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    अरनिया जाली भारतीय करेंसी मामले में नया मोड़, जम्मू-कश्मीर SOG ने संभाली कमान, मुख्य आरोपी अभी भी पहुंच से दूर

    By Daljeet Singh Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Fri, 31 Jul 2026 06:37 PM (IST)

    अरनिया में जाली भारतीय करेंसी मामले की जांच अब स्थानीय पुलिस से एसओजी को सौंप दी गई है। सेना की खुफिया जानकारी के बाद शुरू हुई जांच में अंतरराज्यीय ने ...और पढ़ें

    अरनिया जाली करेंसी मामले में एसओजी ने संभाली जांच।

    अरनिया जाली करेंसी मामले में एसओजी ने संभाली जांच

    HighLights

    1. जाली भारतीय करेंसी मामले की जांच एसओजी को सौंपी गई।

    2. सेना की खुफिया जानकारी के बाद जांच शुरू हुई थी।

    3. अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले, मुख्य आरोपी फरार हैं।

    संवाद सहयोगी, आरएसपुरा। अरनिया में सामने आए कथित जाली भारतीय करेंसी मामले की जांच अब स्थानीय पुलिस के हाथों से निकलकर स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) के पास पहुंच गई है। आर्मी सुरक्षा एजेंसी से मिले खुफिया इनपुट के बाद शुरू हुई जांच में लगातार नए तथ्य सामने आने पर अधिकारियों ने मामले की जांच एसओजी को सौंप दी है। अब एसओजी पूरे नेटवर्क, संदिग्धों के संपर्कों और अंतरराज्यीय कड़ियों की नए सिरे से जांच कर रही है।

    सूत्रों के अनुसार आर्मी सुरक्षा एजेंसी को अपने स्तर पर सूचना मिली थी कि सीमा से सटे अरनिया क्षेत्र में जाली भारतीय करेंसी से जुड़ा नेटवर्क सक्रिय हो सकता है। इस इनपुट को जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ साझा किया गया। शुरुआती स्तर पर अरनिया पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुछ लोगों से पूछताछ की, लेकिन बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एसओजी को सौंप दी गई।

    सूत्र बताते हैं कि एसओजी ने जांच संभालने के बाद सबसे पहले विलियम खोखर से विस्तृत पूछताछ की। इसके बाद अन्य संदिग्धों से भी पूछताछ का सिलसिला शुरू हुआ। इसी दौरान पिंडी चरकां खुर्द निवासी रघुवीर सिंह ने निवेश के नाम पर 6.50 लाख रुपये की कथित ठगी की शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर थाना अरनिया में चार लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

    नेटवर्क से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही

    जांच एजेंसियों के अनुसार अब केवल धोखाधड़ी ही नहीं, बल्कि जाली करेंसी नेटवर्क से जुड़े हर पहलू की पड़ताल की जा रही है। सूत्रों का कहना है कि जांच के दौरान संदिग्धों के मोबाइल फोन और कॉल डिटेल रिकॉर्ड (सीडीआर) भी खंगाले जा रहे हैं। प्रारंभिक तकनीकी जांच में जम्मू-कश्मीर के विभिन्न क्षेत्रों के अलावा दिल्ली, बिहार, भिवाड़ी और अन्य राज्यों में संपर्क होने के संकेत मिले हैं।

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    हालांकि इन संपर्कों की प्रकृति की अभी जांच की जा रही है। एसओजी की जांच का केंद्र अब मुख्य आरोपी बताए जा रहे तरसेम और उसके साथियों रवि तथा संजीव हैं, जो अभी भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर बताए जा रहे हैं। जांच एजेंसियों का मानना है कि इनकी गिरफ्तारी के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि जाली करेंसी का स्रोत क्या था, इसका नेटवर्क कितना बड़ा है और इसमें कितने लोग शामिल हैं।

    सूत्रों के अनुसार एसओजी इस पूरे मामले को केवल स्थानीय स्तर की धोखाधड़ी नहीं, बल्कि संभावित अंतरराज्यीय नेटवर्क के दृष्टिकोण से भी देख रही है। आने वाले दिनों में जांच में और खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है।