Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकी बदलाव पर दिल्ली अलर्ट, केंद्रीय समिति 10 अगस्त से करेगी ग्राउंड वेरिफिकेशन

    By Digital Desk Edited By: Rahul Sharma
    Updated: Sat, 08 Aug 2026 12:35 PM (GMT+05:30)

    केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप और अवैध आव्रजन पर निगरानी तेज की है। इसके लिए एक उच्चस्तरीय समिति 10 से 12 अगस्त तक जम्मू स ...और पढ़ें

    जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध आव्रजन पर केंद्र की उच्चस्तरीय जांच

    जम्मू-कश्मीर में जनसांख्यिकीय बदलाव और अवैध आव्रजन पर केंद्र की उच्चस्तरीय जांच

    राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बदलते जनसांख्यिकीय स्वरूप और अवैध आव्रजन से जुड़े मामलों को लेकर केंद्र सरकार ने अपनी निगरानी और आकलन प्रक्रिया को तेज कर दिया है। इसी सिलसिले में केंद्र की ओर से गठित उच्चस्तरीय समिति 10 से 12 अगस्त तक जम्मू संभाग के तीन दिवसीय दौरे पर रहेगी। जम्मू-कश्मीर में यह समिति का पहला दौरा होगा।

    दौरे के दौरान समिति जम्मू संभाग के विभिन्न इलाकों का जमीनी जायजा लेने के साथ-साथ संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का भी दौरा करेगी। सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों में स्थानीय परिस्थितियों, आबादी के स्वरूप में आए बदलाव और दस्तावेजविहीन प्रवास से जुड़े मामलों की वास्तविक स्थिति को समझने पर विशेष जोर रहेगा।

    सीमावर्ती इलाकों पर रहेगी खास नजर

    समिति उन इलाकों का भी रुख कर सकती है, जहां विदेशी नागरिकों के कथित तौर पर बसने या अवैध रूप से रह रहे लोगों से संबंधित सूचनाएं सामने आई हैं। इस दौरान संबंधित विभागों और प्रशासनिक अधिकारियों से उपलब्ध आंकड़े, ऐसे मामलों की संख्या, दस्तावेजों की स्थिति तथा स्थानीय स्तर पर सामने आए बदलावों की जानकारी ली जाएगी।

    अधिकारियों के साथ बैठकों में यह भी समझने की कोशिश होगी कि आबादी के स्वरूप में बदलाव के पीछे कौन-कौन से कारक जिम्मेदार हैं और उनका सामाजिक, प्रशासनिक तथा सुरक्षा व्यवस्था पर क्या संभावित प्रभाव पड़ रहा है।

    जम्मू संभाग का महत्व इस लिहाज से भी बढ़ जाता है कि यह क्षेत्र अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा हुआ है। ऐसे में अवैध प्रवेश और दस्तावेजविहीन प्रवास से संबंधित गतिविधियों पर सुरक्षा एवं प्रशासनिक एजेंसियों की लगातार नजर रहती है।

    खबरें और भी

    न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलकर की अध्यक्षता में जांच

    उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलकर कर रहे हैं। समिति में जनगणना आयुक्त के अलावा सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी दुर्गा शंकर मिश्रा, सेवानिवृत्त आईपीएस अधिकारी बालाजी श्रीवास्तव और डॉ. शमिका रवि शामिल हैं। गृह मंत्रालय में संयुक्त सचिव (फॉरेनर्स-I) को समिति का सदस्य सचिव बनाया गया है।

    जम्मू प्रवास के दौरान समिति आबादी के मौजूदा पैटर्न, उसमें हुए बदलाव, बदलाव के संभावित कारणों और उनके सामाजिक एवं प्रशासनिक प्रभावों से संबंधित जानकारी जुटाएगी। हालांकि अधिकारियों के मुताबिक, समिति का मौजूदा कार्यक्रम जम्मू संभाग तक ही सीमित है। फिलहाल कश्मीर घाटी के दौरे की कोई योजना नहीं बताई गई है।

    देशभर में बदलती आबादी के पैटर्न का अध्ययन

    केंद्र सरकार ने इस समिति को केवल जम्मू-कश्मीर तक सीमित जांच का जिम्मा नहीं दिया है। समिति देशभर में अवैध आव्रजन और अन्य असामान्य कारकों के कारण होने वाले जनसांख्यिकीय बदलावों का व्यापक अध्ययन करेगी।

    अध्ययन के दौरान विभिन्न धार्मिक और सामाजिक समुदायों के बीच आबादी के बदलते स्वरूप, इसके पीछे के कारणों और उससे उत्पन्न संभावित प्रभावों का विश्लेषण किया जाएगा।

    समिति अपनी पड़ताल के आधार पर नीतिगत, विधायी और प्रशासनिक उपायों की सिफारिश करेगी। उसे अपनी रिपोर्ट एक वर्ष के भीतर सौंपनी है। जरूरत पड़ने पर गृह मंत्रालय समिति का कार्यकाल छह महीने तक बढ़ा सकता है।

    रोहिंग्या और अवैध बांग्लादेशी बढ़ रहे जम्मू में

    जम्मू-कश्मीर के बाद समिति देश के उन अन्य क्षेत्रों का भी दौरा करेगी, जहां अवैध आव्रजन और जनसांख्यिकीय बदलाव को लेकर चिंताएं सामने आती रही हैं। इनमें पश्चिम बंगाल, असम और पूर्वोत्तर के कुछ क्षेत्र प्रमुख हैं।

    जम्मू प्रांत के सीमांत और दूर दराज के इलाकों में विगत कुछ वर्षाें के दौरान रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इनमें से कई ड्रग्स और मानवतस्करी में भी लिप्त पाए गए हैं। गत दिनों रामबन में पुलिस ने 21 बांग्लादेशियों को पकड़ा है।

    अवैध रूप से जम्मू कश्मीर में दाखिल हुए यह लोग सुरक्षा के लिए भी कई जगह खतरा पैदा करते हुए जनसांख्यिकी बदलाव का भी कारण बन रहे हैं। प्रशासन ने अवैध रोहिंग्या शरणार्थियो को पकड़ने और उनके खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक होल्डिंग सेंटर भ्ीा बना रखा है जो नाकाफी है।

    ऐसे में जम्मू का तीन दिवसीय दौरा समिति की व्यापक राष्ट्रीय पड़ताल की एक अहम कड़ी माना जा रहा है। इस दौरान जुटाए जाने वाले आंकड़े, जमीनी फीडबैक और अधिकारियों से होने वाली बैठकों से जम्मू संभाग में आबादी के बदलते स्वरूप की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिल सकती है। समिति की अंतिम रिपोर्ट पर केंद्र सरकार की आगे की नीतिगत और प्रशासनिक दिशा काफी हद तक निर्भर मानी जा रही है।