'कश्मीरी हिंदू गद्दार...', अमेरिकी राजदूत के दौरे से बढ़ी PAK की बौखलाहट? धमकी के पीछे छिपी हैं ये 5 बड़ी वजहें
जम्मू-कश्मीर में कश्मीरी पंडितों के पुनर्वास को लेकर किए जा रहे प्रयास आतंकियों को रास नहीं आ रहे। अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर के जम्मू-कश्मीर दौरे के बाद कथित तौर से कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को धमकी भरे पत्र से टारगेट किया गया है।

कश्मीरी हिंदूओं को मिली धमकी (जागरण फाइल)
HighLights
कश्मीरी हिंदुओं को आतंकी संगठनों से धमकी भरा पत्र
अमेरिकी राजदूत के बयान से पाकिस्तान की बौखलाहट बढ़ी
कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास प्रयासों से आतंकी नाराज
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर में शांति, सुधरते सुरक्षा हालात और विस्थापित कश्मीरी हिंदुओं की घाटी वापसी के प्रयास के बीच आतंकी संगठनों ने कश्मीरी हिंदुओं के नाम फिर धमकी भरा पत्र जारी किया है।
सोशल मीडिया पर प्रसारित इस पत्र में प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत कार्यरत कश्मीरी हिंदू कर्मचारियों को निशाना बनाने की गीदड़भभकी दी गई है। कथित पत्र में कश्मीरी हिंदुओं को ‘व्हाइट कॉलर आतंकवादी’ और गद्दार बताते हुए उन पर दिल्ली में बैठे अपने ‘आकाओं’ के लिए काम करने का आरोप लगाया गया है।
पत्र में धमकी दी गई है कि संबंधित लोगों की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही है। इसे रोजगार समेत विभिन्न कारणों से कश्मीर जाने वाले हिंदू परिवारों में भय पैदा करने के षड्यंत्र के रूप में देखा जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर शांति और प्रगति की ओर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में आतंकियों की धमकी से कश्मीरी हिंदुओं में भय का माहौल है। यह धमकी क्यों दी गई और क्या इसके पीछे कारण हो सकते हैं। इन्हें इन कारणों से समझा जा सकता है।
अचानक धमकी के क्या हैं कारण?
- इसी माह 19 अगस्त को प्रदेश के दौरे पर आए भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने जम्मू-कश्मीर को भारत का महत्वपूर्ण अंग बताया था। यहां सुरक्षा हालात काफी बेहतर हैं। इससे पाकिस्तान को मिर्ची लगी थी। इस बयान के बाद पाकिस्तान और आतंकियों की बौखलाहट बढ़ना तय माना जा रहा था।
- जम्मू में जनसांख्यिकी बदलाव का आकलन करने आई केंद्र की उच्चस्तरीय टीम ने कश्मीरी हिंदुओं की विस्थापित कॉलोनी का दौरा कर समस्याएं सुनीं थीं। कश्मीरी हिंदुओं के संगठन पनुन कश्मीर के प्रतिनिधियों ने भी 12 अगस्त को इस टीम से मुलाकात कर 500 पन्नों की कश्मीरी हिंदुओं के विस्थापन से लेकर जनसांख्यिकी बदलाव की रिपोर्ट सौंपी थी। कश्मीरी हिंदुओं के पुनर्वास के प्रयास आतंकी संगठनों को रास नहीं आ रहे।
- उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के निर्देश पर जम्मू-कश्मीर में दशकों से फाइलों में दबे कश्मीरी हिंदुओं पर आतंकी हिंसा के मामलों की पुन: जांच शुरू हुई है। दोषियों को पकड़ा जा रहा है और कश्मीरी हिंदुओं को न्याय दिलाने के प्रयास शुरू हुए हैं। इसके साथ आतंकी हिंसा के पीड़ित परिवारों के एक-एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी दी जा रही है। इससे आतंकी बौखलाए हुए हैं।
- केंद्र सरकार के पुनर्वास पैकेज के तहत मार्च 2026 तक 5806 कश्मीरी हिंदुओं को नियुकति दी जा चुकी है। इसके साथ ही इन कर्मचारियों के लिए छह हजार ट्रांजिट आवास को मंजूरी दी गई।
- मीरवाइज उमर फारूक ने कश्मीरी हिंदुओं के लिए कहा था कि मुस्लिम भाई अपने हिंदू भाइयों का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में उन्हें 'इस्लाम का गद्दार' बताया गया था। कश्मीरी हिंदू के प्रति मुस्लिमों का बढ़ता भाईचारा आतंकियों को रास नहीं आ रहा है।
ऐसी धमकियों को हल्के में नहीं लिया जाना चाहिए और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना पुलिस की बड़ी जिम्मेदारी है। प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि धमकियों के पीछे कौन है। कानून-व्यवस्था और सुरक्षा का विषय उपराज्यपाल प्रशासन के अधीन आता है और संबंधित एजेंसियों को मामले की पूरी जांच करनी चाहिए। -उमर अब्दुल्ला, मुख्यमंत्री
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