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    लद्दाख से Good News! नुब्रा घाटी में 20% बढ़ी याकों की संख्या, अब संरक्षण और आजीविका दोनों को मिलेगा नया सहारा

    By Vivek Singh Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Thu, 30 Jul 2026 01:15 PM (GMT+05:30)

    लद्दाख की नुब्रा घाटी में याकों की संख्या में 20% की वृद्धि दर्ज की गई है, जो पर्यावरण, स्थानीय आजीविका और सांस्कृतिक विरासत के लिए बेहद सकारात्मक है। ...और पढ़ें

    लद्दाख की नुब्रा घाटी में याकों की संख्या में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी।

    लद्दाख की नुब्रा घाटी में याकों की संख्या में 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी

    HighLights

    1. नुब्रा घाटी में याकों की संख्या में 20% वृद्धि।

    2. स्थानीय आजीविका और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगा सहारा।

    3. आधुनिक याक पालन तकनीक और टीकाकरण पर जोर।

    राज्य ब्यूरो, जम्मू। लद्दाख की पहचान माने जाने वाले याक को लेकर चली आ रही चिंता अब समाप्त होने को है। राहत भरी खबर आ रही है। केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख की नुब्रा घाटी में याकों की संख्या में करीब 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसे न सिर्फ पर्यावरण बल्कि स्थानीय लोगों की आजीविका और सांस्कृतिक विरासत के लिए भी बेहद सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

    याक लद्दाख और तिब्बत के ऊंचाई वाले इलाकों में पाया जाने वाला मजबूत मवेशी है। लंबे और घने बाल इसे कड़ाके की ठंड से बचाते हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में किसान खेती, सामान ढोने और दूध समेत डेयरी उत्पादों के लिए इसी पर निर्भर रहते हैं। यही वजह है कि याक को लद्दाख की पहचान और संस्कृति का अहम हिस्सा माना जाता है।

    किसानों को सिखाई गई आधुनिक याक पालन तकनीक

    नुब्रा के डिप्टी कमिश्नर मुकुल बेनीवाल ने कहा कि याक सिर्फ एक पशु नहीं, बल्कि इस क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान है। उन्होंने बताया कि प्रशासन याक पालन को बढ़ावा देने, याक की ऊन के लिए बेहतर बाजार उपलब्ध कराने और याक आधारित उत्पादों को नई पहचान दिलाने के लिए लगातार काम कर रहा है।

    नुब्रा स्थित याक प्रजनन केंद्र में याक पालकों के लिए जागरूकता और तकनीकी प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान वैज्ञानिकों ने आधुनिक याक पालन, बेहतर प्रजनन और संरक्षण के तरीकों की जानकारी दी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. मुख्तार हुसैन ने याकों को बीमारियों से बचाने के लिए नियमित टीकाकरण पर विशेष जोर दिया।

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    सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए टैगिंग जरूरी

    ब्लरक के पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ. मोटुप आंगमो ने बताया कि सभी याकों का पंजीकरण और टैगिंग जरूरी है। इससे पशुपालकों को विभिन्न सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ मिल सकेगा और याकों का बेहतर रिकॉर्ड भी तैयार होगा।

    इस कार्यक्रम में नुब्रा के अलग-अलग गांवों से 135 से अधिक याक पालकों ने हिस्सा लिया। अनुसूचित जनजाति घटक योजना के तहत पशुपालकों को 200 पशु चारा बैग, 100 तिरपाल, 100 सोलर लाइटें, खनिज मिश्रण और पशु चिकित्सा दवाइयां भी वितरित की गईं।

    नुब्रा घाटी में याकों की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि संरक्षण और प्रजनन के लिए किए जा रहे प्रयास असर दिखा रहे हैं। इससे आने वाले समय में न केवल स्थानीय लोगों की आजीविका मजबूत होगी, बल्कि लद्दाख की पारंपरिक याक संस्कृति और विरासत को भी नई मजबूती मिलेगी।