कश्मीर में इस साल हुई बादाम की बंपर पैदावार, फिर भी क्यों परेशान हैं पुलवामा के किसान? जानिए वजह
कश्मीर में इस साल बादाम की बंपर पैदावार हुई है, फिर भी जलवायु परिवर्तन के कारण किसान चिंतित हैं। कटाई 20 दिन पहले शुरू करनी पड़ी, जो भविष्य के लिए बड़ ...और पढ़ें

कश्मीर में बादाम की बंपर पैदावार, फिर भी जलवायु परिवर्तन से किसान परेशान।
HighLights
कश्मीर में इस साल बादाम की पैदावार अच्छी हुई।
जलवायु परिवर्तन से बादाम की कटाई 20 दिन पहले।
समय से पहले पत्ते झड़ने से किसान भविष्य को लेकर चिंतित।
जागरण संवाददाता, श्रीनगर। कश्मीर में इस साल बादाम के बागों ने किसानों को निराश नहीं किया, पैदावार अच्छी हुई है। लेकिन इसके बावजूद घाटी के किसानों के चेहरे पर खुशी से ज्यादा चिंता है। वजह है- जलवायु परिवर्तन।
दरअसल, इस साल घाटी में बादाम की कटाई अपने तय वक्त से करीब 20 दिन पहले ही शुरू करनी पड़ी। किसानों का कहना है कि ये सिर्फ एक बार की बात नहीं है, बल्कि आने वाले बड़े खतरे का संकेत है।
पुलवामा और बडगाम, खासकर इनके मशहूर 'करेवा' इलाके, कश्मीर में बादाम की खेती का दिल माने जाते हैं। यहां हजारों कनाल जमीन पर बादाम के बाग फैले हैं। ये सिर्फ फसल नहीं, बल्कि हजारों किसानों, मजदूरों और व्यापारियों की रोजी-रोटी है और स्थानीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ भी।
आम तौर पर बादाम के पेड़ों पर मार्च में फूल आते हैं, फल अगस्त तक पकते हैं और फिर कटाई शुरू होती है। लेकिन इस बार असामान्य रूप से ज्यादा तापमान ने सारा गणित बिगाड़ दिया। पकने की प्रक्रिया तेज हो गई और किसानों को पारंपरिक टाइम-टेबल से लगभग तीन हफ्ते पहले ही कटाई शुरू करनी पड़ी।
पत्ते समय से पहले ही झड़ रहे हैं
पुलवामा के परिगाम इलाके के किसान अब्दुल रशीद भट कहते हैं, 'मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। लंबे समय तक सूखा, बढ़ता तापमान और बेमौसम बारिश ने बादाम के बागों पर बुरा असर डाला है।'
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कई किसानों ने बताया कि कई बागों में समय से पहले ही पत्तियां झड़ रही हैं। इससे पेड़ों की सेहत और आने वाले सालों में उत्पादन बना रहेगा या नहीं, इसको लेकर गहरी चिंता है।
किसानों ने माना कि मौसम ठीक न होने के बावजूद पिछले सीजन के मुकाबले इस साल पैदावार उत्साहजनक रही है। लेकिन अगर मौसम का यही हाल रहा, तो यह पूरी इंडस्ट्री के भविष्य के लिए बड़ी चुनौती बन सकता है।
बागवानी विभाग ने क्या कहा?
बागवानी विभाग के अधिकारियों ने मौसम के बदलते पैटर्न को माना है, लेकिन कहा कि इस सीजन में पैदावार संतोषजनक रही है। विभाग के अधिकारी तनवीर अहमद पीर ने कहा, 'इस साल बादाम का उत्पादन अच्छा रहा है और चिंता की कोई तत्काल वजह नहीं है। विभाग बेहतर और जलवायु-अनुकूल बादाम की किस्मों को बढ़ावा दे रहा है, जिससे उत्पादकता बढ़ेगी और किसानों को बदलते हालात में ढलने में मदद मिलेगी।'
विशेषज्ञों का भी मानना है कि इस साल के उत्पादन ने किसानों को राहत तो दी है, लेकिन फसल का समय से पहले पकना घाटी के बागवानी क्षेत्र पर जलवायु परिवर्तन के बढ़ते असर का साफ संकेत है।
उन्होंने इस इंडस्ट्री को बचाने के लिए वैज्ञानिक तरीके से बागों के मैनेजमेंट, मौसम के हिसाब से खेती, बेहतर सिंचाई सुविधाओं और बादाम की उन्नत किस्मों को अपनाने पर जोर दिया है।
पुलवामा और बडगाम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था में बादाम की खेती एक अहम हिस्सा है। जानकारों का कहना है कि बदलते मौसम में इस सेक्टर को लंबे समय तक मजबूत बनाए रखने के लिए सरकार का लगातार सहयोग, रिसर्च और आधुनिक तरीकों को अपनाना बेहद जरूरी होगा।