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    7 दिन वेंटिलेटर पर, फिर हुआ चमत्कार, एक अनजान महिला के दान ने बचा ली श्रीनगर की निगत की जान

    By Rohit Jandiyal Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Tue, 04 Aug 2026 07:05 AM (IST)

    श्रीनगर की निगत नसरीन को गंभीर लिवर फेल्योर के बाद एक अज्ञात महिला के अंगदान से नया जीवन मिला। सात दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद सफल लिवर प्रत्यारोपण ह ...और पढ़ें

    अंगदान से मिला जीवन, श्रीनगर की निगत नसरीन की संघर्ष और जीत की कहानी।

    अंगदान से मिला जीवन, श्रीनगर की निगत नसरीन की संघर्ष और जीत की कहानी

    HighLights

    1. श्रीनगर की निगत नसरीन को गंभीर लिवर फेल्योर का सामना करना पड़ा।

    2. एक अज्ञात महिला के अंगदान से उन्हें नया जीवन मिला।

    3. केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने निगत को उनके संघर्ष के लिए सम्मानित किया।

    रोहित जंडियाल, जम्मू। कहते हैं कि अगर आप पर भगवान मेहरबान है तो कुदरत भी आपका साथ देती है।ऐसा ही कुछ श्रीनगर की रहने वाली निगत नसरीन के साथ हुआ।लीवर फेल्योर के कारण जिंदगी बचाने के लिए उसे वेंटीलेटर रखा गया था।

    जिस दिन उसे वेंटीलेटर से हटाना था, उसी दिन एक सड़क हादसे में जान गंवाने वाली एक महिला के स्वजनों ने उसके अंगदान कर दिए और किस्मत से उसका लीवर निगत को प्रत्यरोपण कर दिया गया। आज संघर्ष के बाद फिर से दूसरी जिंदगी जी रही निगत को केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल ने सम्मानित भी किया।

    यह बात जून 2022 की है। वह अचानक गंभीर रूप से बीमार पड़ गईं। 3 जून को उन्हें सबसे पहले स्किम्स अस्पताल सौरा में भर्ती कराया गया। स्वास्थ्य में सुधार न होने पर उन्होंने श्रीनगर के एक निजी अस्पताल में इलाज कराया, जहां शुरुआती जांच सामान्य आईं। लेकिन बाद में हुए मेडिकल परीक्षणों में उनके एसजीओटी सहित लीवर एंजाइम का स्तर 5000 से अधिक पाया गया, जिससे उनकी स्थिति बेहद गंभीर हो गई।

    उसे श्रीनगर के सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल रेफर कर दिया जहां पता चला कि वह एक्यूट लिवर फेल्योर से पीड़ित हैं। लीवर के काम करना बंद करने से उनकी हालत तेजी से बिगड़ने लगी। अगले ही दिन उन्हें एयरलिफ्ट कर नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट आफ लिवर एंड बाइलियरी साइंसेज ले जाया गया।विशेषज्ञ डाक्टरों ने विस्तृत जांच के बाद बताया कि उनकी जान बचाने का एकमात्र विकल्प तत्काल लीवर ट्रांसप्लांट है।

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    अस्पताल ने मामले को नेशनल आर्गन और टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गनाइजेशन के पास सुपर अर्जेंसी श्रेणी में भेजा।उसकी जिंदगी बचाने के लिए सात दिनों के लिए उसे डाक्टरों ने वेंटीलेटर पर रख दिया। जिस दिन डाक्टर उनका वेंटिलेटर हटाने की तैयारी कर रहे थे, उसी दिन उन्हें मृत दाता लीवर उपलब्ध हुआ और सफलतापूर्वक प्रत्यारोपण किया गया।

    निगहत नसरीन को नया जीवन मिला

    सफल सर्जरी के बाद निगहत नसरीन को नया जीवन मिला। उन्होंने अपनी इस दूसरी जिंदगी का श्रेय ईश्वर, अंगदाता, डाक्टरों, नर्सिंग स्टाफ और अपने परिवार को दिया। उन्होंने बताया कि ट्रांसप्लांट के बाद नियमित दवाइयों, संतुलित आहार और समय-समय पर चिकित्सा जांच के जरिए उन्होंने धीरे-धीरे स्वास्थ्य लाभ किया।वह 71 दिनों तक इसी अस्पताल में रही।

    निगहत नसरीन ने कहा कि इस कठिन दौर में परिवार, मित्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग ने उन्हें हर चुनौती से लड़ने की ताकत दी। उनका मानना है कि लीवर ट्रांसप्लांट ने उन्हें जीवन का महत्व समझाया और हर पल को सकारात्मक सोच के साथ जीने की प्रेरणा दी।निगम शेर-ए-कश्मीर इंस्टीटयूट आफ मेडिकल सांइसेस में डायटीशियन के पद पर काम कर रही हैं।

    सोमवार को राष्ट्रीय अंगदाता दिवस पर नई दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री अनुप्रिया पटेल ने निगत को उनके इस संघर्ष के लिए सम्मानित किया।उन्हें पुरस्कार डायरेक्टर जनरल आफ हेल्थ सर्विसेज डा. डा. लोवनीश गोपाल कृष्ण और नोटा के डायरेक्टर डा. अनिल कुमार ने दिया।स्टेट आर्गन और टिश्यू ट्रांसप्लांट आर्गेनाइजेशन ने भी निगत परवीन को सम्मान मिलने पर बधाई दी।

    राज्य सरकार के रवैये से पिता नाराज

    निगत के पिता अहमद अली फियाज का कहना है कि उनकी बेटी जब जिंदगी और मौत के बीच जूझ रही थी तो वह स्किम्स में सरकारी नौकरी कर रही थी और नियमों के अनुसार उसके इलाज पर आने वाले खर्च को सरकार पचास प्रतिशत एडवांस में देती है और शेष इलाज के बाद। लेकिन स्किम्स प्रशासन ने इलाज पर आने वाले खर्च को देने से ही मना कर दिया।

    उनका कहना था कि सरकार द्वारा अधिसूचित अस्पतालों में नहीं हो रहा जबकि वह दिल्ली के सरकारी अस्पताल में रेफर होकर गए थे। बाद में उच्च न्यायालय में उन्हें दस्तक देनी पड़ी। उच्च न्यायालय के निर्देशों पर पचास प्रतिशत भुगतान हुआ। अभी तक मामला कोर्ट में चल रहा है। उनका कहना है कि उनकी बेटी का बचना कुदरत के किसी करिश्मे से कम नहीं था।लेकिन सरकार ने इसमें कोई सहायता नहीं की।