रात 1 बजे बारिश, 3 बजे तबाही, जब कुछ ही घंटों में सैलाब में डूब गया पूरा राजौरी; भयावह रात की आंखों देखी कहानी
राजौरी में शनिवार रात मूसलाधार बारिश के बाद अचानक आई बाढ़ ने पूरे शहर में तबाही मचा दी, जिससे सड़कें नदियों में बदल गईं और लाखों का सामान बह गया। ...और पढ़ें

राजौरी में मूसलाधार बारिश से आई भयावह बाढ़ की रात, एक बजे बारिश तीन बजे तबाही।
HighLights
राजौरी में मूसलाधार बारिश से अचानक आई भीषण बाढ़।
रात 1 बजे बारिश तेज, 3 बजे शहर में घुसा पानी।
वाहन बहे, दुकानें डूबीं, लाखों का सामान तबाह।
जागरण संवाददाता, राजौरी। शनिवार की रात राजौरी के लोगों के लिए किसी डरावने सपने से कम नहीं थी। वो रात जो सामान्य बारिश से शुरू हुई थी, देखते ही देखते पूरे शहर के लिए जिंदगी भर ना भूलने वाला खौफ बन गई। शाम से ही मौसम खराब था, रुक-रुक कर हल्की बारिश हो रही थी। किसी को अंदाजा भी नहीं था कि ये हल्की फुहारें कुछ ही घंटों में सैलाब बनकर सब कुछ बहा ले जाएंगी।
रात करीब 1 बजे अचानक बारिश की रफ्तार तेज हो गई। मूसलधार बारिश ऐसी शुरू हुई कि थमने का नाम ही नहीं लिया।लगातार बारिश से शहर से गुजरने वाले नदी-नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा। 2 बजते-बजते कई नाले उफान पर आ चुके थे और पानी निचले इलाकों की तरफ रुख करने लगा।
रात 3 बजे- चारों तरफ सिर्फ पानी ही पानी
और फिर 3 बजते-बजते वो हुआ जिसका डर था। पानी शहर के कई मोहल्लों, बाजारों, घरों और दुकानों में घुस गया। जब तक लोग कुछ समझ पाते, कई जगहों पर पानी कमर तक पहुंच चुका था। सड़कों पर खड़े वाहन खिलौनों की तरह तेज बहाव में बहने लगे। दुकानों में रखा लाखों का सामान पल भर में पानी में डूब गया।
रात के अंधेरे में अफरा-तफरी मच गई। लोग एक-दूसरे को फोन कर बाढ़ की जानकारी देने लगे। कई परिवार रिश्तेदारों से संपर्क कर सुरक्षित जगह पर जाने की कोशिश करते रहे। कोई अपने घर की ऊपरी मंजिल पर जान बचाने के लिए चढ़ गया, तो कई परिवार पड़ोसियों की मदद से किसी तरह सुरक्षित स्थान तक पहुंचे।
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आंखों देखी कहानी- सड़क नदी बन गई थी
अब्दुल्ला पुल के पास रहने वाले राजेश गुप्ता ने उस भयावह रात को याद करते हुए बताया, "रात को जैसे ही पानी का बहाव तेज हुआ, हम लोग अपने घरों से निकलकर सुरक्षित स्थान की ओर जाने लगे। लेकिन पानी इतना ज्यादा था कि कहीं जाना ही संभव नहीं था। चारों तरफ पानी ही पानी था। हम घर के अंदर ही फंस गए थे। सुबह करीब पांच बजे जब पानी कम हुआ, तब हम बाहर निकल पाए।"
वहीं इसी क्षेत्र के मोहित गुप्ता ने अपनी आंखों के सामने तबाही देखी। उन्होंने कहा, "करीब साढ़े तीन बजे मेरी आंखों के सामने ही मेरी बाइक पानी के तेज बहाव में बह गई। कुछ ही मिनटों में सड़क नदी जैसी बन गई थी। लोग अपने वाहनों और सामान को बचाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन तेज बहाव के सामने कोई कुछ नहीं कर सका।"
रात 4 बजे- प्रशासन ने संभाला मोर्चा
करीब 4 बजे प्रशासन, पुलिस, एसडीआरएफ और अन्य राहत एजेंसियों ने बचाव अभियान शुरू किया। लेकिन तेज बहाव और लगातार बारिश ने राहत कार्य में बड़ी बाधा डाली। कई इलाकों में सड़कें पानी में डूबी होने के कारण बचाव दल तुरंत नहीं पहुंच पाए।
सुबह 5 बजे- बारिश थमी तो दिखा तबाही का मंजर
सुबह 5 बजे के आसपास जाकर कहीं बारिश की तीव्रता कम हुई और नदी-नालों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा। पानी कम होते ही लोग घरों से बाहर निकले और राहत कर्मियों के साथ बचाव कार्य में जुट गए। कई जगहों पर लोगों ने खुद ही मलबा हटाना शुरू किया और फंसे हुए लोगों को बाहर निकाला।
सुबह होते ही तबाही का असली मंजर सामने आया। सड़कों पर कीचड़ और मलबे के ढेर, जगह-जगह क्षतिग्रस्त वाहन और दुकानों के बाहर नुकसान का आकलन करते लोग। स्थानीय लोगों के मुताबिक, इस बाढ़ ने कुछ ही घंटों में वर्षों की मेहनत और जीवनभर की कमाई तबाह कर दी। घरों का फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक सामान, जरूरी दस्तावेज और दुकानों का सामान या तो बह गया या पूरी तरह खराब हो गया। कई परिवारों ने रातभर बिना बिजली और मोबाइल नेटवर्क के काटी।
फिलहाल प्रशासन, पुलिस, भारतीय सेना, एसडीआरएफ और स्थानीय स्वयंसेवकों ने संयुक्त रूप से राहत और सफाई अभियान शुरू कर दिया है। राजौरी के लोगों का कहना है कि उन्होंने वर्षों बाद इतनी भयावह बाढ़ देखी है, जहां कुछ ही घंटों में हालात सामान्य से आपदा में बदल गए। अब सबकी एक ही चिंता है - अपने घरों और कारोबार को दोबारा कैसे खड़ा किया जाए। प्रभावित परिवारों को उम्मीद है कि उन्हें जल्द सरकारी सहायता मिलेगी और शहर फिर से सामान्य जीवन की ओर लौट सकेगा।