पहलगाम आतंकी हमले का एक साल, पर्यटन पर पड़ा गहरा असर; सुरक्षा का कड़ा पहरा और बलिदानियों को याद करती घाटी
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर पीड़ितों को याद किया गया, जिसने पर्यटन और स्थानीय लोगों के विश्वास को गहरा आघात पहुंचाया था। ...और पढ़ें
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पहलगाम आतंकी हमले में 26 लोगों की जान गई थी (फाइल फोटो)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। पहलगाम की बैसरन घाटी ही नहीं, आतंकियों की क्रूरता को याद कर आज वह हर इंसान सिहर उठता है, जिसने भी वह दर्दनाक और खौफनाक मंजर अपनी आंखों के समाने देखा था। आतंकियों ने 25 पर्यटकों और एक घोड़ेवाले की नृशंसता से हत्या कर दी थी। उस मंजर को बयान करते हुए चश्मदीदों की आंखें नम हो गईं।
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घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचे पहलगाम पौनी एसोसिएशन के अध्यक्ष वहीद अहमद वानी ने कहा, वह कयामत का दिन था। उस दिन दोपहर 2:30 बजे मुझे स्थानीय पुलिस स्टेशन से फोन आया। बताया गया कि बैसरन में कुछ गड़बड़ हुई है। मैं तीन किलोमीटर दूर था, तुरंत बैसरन रवाना हुआ। पहलगाम में आतंकियों ने 26 पर्यटकों को गोली मार दी थी।
बैसरन में आतंकियों ने कश्मीर के पर्यटन और लोगों के विश्वास पर हमला किया था। अब असली लड़ाई पर्यटकों के विश्वास बहाली की है। विश्वास टूटने का असर पर्यटकों की आमद पर दिखा और हमले के तुरंत बाद पर्यटकों ने पहलगाम के साथ पूरे कश्मीर से दूरी बना ली थी।
पर्यटन पर पड़ा गहरा असर
हमले के एक वर्ष बाद फिर से पर्यटक पहलगाम पहुंच रहे हैं पर आज भी वह विश्वास पूरी तरह जुड़ नहीं पाया है। पहलगाम में सामान्य मौसम में प्रतिदिन तीन हजार के आसपास पर्यटक कश्मीर पहुंचते थे और पीक सीजन में यह संख्या बढ़कर सात से दस हजार हो जाती थी। विश्वास बहाली के तमाम प्रयास के बावजूद अब यह संख्या आधी से भी कम ही है।
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पिछले साल पहलगाम में हुए आतंकी हमले के दौरान पर्यटकों को बचाने के लिए आतंकियों से मुकाबला करते हुए अपनी जान न्यौछावर करने वाले स्थानीय घोड़ा संचालक सैयद आदिल शाह के परिवारवालों को मंगलवार को महाराष्ट्र के उपमुख्यमत्री एकनाथ शिंदे ने एक मकान भेंट किया। शिवसेना की ओर से पहलगाम हमले की पहली बरसी से एक दिन पहले आदिल के गांव हपतनार (पहलगाम) में एक समारोह का आयोजन किया गया।
घोड़ा संचालक सैयद आदिल शाह के परिवार को मिला घर
जिसमें महाराष्ट्र के मंत्री संजय शिरसाट और योगेश रामदास कदम मौजूद रहे, जबकि उपमुख्यमंत्री शिंदे वर्चुअल माध्यम से शामिल हुए। इस दौरान आदिल के परिजनों को मंत्री ने नए मकान की चाबी सौंपी। बता दें कि उपमुख्यमंत्री शिंदे ने पहलगाम आतंकी हमले में मारे गए सैयद आदिल शाह के परिवारवालों को एक मकान और हर संभव मदद देने का वादा किया था।
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एक वर्ष पहले हुए बैसरन (पहलगाम) हमले के बाद जो हुआ, उसके बारे में आतंकियों और उनके आकाओं ने कभी नहीं सोचा था। जम्मू-कश्मीर में आतंक मचाने वाले आतंकी और उनके सरगना अब खुद आतंकित हैं और अपनी जान बचाने के लिए मारे-मारे फिर रहे हैं। पूर्व सक्रियता के साथ खोजो और मारो अभियान से आगे बढ़ते हुए सुरक्षाबल अब उनके रास्ते भी बंद करते जा रहे हैं।
अब भी खौफ के साये में आतंकी
आतंकियों को अपने ठिकाने से बाहर निकलने का मौका नहीं मिल रहा है और अगर मिलता है तो उनका सामना मौत से होता है। उच्चर्वतीय और वनीय क्षेत्रों में सुरक्षाबल पहले से कहीं ज्यादा आक्रामक तरीके से अभियान चला रहे हैं, जिसमें ड्रोन और इलेक्ट्रानिक सर्वेलांस का भी सहारा लिया जा रहा है।
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने भी जंगल और माउंटेन वारफेर में विशेषज्ञ अपनी दो इकाइयां स्नो लैपर्ड (हिम तेंदुए) और मरखोर को ऊंचाई वाले इलाकों में तैनात किया है। आतंकियों की नकेल कसने के लिए एकीकृत मुख्यालय को और ज्यादा समर्थ बनाया गया है।
पहलगाम आतंकी हमले की बरसी के मद्देनजर मिले खुफिया इनपुट के बाद जम्मू में सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह चाक-चौबंद कर दी गई है। इसी कड़ी में सुरक्षाबलों ने बागे-बाहु स्थित महामाया मंदिर के आसपास के रेका जंगल क्षेत्र में व्यापक माकड्रिल कर आतंकवाद विरोधी तैयारियों को परखा और मजबूत किया। इस दौरान सुरक्षाबलों ने जंगल में छिपे आतंकियों की तलाश और उन्हें निष्क्रिय करने की पूरी रणनीति का प्रदर्शन किया।
पहलगाम के जवाब में हुआ था ऑपरेशन सिंदूर
पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी की पूर्व संध्या पर इसके जवाब में किया गया ऑपरेशन सिंदूर की कार्रवाई की याद दिलाते हुए भारतीय सेना ने पाकिस्तान को आतंकी कृत्यों से बाज आने की परोक्ष मगर सख्त हिदायत देने से गुरेज नहीं किया।

ऑपरेशन सिंदूर को पहलगाम का न्याय बताते हुए सेना ने कहा कि जब मानवता की सीमाएं लांघी जाती हैं तो इसका जवाब निर्णायक होता है। साथ ही आतंकवाद के खिलाफ लड़ने के अपने संकल्प को दोहराते हुए सेना ने पाकिस्तान को चेताया भी कि पहलगाम के संदर्भ में न्याय मिल गया मगर भारत भूलता नहीं है।
अब भी नहीं भरे जख्म
हरियाणा के करनाल के एक परिवार के लिए समय जैसे उसी दिन थम गया। हमले की पहली बरसी की पूर्व संध्या पर भारतीय नौसेना के बलिदानी लेफ्टिनेंट विनय नरवाल के पिता, राजेश नरवाल ने नम आंखों से अपने बेटे को याद किया।

राजेश नरवाल ने उस काली रात को याद करते हुए बताया कि वह पल उनके जीवन का सबसे कठिन समय था। उन्होंने कहा कि कल एक साल पूरा हो जाएगा। मुझे वह पल आज भी साफ याद है, मैं सो रहा था, तभी मुझे वह बुरी खबर मिली। उस एक पल ने मेरी पूरी दुनिया बदल दी। जिंदगी जैसे वहीं थम सी गई।