Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    बड़ी चेतावनी! कश्मीर की मिट्टी में मिले खतरनाक टॉक्सिन्स, कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा, रिसर्च में खुलासा

    Updated: Fri, 07 Aug 2026 03:57 PM (IST)

    कश्मीर की मिट्टी में जहरीले तत्वों की अधिकता और आवश्यक पोषक तत्वों की कमी पाई गई है, जिससे खाद्य सुरक्षा और जन-स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा है। एक शोध के अ ...और पढ़ें

    कश्मीर की मिट्टी में जहरीले तत्व मिले हैं (फाइलफोटा)

    कश्मीर की मिट्टी में जहरीले तत्व मिले हैं (फाइलफोटा)

    HighLights

    1. कश्मीर की मिट्टी में जहरीले तत्व और पोषक तत्वों की कमी।

    2. मानवीय गतिविधियां मिट्टी प्रदूषण का मुख्य कारण बनीं।

    3. कैंसर सहित कई गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ा।

    जागरण संवाददाता,श्रीनगर। मौसम की अनिशिच्ताओं के चलते जहां घाटी के पर्यावरण विशेषज्ञ और लोग चिंतित हैं, वहीं वैज्ञानिकों का कहना है कि घाटी की कृषि योग्य जमीन भी बीमार है। इस में पोषक तत्वों और अन्य आवश्यक कणों की कमी है जबकि अधिक मात्रा जहरीली दातु घुले हैं, जिसका खाद्य सुरक्षा, खेती की पैदावार, पशुओं की सेहत और जन-स्वास्थ्य पर घातक प्रभाव पड़ सकता है।

    नेचर पोर्टफोलियो' के पीयर-रिव्यू जर्नल ''साइंटिफिक रिपोर्ट्स'' में छपी और जियोलाजिकल सर्वे आफ़ इंडिया के वैज्ञानिक इशफ़ाक अहमद मीर की अगुवाई में हुए इस शोध में बांडीपोरा और गांदरबल ज़िलों के लगभग 800 वर्ग किलोमीटर इलाके से मिट्टी की ऊपरी परत के 200 सैंपल का विश्लेषण किया गया। इन इलाकों में धान के खेत, सेब के बाग, चरागाह और जंगल के किनारे वाले इलाके शामिल थे। शोध से प्राप्त नतीजे ने इन इलाकों की चिंताजनक तस्वीर पेश की है।

     

    जीवन के लिए जरूरी जिंक और कॉपर गायब

     

    शोष के अनुसार इन इलाकों की मिट्टी में प्राकृतिक रूप से आयरन तो भरपूर मात्रा में है। वहीं शोधकर्ताओं को आर्सेनिक, क्रोमियम, निकेल और वैनेडियम की मात्रा खतरनाक रूप से ज़्यादा मिली। शोध वाले इलाके के बड़े हिस्सों में इनका प्रदूषण स्तर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्वीकार्य सीमा से अधिक पाया गया। साथ ही, कई जगहों पर कापर, निकल और जिंक की कमी पाई गई ये सूक्ष्म पोषक तत्व फसल की बढ़त, पशुओं के विकास और इंसानी पोषण के लिए ज़रूरी हैं।

    फूड चेन तक पहुंच रहा जहर

    शोध में कहा गया है कि 93 प्रतिशत सैंपल में आर्सेनिक, 88 प्रतिशत में क्रोमियम, 81 प्रतिशत में वैनेडियम और 17 प्रतिशत में निकेल की मात्रा ज़हरीलेपन की सीमा से ज़्यादा थी। शोध के लिए लिए गए लगभग एक-तिहाई सैंपल में कोबाल्ट की मात्रा भी बढ़ी हुई पाई गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि ज़हरीले प्रदूषण और पोषक तत्वों की कमी का यह मेल इसलिए ज़्यादा चिंताजनक है क्योंकि इससे न सिर्फ़ मिट्टी की उपजाऊ क्षमता और फसल की पैदावार कम होती है, बल्कि फसलों द्वारा हानिकारक धातुओं को सोखने और उनके खाद्य श्रृंखला (फूड चेन) में शामिल होने की संभावना भी बढ़ जाती है।

    खबरें और भी

    रिसर्च के चौंकाने वाले आंकड़े

    विश्लेषण में आयरन की औसत मात्रा 44,759 एमजी/केजी, क्रोमियम 120 एमजी-केजी, वैनेडियम 114 एमजी-केजी, जिंक 89 एमजी-केजी, निकेल 44 एमजी/केजी, कापर 33 एमजी-केजी, लेड 23 एमजी/केजी, कोबाल्ट 19 एमजी/केजी और आर्सेनिक 11 एमजी/केजी दर्ज की गई। हालांकि लेड और जिंक आम तौर पर तय सीमा के अंदर ही रहे, लेकिन स्टडी में पाया गया कि लगभग 8 प्रतिशत सैंपल में जिंक की कमी थी, जबकि कापर और निकेल की कमी 3-3 प्रतिशत सैंपल में पाई गई। ये माइक्रोन्यूट्रिएंट्स पौधों के मेटाबालिज्म, बीमारियों से लड़ने की क्षमता, अनाज बनने और पशुओं की सेहत के लिए बहुत ज़रूरी हैं।

    शोधकर्ताओं के अनुसार, कार्बोनेट चट्टानों पर बनी मिट्टी, खासकर गांदरबल ज़िले के कुछ हिस्सों में प्राकृतिक तौर पर कापर, निकल और जिंक की कमी वाली थी। इस वजह से, अगर इनमें सही न्यूट्रिएंट्स न मिलाए जाएं, तो इनकी पैदावार कम होती है। इसके उलट, बेसाल्ट से बनी मिट्टी में फायदेमंद माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की मात्रा ज़्यादा थी, लेकिन साथ ही इसमें ज़हरीले तत्वों का स्तर भी ज़्यादा पाया गया।

    मिट्टी की बर्बादी के गुनहगार हम खुद

    शोध में मिट्टी के दूषित होने की मुख्य वजह इंसानी गतिविधियों को बताया गया है। बागों और खेती वाली ज़मीनों में आर्सेनिक वाले कीटनाशकों और फास्फेट फर्टिलाइज़र का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल, गाड़ियों और खेती की मशीनों से निकलने वाला धुआं, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़ा निर्माण कार्य, फासिल फ्यूल का जलना और कचरे का ठीक से मैनेजमेंट न होना इन सभी वजहों से खतरनाक तत्वों की मात्रा बढ़ी है। ज़्यादा खेती वाले इलाकों में, जहां कीटनाशकों का बहुत ज़्यादा इस्तेमाल होता है, आर्सेनिक की मात्रा ज़्यादा पाई गई।

    आर्सेनिक बना सबसे बड़ा विलेन

    वहीं, किशनगंगा हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट के पास लेड का लेवल ज़्यादा मिला, जिससे निर्माण कार्य से होने वाले प्रदूषण का संकेत मिलता है। जिंक की ज़्यादा मात्रा का संबंध भी फर्टिलाइज़र और कीटनाशकों के इस्तेमाल वाली सघन खेती से पाया गया। प्रदूषण मापने के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने गए तरीकों का इस्तेमाल करके, रिसर्चर ने इस इलाके में आर्सेनिक को सबसे बड़ा प्रदूषक तत्व माना।

    एक इंटीग्रेटेड टाक्सिक रिस्क इंडेक्स से पता चला कि सैंपल ली गई जगहों में से सिर्फ़ लगभग पांच प्रतिशत जगहों पर ज़हरीले तत्वों का कोई खतरा नहीं था। लगभग 63.5 प्रतिशत जगहें कम जोखिम वाली श्रेणी में आईं, जबकि 31.5 प्रतिशत जगहों को मध्यम जोखिम वाली श्रेणी में रखा गया।

    कैंसर से लेकर हृदय रोग तक का खतरा

    प्रदूषण का सबसे ज्यादा स्तर कृषि क्षेत्रों, मानव बस्तियों और जलविद्युत परियोजना स्थलों के आसपास केंद्रित था, जबकि जंगलों, चरागाहों और बंजर भूमि में प्रदूषण का स्तर आमतौर पर कम दर्ज किया गया। बांडीपोरा, गांदरबल की तुलना में अधिक संवेदनशील पाया गया, विशेष रूप से इसके उत्तरी और पश्चिमी क्षेत्र। स्टडी से चेतावनी मिली है कि इन विषैले तत्वों के लंबे समय तक संपर्क में रहने से स्वास्थ्य पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं।

    शोध में कहा गया है, आर्सेनिक एक मान्यता प्राप्त मानव कैंसरकारक है जो कई प्रकार के कैंसर और अंग क्षति से जुड़ा है। अत्यधिक निकेल एलर्जी, श्वसन संबंधी बीमारियों और हृदय रोग को जन्म दे सकता है। वैनेडियम की उच्च सांद्रता पौधों की वृद्धि को बाधित कर सकती है और मनुष्यों में फेफड़े, तंत्रिका संबंधी और हृदय संबंधी विकारों से जुड़ी है।

     जैविक खेती से सुधर सकती है मिट्टी की सेहत

    शोधकर्ताओं का कहना है कि सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी पहले से ही छिपी हुई भूख का कारण बन रही है, जो एक वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती है और दो अरब से अधिक लोगों को प्रभावित कर रही है। इस प्रवृत्ति को पलटने के लिए, अध्ययन में कृत्रिम कृषि रसायनों पर निर्भरता कम करने और जैविक खाद, कम्पोस्ट, बायोचार, सूक्ष्म पोषक तत्वों से भरपूर उर्वरक, अंडे के छिलके का चूरा और अस्थि चूरा के माध्यम से टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की सिफारिश की गई है।

    इसमें मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने के लिए आवश्यक खनिजों के प्राकृतिक स्रोत के रूप में बारीक पिसी हुई बेसाल्ट चट्टान का उपयोग करने का भी सुझाव दिया गया है।