जम्मू-कश्मीर में बिजली संकट! अगस्त में आपके शहर में बिजली कटौती तय, पीक आवर में 376 MW की भारी कमी का अलर्ट
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगस्त महीने के दौरान पीक आवर्स में बिजली की 14% कमी का अनुमान है, जिससे उपभोक्ताओं को कटौती का सामना करना पड़ सकता है। ...और पढ़ें

जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगस्त में गहराएगा बिजली संकट पीक आवर्स में 376 मेगावाट की कमी।
HighLights
अगस्त में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख में बिजली संकट।
पीक आवर्स में 376 मेगावाट की कमी संभव।
बढ़ती मांग के कारण 14% कटौती का अनुमान।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में अगस्त महीने के दौरान बिजली की अधिकतम मांग के समय उपभोक्ताओं को कमी का सामना करना पड़ सकता है। उत्तरी क्षेत्रीय ऊर्जा समिति (एनआरपीसी) के अनुमान के अनुसार, पीक आवर्स में दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में करीब 14 प्रतिशत बिजली की कमी रहने की संभावना है। मांग और उपलब्धता के बीच लगभग 376 मेगावाट का अंतर रहने का अनुमान लगाया गया है।
आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में पीक डिमांड के समय जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बिजली की मांग करीब 2710 मेगावाट तक पहुंच सकती है, जबकि उपलब्धता 2334 मेगावाट रहने का अनुमान है। इस तरह अधिकतम मांग के समय बिजली आपूर्ति में 13.9 प्रतिशत की कमी दर्ज हो सकती है।
हालांकि राहत की बात यह है कि पीक आवर्स के अलावा अन्य समय में बिजली की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। एनआरपीसी के अनुसार, सामान्य समय में करीब 47 प्रतिशत अतिरिक्त बिजली उपलब्ध रह सकती है।
बढ़ती मांग बनी चुनौती
सरकार ने मार्च में अनुमान जताया था कि जम्मू-कश्मीर में आने वाले वर्षों में बिजली की मांग लगातार बढ़ेगी। वित्त वर्ष 2026-27 में पीक डिमांड के दौरान बिजली की जरूरत करीब 3813 मेगावाट तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके बाद वित्त वर्ष 2027-28 में यह मांग बढ़कर 3964 मेगावाट और 2028-29 में 4117 मेगावाट तक पहुंच सकती है। अधिकारियों के अनुसार, बढ़ती आबादी, विकास परियोजनाओं और ऊर्जा खपत में वृद्धि के कारण बिजली की आवश्यकता लगातार बढ़ रही है।
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ऊर्जा खपत में भी होगा इजाफा
जम्मू-कश्मीर में कुल बिजली ऊर्जा की खपत भी आने वाले वर्षों में बढ़ने का अनुमान है। वित्त वर्ष 2026-27 में करीब 23,372 मिलियन यूनिट (एमयू) बिजली की जरूरत होगी, जो 2027-28 में बढ़कर 24,559 एमयू और 2028-29 में 25,780 एमयू तक पहुंच सकती है।