दिल्ली ब्लास्ट मामले में SIA ने दाखिल की चार्जशीट, जैश को ढाल बना कश्मीर में आतंक फैलाने की थी साजिश
SIA ने दिल्ली ब्लास्ट मामले में चार्जशीट दाखिल की है, जिसमें 'डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल' का खुलासा हुआ। यह मॉड्यूल जैश-ए-मोहम्मद का मुखौटा इस्तेमाल कर घाट ...और पढ़ें

कैप्शन: दिल्ली ब्लास्ट मामले में SIA ने दाखिल की चार्जशीट (File Photo)
HighLights
SIA ने दिल्ली ब्लास्ट मामले में चार्जशीट दाखिल की
डॉक्टर्स मॉड्यूल जैश का मुखौटा इस्तेमाल कर रहा था
अंसार गजवात-उल-हिंद को पुनर्जीवित करने की साजिश थी
नवीन नवाज, श्रीनगर। दिल्ली में नवंबर 2025 में लाल किले के पास आत्मघाती आतंकी हमले को अंजाम देने वाले व्हाईट कॉलर टेलर- डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल घाटी में अंसार गजवात-उल-हिंद(एजीयूएच-एजीएच) को फिर से जिंदा करना चाहता था। उसने जैश-ए-मोहम्मद के नाम का इस्तेमाल एक मुखौटे की तरह और जैश के नेटवर्क का लाभ उठाने के लिए किया है।
यह दावा प्रदेश जांच एजेंसी एसआईए ने गुरुवार को NIA अधिनियम के तहत श्रीनगर में गठित विशेष अदालत में डाक्टर्स टेरर मॉड्यूल संबंधी मामले में दायर किए गए अपने आरोपपत्र में किया है।
आंतकी विस्फोटक कर रहे थे जमा
यह मॉड्यूल देश के विभिन्न भागों में आतंकी हमलों के लिए ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड नामक घातक विस्फोटक तैयार करने में लगा हआ था, क्योंकि इसके घटक आसानी से मिल जाते हैं और कई अंतरराष्ट्रीय आतंकी संगठन इसी विस्फोटक का इस्तेमाल करते हैं।
आरोपपत्र में पकड़े गए टेरर मॉड्यूल के 10 सदस्यों को आरोपित बनाया गया है। इनमें लाल किले के बाहर आत्मघाती हमले को अंजाम देते हुए मारा गया आतंकी डॉक्टर उमर उन नबी भी शामिल है।
उल्लेखनीय है कि 19 अक्टूबर, 2025 को पुलिस ने श्रीनगर के बाहरी क्षेत्र नौगाम में प्रतिबंधित आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के भड़काऊ और धमकी भरे पोस्टर कई जगह दिवारों के पर चिपके देखे और मामला दर्ज कर जांच शुरू की थी।
पुलिस इस मामले में लिप्त तत्वों को गिरफ्तार करते हुए उनके कब्जे से भारी मात्रा में विस्फोटकों का जखीरा बरामद किया। इससे पहले कि पुलिस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करती,10 नवंबर 2025 को लाल किले के पास डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल के एक अहम सदस्य डॉ. उमर उन नबी ने विस्फोटकों से भरी कार संग खुद को उड़ा दिया। इस विस्फोट में एक दर्जन लोग मारे गए। इस मामले की जांच प्रदेश जाचं एजेंसी एसआइए और एनआइए अपने अपने स्तर पर कर रही हैं।
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इन्हें बनाया गया आरोपी
एसआइए ने अपने आरोपपत्र में आरिफ निसार डार उर्फ साहिल, यासिर-उल-अशरफ बट, मकसूद अहमद डार उर्फ शाहिद, इरफान अहमद वागे उर्फ ओवैस, ज़मीर अहमद अहंगर उर्फ मुतलाशी, डॉ. मुज़म्मिल शकील गनई उर्फ मुसैब, डॉ. अदील अहमद राथर उर्फ जावेद, डा शाहीन सईद, तुफैल अहमद बट के साथ लाल किले के बाहर आतंकी हमले को अंजाम देते हुए मारे गए डाक्टर उमर उन नबी को आरोपित बनाया है।
सुरक्षा एजेंसियों को किया गुमराह
एसआइए ने अपने आरोपपत्र में बताया कि डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल ने जैश-ए-मोहम्मद के नाम का इस्तेमाल अपनी पहचान को छिपाने और सुरक्षा एजेंसियों को गुमराह करने के लिए किया है। मॉड्यूल ने आम लोगों में डर पैदा करने,कानून व्यवस्था को नुकसान पहुंचाने और भारत की संप्रभुता व क्षेत्रीय अखंडता को चुनौती देने के लिए ही पोस्टर जारी किए थे।
इस मॉड्यूल के सभी सदस्य पढ़े लिखे हैं, लेकिन सभी कट्टर जिहादी मानसिकता से ग्रस्त हैं और वह अच्छी तरह जानते हैं कि वह क्या कर रहे हैं। यह देश के विभिन्न भागों में अपने लिए जिहादी मानसिकता वाले तत्वों का एक नेटवर्क तैयार करने में लगे हुए थे।
यह एजीयूएच को फिर से जिंदा करते हुए, पूरे देश में शरियत और इस्लामिक राज चाहते थे। जांच में पता चला है कि एक सुनियोजित षडयंत्र के तहत ही मॉड्यूल ने जैश-ए-मोहम्मद के नाम का इस्तेमाल किया ताकि किसी का ध्यान इसकी और इसके मकसद की तरफ न जाए। यह जैश के असर का पूरा लाभ उठाना चाहता था।
भारत के खिलाफ कर रहे थे दुष्प्रचार
एसआइए ने बताया कि इस माडयूली में शामिल पढ़े लिखे लाेगों ने जिनमें बड़ी संख्या डॉक्टरों की है, ने अपनी विशेषज्ञता और विभिन्न संस्थानों में अपनी पहुंच का अपने जिहादी मंसूबों को पूरा करने के लिए किया।
जांच में पता चला कि इन्होंने इंटरनेट मीडिया पर भी भारत के खिलाफ जमकर दुष्प्रचार करते हुए कट्टरपंथी प्रोपेगंडा के जरिए खुद को सही साबित करने व अपने लिए नए कैडर को जुटाने की कोशिश की। इंटरनेट मीडिया के जरिए भी इस मॉड्यूल ने विस्फोटक बनाने में इस्तेमाल होने वाले सामान को खरीदा। जांच में पता चला है कि माडयल ने अल-फलाह मेडिकल कॉलेज से जुड़ी रिहायशी जगहों और सुविधाओं का पूरा लाभ उठाया।
जांच में पता चला है कि डॉक्टर्स टेरर मॉड्यूल ने विश्व भर में हुई कईआतंकी घटनाओं में इस्तेमालहोने वाले बहुत ज़्यादा वोलाटाइल विस्फोटक, ट्राइएसीटोन ट्राइपरॉक्साइड (टीएटीवी) को तैयार करने को प्राथमिकता दी,क्योंकि इसे तैयार करने में सहायक इसके कई घटक आसानी से बाजार में मिल जाते हैं।
एसआइए ने अपने आरोपपत्र मेंबताया है कि इस मॉड्यूल ने जिस तादाद में विस्प्ऊोटक जमा किए थे,उससे इसके खतरनाक मंसूबों का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। अगर यह मॉड्यूल पकड़ा नही जाता तो इसके द्वारा पूरे देश में बडृे पैमाने पर तबाही की जाती।
कौन है जाकिर मूसा?
एसअाइए ने बताया है कि उसने सबूतों पर आधारित जांच के ज़रिए पूरे नेटवर्क और उसके सपोर्ट स्ट्रक्चर को खत्म कर दिया है। अदालत में आरोपपत्र के साथ इस पूरे मामले में बरामद साजो सामान,, डिजिटल फोरेंसिक एनालिसिस, साइंटिफिक सबूत और गवाहों के बयान भी जमा कराए गए हैं। आरोपपत्र में एसआइए ने प्रत्येक आरोपित की भूमिका का विस्तार से उल्लेख किया है।
अंसार गजवात उल हिंद जिसे एजीयूएच और एजीएच भी कहते हैं का गठन हिजबुल मुजाहिदीन से अलग होने के बाद जाकिर मूसा नामक आतंकी ने वर्ष 2017 में किया था। जाकिर मूसा हिजबुल मुजाहिदीन के पोस्टर ब्वाय रहे आतंकी बुरहान वानी का करीबी साथी था और दोनों ही दक्षिण कश्मीर में त्राल के रहने वाले थे।
जाकिर मूसा जम्मू-कश्मीर को एक आजाद इस्लामिक राष्ट्र जो पूरी तरह से शरियत के आधार पर चले, बनाना चाहता था। वह आइएसआइएस और अलकायदा से प्रेरित था। जाकिर मूसा और उसके साथी कथित तौर आइएसआइएस व जैश के प्रमुख कमांडरों के साथ संपर्क मे थे। जाकिर मूसा वर्ष 2019 मेंमारा गया था। सुरक्षा एजेंसियों के अनुसार, एजीयूएच को कश्मीर में अल-कायदा का विस्तार माना जा सकताहै।
मूसा केमारे जाने के बाद उसके अन्य साथी भी अलग अलग मुठभेड़ों मेंमारे गए और करीब दो वर्ष पहले पुलिस ने एजीयूएच से जुढ़े अंतिम आतंकी और उसके ओवरग्राउंड वर्कर कोगिरफ्तार कर,इसके पूरे नेटवर्कको समाप्त करने का दावा किया था।