बर्फबारी में पर्यटकों की लाइफलाइन बनी कश्मीर की वंदे भारत एक्सप्रेस, क्या हैं खासियतें?
जम्मू डिवीजनल रेलवे मैनेजर विवेक कुमार ने बताया कि कश्मीर की वंदे भारत एक्सप्रेस को पहाड़ी और अत्यधिक सर्दी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन ...और पढ़ें

कैप्शन: बर्फबारी में पर्यटकों की लाइफलाइन बनी कश्मीर की वंदे भारत एक्सप्रेस (फाइल फोटो)
HighLights
वंदे भारत कश्मीर के पहाड़ी और सर्दी वाले क्षेत्रों के लिए विशेष डिज़ाइन।
श्रीनगर-कटड़ा वंदे भारत सेवा यात्रियों के बीच अत्यधिक लोकप्रिय।
प्राकृतिक आपदाओं के बाद 90% ट्रेन सेवाएं बहाल, ट्रैक मरम्मत पूरी।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। कश्मीर जाने वाली वंदे भारत एक्सप्रेस अन्यों रेलों से काफी अलग है। इसे खासतौर से पहाड़ी और सर्दी के हिसाब से बनाया गया है। जम्मू डिवीजनल रेलवे मैनेजर (DRM) विवेक कुमार ने इस बाबत बताया कि जम्मू और कश्मीर में चलने वाली वंदे भारत ट्रेन के डिब्बों को खासतौर पर कड़ी सर्दी और ऊंचाई वाले इलाकों की स्थितियों में काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
उन्होंने कहा कि श्रीनगर-कटड़ा वंदे भारत सेवा इस क्षेत्र में काफी लोकप्रिय हो गई है और यात्रियों के बीच इसकी बहुत ज्यादा मांग है। कुमार ने कहा कि पिछले साल अगस्त में कई प्राकृतिक आपदाओं से हुई तबाही के बाद इस रूट पर लगभग 90 प्रतिशत ट्रेन सेवाएं फिर से शुरू हो गई हैं।
जम्मू और पठानकोट के बीच ट्रैक बहाली का काम हुआ पूरा
जम्मू और पठानकोट के बीच ट्रैक बहाली का काम पूरा होने के बाद इस साल मई तक वंदे भारत सहित महत्वपूर्ण सेवाओं को बहाल करने की योजना है। कुमार ने यहां पत्रकारों से कहा कि वंदे भारत ट्रेन को सर्दियों के मौसम को ध्यान में रखकर डिज़ाइन किया गया है। ट्रेनों को ज़्यादा ऊंचाई और कम तापमान के लिए डिज़ाइन किया जाना चाहिए। वंदे भारत को भी उसी तरह से डिजाइन किया गया है।
भारी बर्फबार के कारण सड़कें थी बंद
यात्रियों से मिले फीडबैक और मीडिया रिपोर्टों से पता चलता है कि यह सेवा काफी लोकप्रिय हो गई है और इसकी बहुत अधिक मांग है। उन्होंने कहा कि जब क्षेत्र में भारी बर्फबारी के कारण सड़कें बंद थीं, तब रेलवे ने दो दिनों के लिए एक विशेष ट्रेन सेवा भी चलाई थी, और कटड़ा के रास्ते जम्मू और श्रीनगर के बीच यात्रा करने वाले पर्यटकों और स्थानीय लोगों की मांग को पूरा करने के लिए ऐसी सेवाओं को जारी रखने के प्रयास किए जा रहे हैं।
खबरें और भी
उन्होंने कहा कि फिलहाल, इस रूट पर दो ट्रेनें चल रही हैं और भविष्य के फैसले सरकार की योजना के अनुसार लिए जाएंगे। DRM ने कहा कि पिछले साल विनाशकारी बाढ़ के बाद बहाली का काम, जिससे रेलवे ट्रैक, पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हो गई थीं, तेज़ी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि रेलवे पुलों में जटिल तकनीकी संरचनाएं होती हैं और उनकी बहाली में समय लगता है। हालांकि, काम का एक बड़ा हिस्सा पूरा हो गया है और लगभग 90 प्रतिशत ट्रेन सेवाएं पहले ही बहाल हो चुकी हैं।"