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    मजबूत कंधे, बुलंद हौसले और भक्तों की सेवा... गुड़-चना खाकर अमरनाथ यात्रियों को मंजिल तक पहुंचा रहे पालकी वाले

    Updated: Sun, 05 Jul 2026 08:23 PM (IST)

    बाबा अमरनाथ यात्रा हजारों युवाओं के लिए रोजगार का एक महत्वपूर्ण साधन है, जहां वे दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पालकी उठाकर श्रद्धालुओं की सेवा करते हैं। ...और पढ़ें

    अमरनाथ यात्रियों को मंजिल तक पहुंचा रहे पालकी वाले। फाइल फोटो

    अमरनाथ यात्रियों को मंजिल तक पहुंचा रहे पालकी वाले। फाइल फोटो

    HighLights

    1. अमरनाथ यात्रा हजारों युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा साधन।

    2. दुर्गम पहाड़ी रास्तों पर पालकी उठाकर करते हैं श्रद्धालुओं की सेवा।

    3. कठिन परिस्थितियों में भी प्रतिदिन 2000-2500 रुपये की कमाई।

    रोहित जंडियाल, बालटाल। बाबा अमरनाथ की यात्रा सिर्फ आस्था का प्रतीक ही नहीं है बल्कि हजारों लोगों के लिए रोजगार का साधन भी है। दुर्गम व पहाड़ी मार्ग पर कच्ची-पक्की सड़क पर अपने मजबूत कंधों व बुलंद हौंसलों के साथ सैकड़ों युवा यहां पालकी उठाने का काम भी करते हैं।

    सुबह सूरज की पहली किरण से पहले और रात को कई बार एक बजे तक रोजी-रोटी के लिए यह युवा यहां श्रद्धालुओं को पालकी में बिठाकर दर्शन करवाने के लिए ले जाते हैं। कई बार तो उन्हें सिर्फ गुड़-चने खाकर ही पूरा दिन गुजारना पड़ता है।

    यात्रा के दोनों मार्ग पहलगाम और बालटाल में कई जिलों से सैकड़ों युवाओं ने यहां पर पालकी उठाने के लिए अपना पंजीकरण करवाया है। इनमें से बहुत से युवा उधमपुर जिले के विभिन्न पहाड़ी मार्गों से भी आए हैं।इनमें से कई युवा पहले केदारनाथ धाम में पालकी उठाने का काम कर रहे थे। अब अमरनाथ यात्रा में पालकी उठाने का काम कर रहे हैं।

    यात्रा रोजगार का बड़ा साधन

    उधमपुर जिले के पंचैरी से बालटाल में पहुंचे राजिंद्र सिंह ने बताया कि वह दो वर्ष पहले भी यहां पर पालकी उठाने के लिए आया था। उनका पूरा ग्रुप ही यहां पर यह काम करने के लिए आता है। यात्रा उनके लिए रोजगार का एक बड़ा साधन है।

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    चार लोग हम एक पालकी उठाते हैं। पहले रास्ता पूरा कच्चा था तो पालकी उठाने में समस्याएं आती थीं। अब रास्ते में काफी सुधार आ गया है। बहुत सा मार्ग पक्का बन गया है। कई बार श्रद्धालुओं को सांस लेने में दिक्कत होती है तो बीच-बीच में रक जाते हैं।

    वहीं यात्रा में पहली बार पालकी उठाने का काम कर रहे पंचैरी के ही सुखविंद्र सिंह का कहना है कि उनके साथी यहां पर आ रहे थे, वे भी आ गए। कोई काम नहीं था तो सोचा कि यात्रा में कुछ कमा लिया जाए। यही सोच कर यहां पर आया हूं।

    रात को खाना भी नहीं मिलता

    उनका कहना है कि पालकी उठाने का काम जोखिम भरा जरूर है लेकिन वे सभी पहाड़ी क्षेत्र से आते हैं। ऐसे में पहाड़ों पर चलने में ज्यादा परेशानी नहीं आती है। मगर यात्री की सुरक्षा उनका दायित्व है। ऐसे में पालकी उठाते समय यात्री की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखा जाता है।

    उधमपुर के पंचैरी क्षेत्र से कई युवा यहां बालटाल क्षेत्र में पालकी उठाने का काम कर रहे हैं। उनका कहना है कि दिन में दो हजार से ढाई हजार रुपये कमा लेते हैं लेकिन कई बार रात के समय आधार शिविर में देरी से पहुंचने के कारण रात को खाना भी नहीं मिल पाता है।

    वह अपने साथ भिगोए हुए चने और गुड़ रखते हैं और रास्ते में गुड-चने खाकर और पानी पीकर ही गुजारा करते हैं।जब यह यात्रा समाप्त हो जाएगी तो कटड़ा में चले जाएंगे या फिर अन्य किसी स्थान पर दिहाड़ी लगाएंगे। उनका कहना है कि यह यात्राएं हमारे लिए रोजगार का एक बड़ा साधन हैं।