16 अगस्त से शुरू हो रही बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा, दर्शन के साथ इन जगहों का भी करें दीदार; कैसे पहुंचें और कहां ठहरें?
पुंछ जिले में बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा 16 अगस्त से शुरू होगी, जिसका पहला जत्था जम्मू से रवाना होगा। यह यात्रा अमरनाथ यात्रा के बाद महत्वपूर्ण मानी जा ...और पढ़ें

बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा की संपूर्ण जानकारी।
HighLights
यात्रा 16 अगस्त से पुंछ जिले में शुरू हो रही है।
अमरनाथ यात्रा के बिना बुड्ढा अमरनाथ दर्शन अधूरा।
सड़क मार्ग, आवास, सुरक्षा और पर्यटन स्थल उपलब्ध।
डिजिटल डेस्क, जम्मू। 3 जुलाई से बाबा अमरनाथ की यात्रा निरंतर जारी है। यह पवित्र यात्रा 28 अगस्त तक चलेगी। अमरनाथ यात्रा के बीच अब बाबा बुड्ढा अमरनाथ की यात्रा शुरू होने वाली है। जम्मू-कश्मीर के सीमावर्ती पुंछ जिले की हसीन वादियों में एक ऐसा तीर्थस्थल, जिसके बारे में बहुत कम सुनने को मिलता है, लेकिन इसकी मान्यता बहुत है।
बाबा बुड्ढा अमरनाथ मंदिर जो हर साल लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बनता है। यह यात्रा हर साल रक्षाबंधंन के करीब 10 दिन पहले शुरू होती है। बजरंग दल की यात्रा के मुताबिक, इस बार 16 अगस्त से शुरू हो रही है। इसका पहला जत्था जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास से रवाना होगा और 17 अगस्त को पुंछ के मंडी स्थित मंदिर में बाबा बुड्ढा अमरनाथ का दर्शन करेगा।
कहां स्थित है मंदिर और कैसे पहुंचे?
लोरान घाटी से घिरा बाबा बुड्ढा अमरनाथ मंदिर, सीमावर्ती पुंछ जिले में स्थित है। यह जम्मू से 290 किलोमीटर दूर पुलस्ती नदी के किनारे बसा है। मान्यता है कि बाबा बुड्ढा अमरनाथ के दर्शन के बिना अमरनाथ की यात्रा अधूरी मानी जाती है।
मुगल रोड से यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं को पीर पंजाल की हरी-भरी वादियां, घने जंगलों और बादलों से घिरी पहाड़ियां देखने को मिलेंगी। मंदिर पुंछ शहर से करीब 25 किलोमीटर दूर मंडी कस्बे में स्थित है। जम्मू से श्रद्धालु सरकारी और निजी बसों के अलावा टैक्सी, टेंपो ट्रैवलर या अपने निजी वाहन से भी आसानी से बाबा बुड्ढा अमरनाथ मंदिर पहुंच सकते हैं।
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यात्रा की खास बात यह है कि मंदिर तक सड़क मार्ग पूरी तरह उपलब्ध है, इसलिए श्रद्धालुओं को लंबी पैदल यात्रा नहीं करनी पड़ती है। मंदिर परिसर के बाहर वाहन पार्किंग की सुविधा है, जहां से कुछ ही दूरी पैदल चलकर बाबा बुड्ढा अमरनाथ के दर्शन कर सकते हैं।
ठहरने की क्या हैं व्यवस्थाएं?
यात्रा के दौरान जम्मू के भगवती नगर यात्री निवास, मंडी और पुंछ में प्रशासन की ओर से अस्थायी आवास, लंगर, चिकित्सा और सुरक्षा की व्यवस्था की जाती है। इसके अलावा पुंछ शहर, मंडी और सुरनकोट में होटल, गेस्ट हाउस और स्थानीय होमस्टे भी उपलब्ध हैं, जिन्हें पहले से बुक करना बेहतर रहेगा, क्योंकि यात्रा के दौरान भीड़ काफी बढ़ जाती है।
घूमने का सबसे अच्छा समय
अगर आप बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा के साथ पुंछ की प्राकृतिक खूबसूरती का भी आनंद लेना चाहते हैं, तो जुलाई से सितंबर का समय सबसे बेहतर माना जाता है। इस दौरान मानसून की बारिश के झरने पूरे वेग पर होते हैं, घाटियां हरियाली से ढक जाती हैं और मौसम भी सुहावना रहता है।
हालांकि, बारिश के कारण पहाड़ी मार्गों पर फिसलन और भूस्खलन की संभावना को देखते हुए मौसम की जानकारी लेकर ही यात्रा करें।
इन जगहों का भी करें दीदार
पुंछ किला-18वीं-19वीं शताब्दी में डोगरा शासकों द्वारा विकसित ऐतिहासिक किला पुंछ रियासत की विरासत का प्रतीक है। इसकी वास्तुकला में मुगल और डोगरा शैली की झलक देखने को मिलती है और यह इतिहास प्रेमियों के लिए प्रमुख आकर्षण है।
गुरुद्वारा श्री नंगाली साहिब- पुंछ शहर में स्थित यह जम्मू-कश्मीर के प्रमुख सिख तीर्थस्थलों में से एक है। हर वर्ष यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु माथा टेकने आते हैं और गुरुद्वारे का शांत वातावरण पर्यटकों को भी आकर्षित करता है।
नूरी छंब वाटरफॉल- यह केवल प्राकृतिक स्थल ही नहीं, बल्कि मुगल इतिहास से भी जुड़ा हुआ माना जाता है। मान्यता है कि नूरजहां यहां विश्राम करती थीं, इसलिए इसका नाम 'नूरी छंब' पड़ा।
लोरन घाटी और नंदीशूल वॉटरफॉल- देवदार के जंगलों, पहाड़ी झरनों और शांत वातावरण से घिरी यह घाटी ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहद खूबसूरत जगह है। मॉनसून के दौरान नंदीशूल वाटरफॉल का नजारा बेहद मनमोहक होता है।
इन स्थानीय व्यंजनों का लें स्वाद
बाबा बुड्ढा अमरनाथ यात्रा के दौरान पुंछ के स्थानीय स्वाद का अनुभव जरूर करें। यहां राजमा-चावल, कलाड़ी कुलचा, अंबल, खट्टा मीट और कश्मीरी कहवा सबसे लोकप्रिय व्यंजन हैं। आप स्थानीय ढाबों और होमस्टे में इन पारंपरिक पहाड़ी और डोगरा व्यंजनों का असली स्वाद चख सकते हैं।