यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Oct 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
पहले जय श्री राम का नारा, फिर ली संस्कृत में शपथ; भगवा साफा बांधे कुछ ऐसा था शगुन परिहार का अंदाज
जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले नवनिर्वाचित सदस्यों ने सोमवार को शपथ ग्रहण कर ली। प्रोटेम स्पीकर ने नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिल ...और पढ़ें

डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर विधानसभा चुनाव में जीत हासिल करने वाले नवनिर्वाचित सदस्यों ने सोमवार को शपथ ग्रहण कर ली। विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर की ओर से नवनिर्वाचित सदस्यों को शपथ दिलाई गई।
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के पहले मुख्यमंत्री उमर ने कश्मीरी भाषा में शपथ ली, तो वहीं किश्तवाड़ से भाजपा की टिकट पर चुनाव जितने वाली शगुन परिहार (Shagun Parihar) ने संस्कृत भाषा में शपथ ग्रहण किया।
शगुन परिहार ने संस्कृत में ग्रहण किया शपथ
शगुन परिहार जब शपथ (Shagun Parihar Oath) लेने के लिए उठीं तो हर कोई उन्हें देखते ही रह गया। शगुन ने भगवा साफा पहने विधानसभा के भीत सबसे पहले 'जय श्री राम' के नारे का उद्घोष किया फिर शपथ लेने आगे बढ़ीं।
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शगुन परिहार के संस्कृत में शपथ लेता देख हर कोई हैरान रह गया। सोशल मीडिया पर शगुन परिहार के शपथ ग्रहण समारोह की वीडियो वायरल हो रहा है। शगुन परिहार के शपथ ग्रहण वाली वीडियो देखकर सोशल मीडिया पर काफी सारे लोग उनकी तारीफ भी कर रहे हैं।
आतंकी हमले में हो गई थी पिता-चाचा की मौत
एक नवंबर, 2018 को जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में भाजपा विधायक शगुन परिहार (Who is Shagun Parihar) के पिता अजीत परिहार और उनके चाचा तथा भाजपा नेता अनिल परिहार की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
शगुन परिहार ने पिता को खोने के बाद राजनीति में कदम रखी है और किश्तवाड़ से भाजपा की टिकट पर विधानसभा पहुंची हैं। शगुन इलेक्ट्रॉनिक्स में डॉक्टरेट की पढ़ाई कर रहीं हैं।
किश्तवाड़ विधानसभा चुनाव 2024 रिजल्ट
किश्तवाड़ विधानसभा चुनाव 2024 में शगुन परिहार (Shagun Parihar Oath Video) ने एनसी उम्मीदवार सज्जाद अहमद किचलू को 521 वोटों से हराया था।
शगुन परिहार को 29053 वोट मिले थे, तो वहीं सज्जाद अहमद किचलू को 28532 वोट हासिल हुए थे। वहीं, इस सीट पर पीडीपी उम्मीदवार फिरदौस अहमद टाक 997 वोट हासिल हुए थे।
उपराज्यपाल की अनुमति के बिना नहीं हो सकता बड़ा फैसला
बता दें कि केंद्र शासित प्रदेश के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला वैसे तो दूसरी बार जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री बने हैं लेकिन इस बार की परिस्थितियां बिल्कुल अलग हैं। पहले जम्मू-कश्मीर एक राज्य था और अब केंद्र शासित प्रदेश है।
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ऐसे में अब उमर अब्दुल्ला के पास उतनी शक्तियां नहीं हैं, जितनी पहली बार मुख्यमंत्री बनने के समय थीं। उमर अब्दुल्ला कोई भी बड़ा फैसला उपराज्यपाल के अनुमति के बिना नहीं ले सकते हैं।
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