90% मुस्लिम आबादी और शिव भक्ति का यह अनोखा संगम! जानिए क्यों पुंछ के लिए खास है 'बूढ़ा अमरनाथ' यात्रा
पुंछ में बूढ़ा अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। इस यात्रा का महत्व न केवल हिंदुओं के लिए है, बल्कि ...और पढ़ें

बाबा बूढ़ा अमरनाथ धाम (जागरण ग्राफिक्स)
HighLights
भगवान शिव ने बुजुर्ग के रूप में एक महिला को दर्शन दिए थे।
यह यात्रा पुंछ की अर्थव्यवस्था और सांप्रदायिक सौहार्द बढ़ाती है।
बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का संचालन 28 अगस्त तक किया जाएगा।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। अमरनाथ यात्रा के बाद अब जम्मू-कश्मीर में बूढ़ा अमरनाथ यात्रा शुरू हो चुकी है। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को श्रद्धालुओं के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। जहां एक ओर श्रद्धालुओं को साल भर इस यात्रा का इंतजार रहता है। वहीं, स्थानीय लोग भी इस यात्रा का बेसब्री से इंतजार करते हैं।
इन दिनों पुंछ के बाजारों में रौनक छा जाती है। मंदिर सजने लगते हैं और हर तरफ माहौल भक्तिमय हो जाता है। स्थानीय लोग महादेव के भक्तों की सेवा में जुड़ जाते हैं। इस तरह यह धार्मिक यात्रा न केवल धर्म से जुड़ी है। बल्कि इसका आपसी सहयोग,-सौहार्द के साथ-साथ जिले की अर्थव्यवस्था दुरुस्त करने में भी खासा योगदान है।

क्या है बूढ़ा अमरनाथ यात्रा?
श्रावण माह में जम्मू-कश्मीर के पुंछ जिले के मंडी तहसील के राजपुरा गांव में प्रत्येक वर्ष यात्रा शुरू होती है। रक्षाबंधन के 10 दिन पहले इस यात्रा की शुरुआत की जाती है।
बूढ़ा शब्द का अर्थ: 'बूढ़ा' शब्द का मतलब भगवान शिव के एक वृद्ध (बुजुर्ग) महात्मा या साधु के रूप से है। पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने एक रानी को कलयुग में बूढ़े साधु के रूप में दर्शन दिए थे, जिसके बाद इस पवित्र स्थान का नाम बूढ़ा अमरनाथ यात्रा पड़ा। एक मान्यता है कि भगवान शिव ने मां पार्वती को अमर कथा सुनाने की शुरुआत यहीं से की थी, जो बाद में अमरनाथ गुफा में पूरी हुई थी।

यात्रा कब से कब तक?
यह यात्रा पारंपरिक रूप से हर साल जुलाई-अगस्त (श्रवण मास) के दौरान आयोजित की जाती है। 12 दिवसीय यह यात्रा आज यानी 17 अगस्त से शुरू हो गई है और 28 अगस्त तक चलेगी। रक्षाबंधन के दिन इसका समापन होगा।
कहां आयोजित होती है यात्रा?
बूढ़ा अमरनाथ बाबा का यह मंदिर जम्मू संभाग के पुंछ जिले के मंडी तहसील के राजपुरा गांव में मौजूद है। यह जम्मू से 244 किलोमीटर और पुंछ शहर से इसकी दूरी लगभग 25 किलोमीटर है।

कैसे पहुंचें बूढ़ा अमरनाथ धाम?
जम्मू से बस सेवा के अतिरिक्त छोटे यात्रा वाहनों या फिर अपने वाहन से भी पहुंचा जा सकता है। इस यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं को बिल्कुल भी चलना नहीं पड़ता है। यदि आप बाहर के राज्यों से दर्शन के लिए आ रहे हैं तो जम्मू एयरपोर्ट या जम्मू तवी रेलवे स्टेशन उतरना होगा।
खास बात है कि मंदिर के बाहर वाहन खड़ा कर श्रद्धालु बाबा बुड्ढा अमरनाथ जी के दर्शन कर सकते हैं। यह मंदिर पीर पंजाल पर्वत माला की मुख्य शृंखला में मौजूद है।
यात्रा का संचालन कौन करता है?
बाबा बूढ़ा अमरनाथ यात्रा का मुख्य संचालन और प्रबंधन विश्व हिंदू परिषद (VHP), बजरंग दल और बाबा अमरनाथ एवं बुड्ढा अमरनाथ यात्री ट्र्स्ट द्वारा किया जाता है
पुंछ के लोगों को फायदा?
पुंछ जिले में 90 फीसदी आबादी मुसलमानों की है। हर वर्ष यहां के लोगों को इस यात्रा का इंतजार रहता है। बूढ़ा अमरनाथ यात्रा पुंछ की अर्थव्यवस्था के लिए एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा करती है।
जिले के स्थानीय व्यापार, होटल, परिवहन और हस्तशिल्प को बढ़ावा मिलता है। दूसरी तरफ हजारों कश्मीरियों और पहाड़ी क्षेत्रों के निवासियों के लिए आजीविका का यह यात्रा प्रमुख साधन है। बॉर्डर पर जिला होने के कारण यहां के लोगों की आजीविका पर्यटन और इस धार्मिक यात्रा पर ही टिकी है।
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।