कश्मीर में BJP का बड़ा एक्शन, बिना अनुमति तिरंगा रैली निकालने पर 9 पदाधिकारियों पर गिरी गाज, पार्टी से निलंबित
भाजपा की अनंतनाग जिला इकाई ने बिना अनुमति तिरंगा रैली आयोजित करने और महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में 9 पदाधिकारियों को निलंबित कर दिया ह ...और पढ़ें

कश्मीर में भाजपा का बड़ा एक्शन, बिना अनुमति तिरंगा रैली और महिलाओं पर टिप्पणी करने पर 9 पदाधिकारी निलंबित।
HighLights
बिना अनुमति तिरंगा रैली आयोजित करने पर कार्रवाई।
महिलाओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का भी आरोप।
भाजपा ने 9 पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। भारतीय जनता पार्टी की जम्मू-कश्मीर इकाई में अनुशासन को लेकर एक बड़ा और सख्त फैसला सामने आया है। भाजपा की जिला इकाई अनंतनाग ने अपने 9 पदाधिकारियों को तत्काल प्रभाव से सभी पार्टी पदों से हटाते हुए निलंबित कर दिया है। इन सभी पर आरोप है कि इन्होंने बिना अनुमति के जिले में तिरंगा रैली का आयोजन किया और उसमें हिस्सा लिया।
जिला अध्यक्ष राकेश कौल द्वारा जारी एक आधिकारिक कार्यालय आदेश में इस कार्रवाई की पुष्टि की गई है। आदेश के अनुसार, यह रैली 5 अगस्त को हाउसिंग कॉलोनी खन्नाबल में निकाली गई थी, जिसके लिए न तो जिला इकाई से और न ही जिला प्रशासन से कोई अनुमति ली गई थी।
जानकारी के अनुसार, 5 अगस्त को अनंतनाग जिले के खन्नाबल स्थित हाउसिंग कॉलोनी में कुछ पार्टी कार्यकर्ताओं द्वारा तिरंगा रैली का आयोजन किया गया था। यह रैली देखने में तो देशभक्ति से जुड़ी लग रही थी, लेकिन पार्टी के संगठनात्मक ढांचे के लिहाज से इसे पूरी तरह से अनधिकृत बताया गया है।
जिला अध्यक्ष राकेश कौल ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि इस तरह की किसी भी रैली या कार्यक्रम के आयोजन से पहले जिला इकाई और स्थानीय प्रशासन की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होता है, जिसका इन पदाधिकारियों ने पालन नहीं किया।
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महिलाओं पर टिप्पणी ने बढ़ाई कार्रवाई की गंभीरता
इस मामले को और अधिक गंभीर बनाने वाली बात रैली के दौरान हुई एक अन्य घटना है। आदेश में उल्लेख किया गया है कि पार्टी ने इस बात का भी गंभीर संज्ञान लिया है कि रैली के दौरान महिलाओं के खिलाफ 'आपत्तिजनक और अपमानजनक टिप्पणियां' की गईं।
पार्टी ने अपने आदेश में इस कृत्य को 'पूरी तरह से अस्वीकार्य और भारतीय जनता पार्टी के मूल्यों, अनुशासन, गरिमा और सिद्धांतों के खिलाफ' बताया है। बीजेपी ने हमेशा महिला सम्मान को सर्वोपरि रखने की बात कही है और ऐसे में इस तरह की भाषा का प्रयोग पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी, यह संदेश इस कार्रवाई से स्पष्ट होता है।
शीर्ष नेतृत्व से चर्चा के बाद लिया गया फैसला
यह कार्रवाई अचानक या एकतरफा नहीं ली गई है। कार्यालय आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह निर्णय विस्तृत विचार-विमर्श के बाद लिया गया है।
इस फैसले से पहले जिला अध्यक्ष राकेश कौल ने प्रदेश महासचिव (संगठन) अशोक कौल, प्रदेश महासचिव अनवर खान, प्रदेश प्रवक्ता और प्रभारी अनंतनाग अल्ताफ ठाकुर और बीजेपी जिला कोर कमेटी अनंतनाग के साथ गहन मंथन किया। सभी वरिष्ठ नेताओं की सहमति के बाद ही यह सख्त कदम उठाया गया है, ताकि पार्टी में अनुशासन का संदेश साफ तौर पर जाए।
किन-किन पदाधिकारियों पर हुई कार्रवाई?
जिन 9 पदाधिकारियों को निलंबित कर सभी पदों से हटाया गया है, उनमें संगठन के कई बड़े नाम शामिल हैं:
- निसार अहमद भट (वंगम शांगुस) - जिला महासचिव
- खुर्शीद अहमद सोफी (हसनपोरा बिजबेहरा) - जिला सचिव
- आबिदा रफीक (अचबल) - जिला सचिव और पूर्व जिला उपाध्यक्ष
- इरशाद अहमद मलिक (गोपालपोरा मट्टन) - मंडल अध्यक्ष शांगुस
- मोहम्मद मकबूल गनी (अचबल)
- वहीद अहमद इटू (हसनूर ऐशमुकाम) - मंडल अध्यक्ष पहलगाम
- निसार अहमद हकीम (देहवातू पहलगाम) - जिला सचिव
- फिरोज अहमद हजाम (खेरची लारनू) - जिला सचिव किसान मोर्चा
- सबरूजा अख्तर (थाजीवारा) - जिला सचिव महिला मोर्चा
पार्टी ने इन सभी की प्राथमिक सदस्यता को भी आगामी जांच पूरी होने तक निलंबित कर दिया है। इसका मतलब है कि जांच पूरी होने तक ये सभी पार्टी की किसी भी गतिविधि में हिस्सा नहीं ले सकेंगे।
दो नामों को लेकर पार्टी ने दी सफाई
वहीं, इस पूरे विवाद के बीच पार्टी ने दो अन्य नामों को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की है। आदेश में कहा गया है कि बटेंगू अनंतनाग के अलवीर अहमद डार और हंगुलगुंड कोकरनाग की फैंसी अख्तर का बीजेपी जिला इकाई अनंतनाग से किसी भी तरह का कोई संबंध नहीं है। वे संगठन में किसी भी पद पर नहीं हैं और न ही उनके पास कोई जिम्मेदारी है।
इस कार्रवाई से भारतीय जनता पार्टी ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया है कि पार्टी में अनुशासन सर्वोपरि है। चाहे आयोजन तिरंगा रैली जैसा देशभक्ति से जुड़ा ही क्यों न हो, अगर वह पार्टी की अनुमति और प्रशासनिक नियमों के खिलाफ है, तो कार्रवाई तय है। खासकर महिलाओं के सम्मान से जुड़े मामले पर पार्टी ने जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई है।
अब सभी की निगाहें इस मामले में होने वाली आगे की जांच पर टिकी हैं, जिसके बाद इन निलंबित सदस्यों के भविष्य पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।