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    'मौत का कुंआ' बना श्रीनगर बाईपास कॉरिडोर, अपनों की सलामती के लिए डर में जी रहे लोग, अब तक 8 की जा चुकी जान

    By Raziya Noor Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sun, 02 Aug 2026 07:05 AM (IST)

    श्रीनगर का बाईपास कॉरिडोर 'मौत का कुआं' बन गया है, जहां तेज रफ्तार और सुरक्षा उपायों की कमी के कारण कई जानलेवा हादसे हो रहे हैं। ...और पढ़ें

    श्रीनगर में कई सड़कें, चौराहे, बाईपास सड़क दुर्घटनाओं के केंद्र बन चुके हैं। (फाइल फोटो)

    श्रीनगर में कई सड़कें, चौराहे, बाईपास सड़क दुर्घटनाओं के केंद्र बन चुके हैं। (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. श्रीनगर बाईपास कॉरिडोर में लगातार बढ़ रहे जानलेवा हादसे।

    2. स्थानीय निवासी सुरक्षा उपायों और बेहतर क्रॉसिंग की मांग कर रहे।

    3. पुलिस ने निगरानी बढ़ाने और आईटीएमएस लागू करने का दावा किया।

    जागरण संवाददाता, श्रीनगर श्रीनगर शहर में बढ़ते ट्रैफिक को नियंत्रित करने और दुर्घटनाओं को रोकने के लिए यातायात पुलिस तरह-तरह की कोशिशें कर रही है, लेकिन इसका प्रभाव दिख नहीं रहा शहर की कई सड़कें, चौराहे और बाईपास सड़क दुर्घटनाओं के केंद्र बन चुके हैं। इनमें पन्था चौक, सनत नगर, हैदरपोरा, टेंगपोरा, एचएमटी, बेमिना, शाल्टेंग और लावेपोरा शामिल हैं।

    यह चार लेन का बाईपास कारीडोर घाटी का सबसे खतरनाक क्षेत्र बन गया है, जिसे लोकल 'मौत का कुआं' कहने लगे हैं। यहां हर दिन हजारों गाड़ियां, बसें, ट्रक, टिप्पर और दो-पहिया वाहन चलते हैं। स्थानीय निवासियों का कहना है कि चौराहों और सर्विस रोड पर तेज रफ्तार गाड़ियां चलाने की आदत ने इस बाईपास को श्रीनगर के सबसे अधिक दुर्घटना वाले क्षेत्रों में से एक बना दिया है।

    8 लोगों की हो चुकी मौत

    पिछले दो साल में इस कारीडोर पर कई जानलेवा हादसे हुए हैं, जिनमें टेंगपोरा में दो किशोरों की मौत, बेमिना में एंबुलेंस की टक्कर से दो पैदल चलने वालों की मौत, सड़क हादसे में दो पुलिसकर्मियों की मौत और एचएमटी के पास एक 21 वर्षीय मोटरसाइकिल सवार की मौत शामिल हैं। लावेपोरा में तेज़ रफ़्तार गाड़ी के टकराने से एक किशोर की भी जान गई।

    इस बाईपास ने बढ़ाई चिंता

    स्थानीय लोगों का कहना है कि यह बाईपास परिवारों के लिए चिंता का विषय बन गया है। सनत नगर के निवासी हफीजुल्लाह ने कहा, 'जब भी इंटरनेट मीडिया पर किसी दुर्घटना की खबर आती है, तो हमारा पहला ख्याल बाईपास से गुज़र रहे अपने बच्चों और रिश्तेदारों को फोन करने का होता है। गर्मी की छुट्टियों के बाद स्कूल खुलने से छात्रों, आफिस जाने वालों और पैदल चलने वालों की आवाजाही बढ़ गई है, जिससे सुरक्षा के लिए तत्काल कदम उठाना आवश्यक हो गया है।'

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    बेमिना के रिहायशी में क्रासिंग की कमी

    बेमिना के निवासी अब्दुल बासित ने कहा, 'इस सड़क के दोनों ओर बड़े अस्पताल, शिक्षण संस्थान, व्यावसायिक प्रतिष्ठान और रिहायशी इलाके हैं। फिर भी पैदल चलने वालों को तेज़ रफ्तार ट्रैफिक के बीच से गुजरना पड़ता है क्योंकि यहां सुरक्षित क्रासिंग की कमी है।

    स्थानीय लोगों ने खतरनाक स्थानों पर पैदल यात्रियों के लिए क्रासिंग, सर्विस रोड पर बेहतर साइनबोर्ड, सही लेन मार्किंग, मजबूत डिवाइडर और भारी वाहनों की गति कम करने के उपायों की मांग की है। उन्होंने अधिकारियों से मुख्य जंक्शनों, विशेषकर सनत नगर चौराहे पर ट्रैफिक सिग्नल लगाने का आग्रह किया है, जहां सिग्नल लाइट न होने को सुरक्षा के लिए एक बड़ी चिंता बताया गया है।'

    हैदरपोरा के दुकानदार मोहम्मद अशरफ ने कहा, 'तेज रफ़्तार टिप्पर और ट्रकों, खासकर ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। बाईपास पर अनुशासन उतना ही ज़रूरी है जितना इंफ्रास्ट्रक्चर।'

    बाईपास पर निगरानी बढ़ाई गई

    ट्रैफिक पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि नियमित चेकिंग अभियान और चौबीसों घंटे निगरानी के ज़रिए बाईपास पर सख्ती बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा, पूरे शहर में इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम इलेक्ट्रानिक रूप से ट्रैफिक नियमों के उल्लंघन का पता लगा रहा है, साथ ही तेज़ रफ़्तार, खतरनाक ड्राइविंग और अन्य अपराधों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। इस प्रकार, श्रीनगर के बाईपास कारीडोर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, और स्थानीय निवासियों की सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।