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    आतंकियों का सबसे बड़ा पनाहगार हाजी लतीफ, 36 से ज्यादा दहशतगर्दों को दिया ठिकाना; 12 आतंकी हमलों में की मदद

    Updated: Wed, 01 Jul 2026 12:03 PM (IST)

    पुलिस ने श्री अमरनाथ यात्रा से पहले कठुआ में 65 वर्षीय हाजी लतीफ को गिरफ्तार किया है, जो 36 से अधिक आतंकियों का पनाहगार रहा है। ...और पढ़ें

    आतंकियों का सबसे बड़ा पनाहगार हाजी लतीफ अरेस्ट (फाइल फोटो)

    आतंकियों का सबसे बड़ा पनाहगार हाजी लतीफ अरेस्ट (फाइल फोटो)


    HighLights

    1. हाजी लतीफ 36 से अधिक आतंकियों का पनाहगार था

    2. उसने 12 आतंकी हमलों और मुठभेड़ों में मदद की

    3. आतंकियों को मोबाइल, खाना, हथियार और गाइडेंस मुहैया कराता था

    अजय मीनिया, कठुआ। श्री अमरनाथ यात्रा से ठीक पहले पुलिस ने बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए आतंकियों के एक कुख्यात मददगार को गिरफ्तार किया है।

    सूत्रों के अनुसार, 65 वर्षीय हाजी लतीफ अब तक 36 से अधिक आतंकियों को शरण दे चुका है। हाजी वर्ष 2021 से आतंकियों की मदद कर रहा है।

    उसने पिछले पांच वर्ष में कठुआ, उधमपुर, किश्तवाड़ और डोडा में हुई लगभग 12 मुठभेड़ और हमलों में आतंकियों की मदद की। सीमा पार से घुसपैठ कर आने वाले जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों का वह सबसे बड़ा पनाहगार था।

    आतंकियों की हर तरह से की मदद

    वह आतंकियों के लिए मोबाइल फोन, खाने, उनको लक्ष्य तक पहुंचने और हथियार तक पहुंचाने में मदद करता था। इसके लिए उसे पाकिस्तान से आतंकी संगठन पैसा देते थे। हाजी लतीफ कठुआ जिला के सुफैन का रहने वाला है।

    इस समय बिलावर क्षेत्र में रह रहा था। मंगलवार पुलिस ने एक पुख्ता सूचना पर उसे दबोच लिया। हाजी की गिरफ्तारी 23 जनवरी, 2026 को बिलावर में मारे गए जैश कमांडर उस्मान के संदर्भ में की गई है। उस्मान को लगातार 17 दिन तक चले आपरेशन में मार गिराया गया था। हाजी ने उस्मान को शरण दे रखी थी।

    पत्नी और बेटे को भी किया गया अरेस्ट

    सूत्रों के अनुसार, हाजी की पत्नी और बेटा मार्च 2025 में कठुआ के ही सुफैन में मारे गए दो आतंकियों के संदर्भ में पहले से गिरफ्तार हैं। उन दोनों ने भी आतंकियों की मदद की थी। इन आतंकियों से मुठभेड़ में चार पुलिसकर्मी भी बलिदान हो गए थे। फिलहाल, हाजी की गिरफ्तारी को लेकर अभी पुलिस ने कोई आधिकारिक बयान नहीं दिया है।

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    मोबइल से लेकर खाना पहुंचने के साथ गाइड की तरह करता था मदद

    सूत्रों के अनुसार, हाजी आतंकियों की मदद करने के लिए स्थानीय लोगों को पैसे देकर कुछ देर के लिए मोबाइल लेता था। आतंकियों द्वारा मोबाइल पर इंटरनेट के जरिए अपने आकाओं से बात कराने के बाद फोन वापस लेकर दे देता था।

    इसी तरह किसी को पांच सौ, किसी को एक हजार रुपये देकर खाना लेकर आतंकियों तक पहुंचाता था। इसके अलावा आतंकियों का गाइड बनकर उन्हें एक से दूसरी जगह भी ले जाता था।

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