैं।
आस्था, विरासत, शिवभक्ति का संगम रघुनाथ मंदिर
स्थानीय निवासी और श्रद्धालु डॉ. कमल शर्मा ने बताया कि रघुनाथ मंदिर परिसर में भगवान शिव के अनेक स्वरूपों और शिवलिंगों के दर्शन श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभूति प्रदान करते हैं। सावन में भगवान नीलकंठ की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु जलाभिषेक करने पहुंचते हैं।
शिवभक्ति, रघुनाथ जी की आस्था और जम्मू की ऐतिहासिक विरासत- इन तीनों का संगम श्री रघुनाथ मंदिर को शहर की धार्मिक पहचान का एक अभिन्न हिस्सा बनाता है।